International
oi-Siddharth Purohit
Bangladesh
Election
2025:
बांग्लादेश
में
अल्पसंख्यकों
पर
बढ़ते
अत्याचारों
के
बीच
एक
बड़ा
राजनीतिक
ऐसी
खबर
सामने
आई
है
जिस
पर
यकीन
करना
मुश्किल
है।
हिंदू
नेता
गोविंद
चंद्र
प्रमाणिक
आगामी
राष्ट्रीय
चुनावों
में
पूर्व
प्रधानमंत्री
शेख
हसीना
के
क्षेत्र
से
चुनाव
लड़ने
जा
रहे
हैं।
गोविंद
चंद्र
प्रमाणिक
बांग्लादेश
जातीय
हिंदू
महाजोट
के
महासचिव
हैं
और
वे
गोपालगंज-3
(कोटलीपारा-तुंगीपारा)
सीट
से
12
फरवरी
को
होने
वाले
चुनाव
में
स्वतंत्र
उम्मीदवार
के
रूप
में
मैदान
में
उतरेंगे।
आवामी
लीग
पर
लगा
बैन
बांग्लादेश
के
प्रमुख
अख़बार
“द
डेली
स्टार”
के
मुताबिक,
हिंदू
महाजोट
के
गोपालगंज
जिला
अध्यक्ष
बिजन
रॉय
ने
बताया
है
कि
गोविंद
चंद्र
प्रमाणिक
28
दिसंबर
को
अपना
नामांकन
दाखिल
करेंगे।
इस
सीट
का
राजनीतिक
महत्व
इसलिए
भी
ज्यादा
है
क्योंकि
यह
लंबे
समय
तक
शेख
हसीना
का
गढ़
रही
है।

“मैं
किसी
पार्टी
से
जुड़ा
नहीं
हूं”
प्रमाणिक
खुद
को
एक
निष्पक्ष
उम्मीदवार
बताते
हैं।
उन्होंने
साफ
कहा,
“मेरा
किसी
भी
राजनीतिक
दल
से
कोई
संबंध
नहीं
है
और
न
ही
मैं
पहले
कभी
चुनावी
राजनीति
में
रहा
हूं।”
उनका
कहना
है
कि
वे
किसी
पार्टी
के
एजेंडे
से
नहीं,
बल्कि
जनता
की
आवाज़
बनकर
चुनाव
लड़ना
चाहते
हैं।
पार्टी
सांसदों
पर
उठाए
सवाल
एक
बांग्लादेशी
प्रकाशन
से
बातचीत
में
गोविंद
चंद्र
प्रमाणिक
ने
कहा
कि
राजनीतिक
दलों
से
चुने
गए
सांसद
पार्टी
अनुशासन
के
कारण
आम
लोगों
की
समस्याओं
को
सही
तरीके
से
नहीं
उठा
पाते।
उन्होंने
कहा,
“मैं
इस
कमी
को
दूर
करना
चाहता
हूं
और
सीधे
जनता
की
बात
संसद
तक
पहुंचाना
चाहता
हूं।”
हसीना
की
सीट
पर
कई
दावेदार
गोपालगंज-3
सीट
से
कई
अन्य
उम्मीदवार
भी
चुनावी
मैदान
में
हैं।
इनमें
बीएनपी
से
एसएम
जिलानी,
नेशनल
सिटीजन
पार्टी
(NCP)
से
आरिफुल
दरिया,
जमात-ए-इस्लामी
से
एमएम
रेजाउल
करीम,
गण
अधिकार
परिषद
से
अबुल
बशर,
इस्लामी
आंदोलन
बांग्लादेश
से
मारूफ
शेख,
नेशनल
पीपुल्स
पार्टी
से
शेख
सलाहुद्दीन
और
खिलाफत
मज्लिस
से
अली
अहमद
शामिल
हैं।
इसके
अलावा
स्वतंत्र
उम्मीदवार
मो.
हबीबुर
रहमान
और
मोहम्मद
अनवर
हुसैन
भी
चुनाव
लड़
रहे
हैं।
हसीना
सरकार
गिरने
के
बाद
बढ़ी
हिंसा
पिछले
साल
शेख
हसीना
को
सत्ता
से
हटाए
जाने
के
बाद
बांग्लादेश
में
कट्टरपंथी
गुटों
ने
सत्ता
के
खालीपन
का
फायदा
उठाया
है।
इसका
असर
सीधे
अल्पसंख्यकों
पर
पड़ा
है।
हिंदू,
ईसाई,
सूफी
और
अहमदिया
मुस्लिम
समुदाय
के
खिलाफ
हिंसा
के
मामलों
में
तेज़
बढ़ोतरी
देखी
गई
है।
भारत
विरोधी
नैरेटिव
का
इस्तेमाल
मुहम्मद
यूनुस
के
नेतृत्व
वाली
अंतरिम
सरकार
के
दौरान
कट्टरपंथी
समूह
भारत
विरोधी
भावनाओं
का
इस्तेमाल
कर
अल्पसंख्यकों
पर
हमलों
को
सही
ठहराने
की
कोशिश
कर
रहे
हैं।
इससे
देश
में
धार्मिक
तनाव
और
असुरक्षा
का
माहौल
और
गहरा
हुआ
है।
दीपू
चंद्र
दास
की
हत्या
से
उबाल
हाल
ही
में
मैमनसिंह
में
युवा
हिंदू
दीपू
चंद्र
दास
की
बेरहमी
से
लिंचिंग
और
हत्या
के
बाद
देश
में
गुस्सा
और
डर
दोनों
फैल
गए।
इस
घटना
के
बाद
अल्पसंख्यकों
पर
हो
रही
हिंसा
को
लेकर
नए
सिरे
से
विरोध
प्रदर्शन
शुरू
हो
गए।
चुनाव
को
लेकर
चिंता
बरकरार
बांग्लादेश
नोबेल
विजेता
मुहम्मद
यूनुस
की
अंतरिम
सरकार
के
तहत
चुनाव
की
ओर
बढ़
रहा
है।
सरकार
ने
निष्पक्ष
और
शांतिपूर्ण
चुनाव
का
वादा
किया
है,
लेकिन
मीडिया
संस्थानों
पर
हालिया
हमलों
और
छिटपुट
हिंसा
ने
इन
दावों
पर
सवाल
खड़े
कर
दिए
हैं।
आवामी
लीग
चुनाव
से
बाहर
पूर्व
प्रधानमंत्री
शेख
हसीना
की
पार्टी
आवामी
लीग
को
संशोधित
आतंकवाद
विरोधी
कानून
के
तहत
प्रतिबंधित
कर
दिया
गया
है।
इस
कारण
पार्टी
12
फरवरी
2026
को
होने
वाले
चुनाव
में
हिस्सा
लेने
के
लिए
अयोग्य
हो
गई
है।
‘जुलाई
विद्रोह’
के
बाद
बदली
सियासत
यह
फैसला
5
अगस्त
2024
के
‘जुलाई
विद्रोह’
के
बाद
लिया
गया
था,
जब
हिंसक
छात्र
आंदोलनों
के
चलते
शेख
हसीना
की
सरकार
गिर
गई
थी।
इसके
बाद
मुहम्मद
यूनुस
के
अंतरिम
प्रशासन
ने
एक
कार्यकारी
आदेश
के
जरिए
आवामी
लीग
को
भंग
कर
दिया।
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खबर
पर
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