ED के मुताबिक, इस निवेश के बदले कंपनी को प्रति शेयर ₹11,510 के प्रीमियम पर शेयर दिए गए. जांच एजेंसी का आरोप था कि इस निवेश के जरिए डिजिटल न्यूज वेबसाइटों में विदेशी निवेश की 26 प्रतिशत सीमा और उससे जुड़े नियमों को दरकिनार करने की कोशिश की गई. ED ने यह भी आरोप लगाया कि विदेश से आए पैसे का इस्तेमाल पत्रकारों, फ्रीलांसरों और अन्य लोगों को वेतन, कंसल्टेंसी फीस और किराया देने में किया गया. एजेंसी ने इस फंडिंग को कथित तौर पर भारत के खिलाफ सामग्री तैयार करने से जोड़ा.
ED ने क्या कार्रवाई की?
9 फरवरी 2021 को ED ने न्यूज़क्लिक के कार्यालय और उससे जुड़े लोगों के कुल 11 ठिकानों पर तलाशी ली. इस दौरान प्रबीर पुरकायस्थ के आवास से अलग-अलग देशों की विदेशी मुद्रा जब्त की गई, जिसकी कीमत करीब ₹2.62 लाख बताई गई. उनका लैपटॉप और ईमेल से संबंधित सामग्री भी जब्त की गई. इसके बाद 26 अगस्त 2022 को ED ने प्रबीर पुरकायस्थ के मकान और कुछ फिक्स्ड डिपॉजिट समेत करीब ₹4.93 करोड़ की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया. इस कार्रवाई की पुष्टि संबंधित प्राधिकरण ने की. हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने 21 जून 2021 को जांच पर रोक लगाते हुए ED को कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था.
नेविल रॉय सिंघम की भूमिका को लेकर ED का दावा
ED की जांच में नेविल रॉय सिंघम को इस पूरे फंडिंग नेटवर्क की अहम कड़ी बताया गया. सिंघम अमेरिकी नागरिक हैं और श्रीलंकाई मूल के बताए जाते हैं. जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि उनके चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) से करीबी संबंध हैं और वह अलग-अलग देशों में कई संगठनों के जरिए फंडिंग करते हैं. ED का दावा है कि सिंघम ने प्रबीर पुरकायस्थ के जरिए न्यूज़क्लिक को फंडिंग उपलब्ध कराई और कंपनी की गतिविधियों को लेकर गलत जानकारी देकर विदेशी धन हासिल किया. एजेंसी के मुताबिक, इस फंडिंग का मकसद भारत में सूचना के स्तर पर ऐसा अभियान चलाना था, जिससे सरकार और देश की संस्थाओं की छवि प्रभावित हो. जांच में कोरोना महामारी से निपटने के सरकार के तरीके, कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन और कश्मीर के नक्शे जैसे विषयों पर प्रकाशित सामग्री का भी उल्लेख किया गया. यह ED के आरोप और जांच के निष्कर्ष हैं. इनसे अपने आप यह साबित नहीं होता कि न्यूज़क्लिक पर प्रकाशित हर संबंधित खबर किसी विदेशी एजेंडे के तहत तैयार की गई थी.
ईमेल और चीन से जुड़े कार्यक्रमों का जिक्र
ED ने अपनी जांच में नेविल रॉय सिंघम और प्रबीर पुरकायस्थ के बीच हुए ईमेल संवादों का भी हवाला दिया है. एजेंसी के मुताबिक, इन संवादों में चीन से जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान और कुछ अन्य पत्रकारों तथा वामपंथी संगठनों से जुड़े लोगों की बातचीत का जिक्र है. जांच एजेंसी ने बेनी कुरुविला, उर्वशी सरकार, रेनेटा पोर्टो बुग्नी, मनोलो डी लॉस सैंटोस, टिंग्स चक और विजय प्रसाद समेत कई लोगों के नामों का उल्लेख किया है. ED का दावा है कि चीन में बनी दो फिल्मों—‘Red Star over China’ और ‘The Secret of China’—की डबिंग और सबटाइटलिंग को लेकर भी बातचीत हुई थी. एजेंसी ने इन गतिविधियों को चीन की छवि बेहतर बनाने के कथित प्रयासों से जोड़ा. हालांकि, किसी ईमेल में नाम आने या किसी कार्यक्रम में सहयोग करने भर से किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं होती. इसके लिए संबंधित साक्ष्यों और उनकी कानूनी जांच का महत्व है. दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 वाले मामले में FIR और ECIR रद्द की इस मामले में 29 मई 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस की FIR और ED की ECIR रद्द कर दी. अदालत ने माना कि इस मामले में IPC की धारा 420 यानी धोखाधड़ी, धारा 406 यानी आपराधिक विश्वासघात और धारा 120-B यानी आपराधिक साजिश के जरूरी तत्व नहीं बनते.
