कश्मीर पर भारत के रुख का समर्थन
मिर्जोयन ने चाबहार बंदरगाह का इस्तेमाल करते हुए भारत से आर्थिक सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है। उन्होंने ईरान के साथ भी अच्छे संबंध बनाए रखने की बात कही है। मिर्जोयन ने कहा कि उनके देश की वैश्विक शांति के लिए प्रतिबद्धता है। आर्मेनिया के विदेश मंत्री ने अपने बयान में जम्मू-कश्मीर पर भारत के रुख का समर्थन किया। साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का समर्थन किया, जिसकी मांग भारत भी लंबे समय से कर रहा है।
उन्होंने भारत और आर्मेनिया के बीच सदियों पुराने संबंधों का भी जिक्र करते हुए भारतीय छात्रों को आर्मेनिया में पढ़ने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने येरेवन और दिल्ली के बीच सीधी उड़ान शुरू करने की भी उम्मीद जताई। अजरबैजान की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आर्मेनिया का इरादा सिर्फ अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ाना है। आर्मेनिया किसी भी देश के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई नहीं करना चाहता।
आर्मेनिया को मिलते रहे हैं भारत से हथियार
अजरबैजान के साथ लंबे समय से संघर्ष के में उलझे आर्मेनिया को हालिया वर्षों में भारत से हथियार मिले हैं। आर्मेनिया को भारत से उसने रॉकेट-लांचर, तोपखाने बंदूकें, गोला-बारूद, स्नाइपर राइफलें, एंटी-टैंक मिसाइलें खरीदी हैं। भारत के लिए आर्मेनिया रक्षा भागीदार के अलावा राजनीतिक भागीदार भी है। ऐसे में एक बार फिर आर्मेनिया ने भारत से हथियार खरीद की इच्छा जताई है।

