Assam Arunachal Pradesh Border Dispute: असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सीमा विवाद एक बार फिर सड़क पर उतर आया है. धेमाजी जिले में गुरुवार को हालात तब बिगड़ गए, जब आर्थिक नाकेबंदी कर रहे प्रदर्शनकारियों और अरुणाचल प्रदेश की ओर से आए लोगों के बीच झड़प हो गई. आरोप है कि पहले पथराव हुआ और फिर हाथापाई शुरू हो गई. स्थिति संभालने के लिए अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने अपनी तरफ मौजूद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हवा में तीन गोलियां चलाईं. यह घटना ऐसे समय हुई है, जब असम में अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी का दूसरा दिन है. नाकेबंदी की वजह दो दिन पहले हुई कथित गोलीबारी है, जिसमें असम के 12 लोग घायल हुए थे. यानी सीमा विवाद अब सिर्फ जमीन के दावे तक सीमित नहीं है. सड़कें बंद हैं, सामान की आवाजाही प्रभावित है और दोनों तरफ तनाव बढ़ता दिख रहा है.
मिसिंग समुदाय के प्रमुख छात्र संगठन ‘तकाम मिसिंग पोरिन केबांग’ यानी टीएमपीके ने अन्य स्थानीय संगठनों के साथ मिलकर यह नाकेबंदी शुरू की है. प्रदर्शनकारियों ने अरुणाचल प्रदेश आने-जाने वाले वाहनों को रोक दिया है. हालांकि आपातकालीन सेवाओं और स्कूल वाहनों को इससे बाहर रखा गया है. संगठनों की मांग है कि असम की जमीन पर कथित अतिक्रमण खत्म किया जाए. दो दिन पहले हुई गोलीबारी के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो और उन्हें गिरफ्तार कर असम पुलिस को सौंपा जाए. आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी.
रास्ते रोकने पर बढ़ा तनाव, पुलिस ने हवा में चलाई तीन गोलियां
- धेमाजी के सिलापाथर में लिकाबली प्रवेश बिंदु पर गुरुवार को प्रदर्शनकारियों और अरुणाचल प्रदेश की तरफ से आए लोगों के बीच तनाव बढ़ गया. एक अधिकारी के मुताबिक, नाकेबंदी के दौरान अरुणाचल प्रदेश के कुछ लोगों ने असम के प्रदर्शनकारियों पर पत्थर फेंके. इससे कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हो गई. अधिकारी ने बताया कि इसके बाद अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने अपनी ओर मौजूद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हवा में तीन गोलियां चलाईं. फिलहाल किसी के गोली लगने की सूचना नहीं है.
- टीएमपीके के साथ मिसिंग मिमाग केबांग और तकाम मिसिंग महिला केबांग भी आंदोलन में शामिल हैं. संगठनों ने धेमाजी में द्वारमुख-बंदरदेवा, रुक्सिन और सिलापाथर, लखीमपुर में बंदरदेवा, गोहपुर में सोलेन्गी और बिश्वनाथ में पाभोई समेत कई प्रमुख रास्तों को रोक दिया है. इसका सीधा असर दोनों राज्यों के बीच वाहनों की आवाजाही पर पड़ रहा है. प्रदर्शनकारी साफ कह रहे हैं कि वे इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं हैं.
‘दोषियों की गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी रहेगा’
टीएमपीके के सचिव सान पैंगिंग ने कहा, ‘दोनों राज्यों की सीमा पर ऐसी घटनाएं कोई नयी बात नहीं हैं, लेकिन हमारी सरकारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. इस बार, हमारा आंदोलन जारी रहेगा, जब तक सभी दोषियों को गिरफ्तार करके असम पुलिस को नहीं सौंप दिया जाता.’ संगठन सीमा विवाद का जल्द समाधान चाहता है. साथ ही वह कथित अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहा है. नाकेबंदी हटाने को लेकर समाधान निकालने के लिए असम के सीमा सुरक्षा और विकास मंत्री अतुल बोरा और शिक्षा मंत्री रानोज पेगू धेमाजी के सर्किट हाउस में टीएमपीके नेताओं से बैठक करेंगे.
10 अगस्त की गोलीबारी से शुरू हुआ विवाद
विवाद की मौजूदा कड़ी 10 अगस्त की घटना से जुड़ी है. गेरुकामुख थाना क्षेत्र के गोगामुख राजस्व क्षेत्र में मिंगमांग बस्ती के पास असम-अरुणाचल सीमा पर गोलीबारी हुई थी. पुलिस के अनुसार, यह झड़प असम की जमीन पर अरुणाचल प्रदेश के लोगों द्वारा कथित अतिक्रमण को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद हुई. इस कथित गोलीबारी में असम के कम से कम 12 लोग घायल हुए थे. इसके बाद मिसिंग समुदाय के संगठनों ने आर्थिक नाकेबंदी का ऐलान कर दिया.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को घटना की जांच का आदेश देना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. शर्मा ने सीमा की स्थिति पर नजर रखने के लिए शिक्षा मंत्री रानोज पेगू को भेजा था. मुख्यमंत्री के मुताबिक, पेमा खांडू ने दोनों राज्यों की सीमा पर गोलीबारी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है.
804 किलोमीटर लंबी सीमा और 1,200 विवादित बिंदु
असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा करीब 804.1 किलोमीटर लंबी है. यह असम के उदलगुरी, सोनितपुर, बिस्वनाथ, लखीमपुर, धेमाजी, तिनसुकिया, डिब्रूगढ़ और चराइदेव जिलों से लगी है. दोनों राज्यों के बीच अंतरराज्यीय सीमा पर करीब 1,200 विवादित बिंदु बताए जाते हैं. असम सरकार ने 29 जुलाई को विधानसभा में बताया था कि अरुणाचल प्रदेश ने 16,144.01 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण किया है. इनमें से 858.91 वर्ग किलोमीटर जमीन पर अरुणाचल प्रदेश अपना दावा करता है.
समझौते के बाद भी पूरी तरह नहीं सुलझा मामला
सीमा विवाद सुलझाने के लिए दोनों राज्यों ने 12 क्षेत्रीय समितियां बनाई हैं. इन समितियों ने विवादित इलाकों का संयुक्त दौरा किया और स्थानीय पक्षों से बातचीत भी की. 15 जुलाई 2022 को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नामसाई घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए थे. इसके बाद अरुणाचल प्रदेश द्वारा दावा किए जा रहे असम के 123 गांवों को लेकर विवाद सुलझाने की प्रक्रिया शुरू हुई. 20 अप्रैल 2023 को केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में दोनों राज्यों ने समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए. दावा किए गए 123 गांवों में से 71 को लेकर विवाद सुलझ चुका है, जबकि 52 गांवों पर बातचीत जारी है.
मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित
अरुणाचल प्रदेश को 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला. इससे पहले वह केंद्र शासित क्षेत्र था. राज्य का दर्जा मिलने के बाद एक त्रिपक्षीय समिति बनाई गई थी. समिति ने कुछ इलाकों को असम से अरुणाचल प्रदेश में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी. असम ने इसका विरोध किया. यही विवाद आगे चलकर कानूनी लड़ाई में बदल गया और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. ऐसे में मौजूदा आर्थिक नाकेबंदी और ताजा झड़प ने पुराने सीमा विवाद को फिर से बेहद संवेदनशील बना दिया है. फिलहाल दोनों राज्यों की नजर बातचीत पर है, लेकिन सड़क पर तनाव कम होता नहीं दिख रहा.

