सपा अध्यक्ष ने बजट को अमीरी-गरीबी की खाई पाटने वाला बजट बनाने की बात कही। निर्बल से सबल बने इसको आधार बनाकर बजट बनना चाहिए। आवारा पशुओं के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यूपी चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने दावा किया था कि रोडमैप तैयार है। हम इस पर काम करेंगे। लेकिन, आज भी किसान आवारा पशुओं से परेशान हैं। फेक न्यूज को लेकर भी उन्होंने करारा हमला बोला। इस पर सरकार को ध्यान देने की बात कही। इसके लिए सख्त कानून की बात कही।
अखिलेश ने क्या कहा?
अखिलेश यादव ने बजट पर भाषण में कहा कि डिजिटल अरेस्ट इस समय बड़ी समस्या बनी हुई है। उन्होंने मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसके लिए कौन सी बात है? बजट पर अखिलेश यादव ने कहा कि पीडीए के उत्थान के लिए कुछ भी नहीं है। कुछ लोग अपने जीडीपी की कहानी बताते थे। वह आज वह क्यों कम होता जा रहा है। जीडीपी आज 6.4 फीसदी के आसपास क्यों पहुंच गया? केवल जीडीपी ही नहीं, डॉलर का रेट भी घटा है। 87 रुपए में 1 डॉलर मिल रहा है। क्या सरकार के पास कोई जवाब है? इन्वेस्टमेंट और आर्थिक विकास की दर में कमी सरकार पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।
विकसित भारत पर सवाल
अखिलेश यादव ने विकसित भारत को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि इस सरकार में न अच्छे दिन आए हैं और न आएंगे। उन्होंने कहा कि समाज में भेदभाव बढ़ रहा है। दोनों के बीच खाई पैदा हो रही है। मुट्ठी पर लोगों के पास पूरे देश की संपदा पहुंच गई है। 80 करोड लोगों को राशन बांटा जा रहा है। क्या यह विकसित भारत की तस्वीर है? अखिलेश यादव ने सवाल किया कि दुनिया में हम प्रति व्यक्ति आय के मामले में कहां खड़े हैं? उन्होंने कहा कि हम दावा करते हैं कि देश वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुंच रहा है।
अखिलेश ने कहा कि इसके बाद भी डॉलर क्यों गिर रहा है। भूख के इंडेक्स में हम कहां जा रहे हैं। स्कूली शिक्षा का क्या हुआ? स्वास्थ्य महंगी क्यों हुआ। नौकरी की व्यवस्था नहीं है। महिलाओं पर अपराध के आंकड़े बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि पहले आप लोगों की थाली भर दीजिए। हवा-हवाई मुद्दों को कम उछालिए। जिन छह क्षेत्रों में काम की बात कही गई है, उसको लेकर काम करना होगा।
शौचालय का उठाया मुद्दा
अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही इज्जत घर यानी शौचालय निर्माण योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस योजना का खूब प्रचार किया गया। छत्तीसगढ़ में एक बुजुर्ग महिला ने बकरी बेचकर शौचालय बनवाया था। देश के प्रधानमंत्री ने उनका सम्मान किया। सवाल यह है कि उस महिला को अपनी बकरी क्यों बेचनी पड़ी। अखिलेश ने कहा कि इसका अर्थ है कि आपकी बनाई स्कीम जमीन पर नहीं पहुंच रही है। उसके लिए पर्याप्त पैसा नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर सरकार का पैसा लाभुक तक क्यों नहीं पहुंचा? सरकार की यह भी जिम्मेदारी है कि जो शौचालय आपने बनवाए हैं, वहां पानी नहीं पहुंचता है। क्या यह विकसित भारत की तस्वीर है?