इस फैसले के बाद ED ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की ED की दलील है कि हाईकोर्ट ने ईमेल और बयानों समेत जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया. एजेंसी का यह भी कहना है कि जांच पर लंबे समय तक लगी रोक के कारण जांच आगे नहीं बढ़ सकी और हाईकोर्ट ने रिट याचिका के स्तर पर ही मामले के तथ्यों का विस्तृत मूल्यांकन कर दिया. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में ED की चुनौती का नतीजा महत्वपूर्ण होगा
2023 में UAPA के तहत दर्ज हुआ दूसरा मामला
न्यूज़क्लिक से जुड़ा दूसरा बड़ा मामला 17 अगस्त 2023 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की FIR से शुरू हुआ. इसमें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए. ED ने 17 अक्टूबर 2023 को इस FIR के आधार पर अलग ECIR दर्ज की.
इस मामले में आरोप है कि न्यूज़क्लिक को अप्रैल 2018 से विदेश से करोड़ों रुपये मिले. जांच में नेविल रॉय सिंघम और अमेरिका तथा ब्राजील में स्थित कुछ संस्थाओं के जरिए कथित फंडिंग का आरोप लगाया गया. FIR में यह भी आरोप है कि विदेशी धन का इस्तेमाल चीन के हितों से जुड़ी खबरों और अभियानों को बढ़ावा देने के लिए किया गया. आरोपों में कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत से अलग या विवादित क्षेत्र के रूप में पेश करने, किसानों के आंदोलन को लंबा खींचने, कोरोना महामारी से निपटने के भारत सरकार के प्रयासों को बदनाम करने और 2019 के लोकसभा चुनावों को प्रभावित करने की कथित साजिश जैसे मुद्दे शामिल हैं. इन आरोपों की सत्यता का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है.
पत्रकारों के बयानों की जांच
*ED ने न्यूज़क्लिक से जुड़े दो पत्रकार के बयान दर्ज किए.एजेंसी के मुताबिक, दोनों को कंपनी से भुगतान मिला था.
ED ने इनमें से एक पत्रकार के कुछ पोस्ट और लेखों में भारत के नक्शे को लेकर प्रकाशित सामग्री पर भी सवाल उठाए. एजेंसी का आरोप है कि कुछ सामग्री में कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को इस तरह दिखाया गया, जिससे उनकी भारतीय संप्रभुता पर सवाल खड़े होते हैं. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 30 मार्च 2024 को पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की. 30 अप्रैल 2024 को अदालत ने इसका संज्ञान लिया. उपलब्ध विवरण के मुताबिक, दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने की प्रक्रिया से जुड़ी अर्जी के कारण मामला ट्रायल कोर्ट में लंबित रहा है.
CBI का मामला: ₹28.46 करोड़ की विदेशी रकम पर सवाल
न्यूज़क्लिक के खिलाफ CBI ने 7 अक्टूबर 2023 को विदेशी अंशदान नियमन कानून यानी FCRA के तहत एक अलग FIR दर्ज की. इस मामले में आरोप है कि PPK Newsclick Studio Pvt. Ltd. को चार विदेशी संस्थाओं से करीब ₹28.46 करोड़ की ऐसी रकम मिली, जिसके स्रोत और स्वरूप को लेकर सवाल उठे. FIR में अमेरिका की Worldwide Media Holdings LLC से मिले ₹9.59 करोड़ के निवेश का भी उल्लेख किया गया है.
CBI ने प्रबीर पुरकायस्थ, जेसन पफेट्चर और नेविल रॉय सिंघम समेत संबंधित लोगों के खिलाफ विदेशी धन हासिल करने में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए.
ED के मुताबिक, इस FIR में PMLA के तहत निर्धारित अनुसूचित अपराध नहीं होने के कारण अलग ECIR दर्ज नहीं की गई. हालांकि, विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून यानी FEMA के तहत कार्रवाई की गई.
FEMA जांच में ₹92.33 करोड़ के लेन-देन पर सवाल
ED ने FEMA के तहत अपनी जांच में कुल ₹92.33 करोड़ के विदेशी लेन-देन को जांच के दायरे में रखा.
जांच एजेंसी के अनुसार, इसमें दो प्रमुख हिस्से शामिल थे
* ₹9.59 करोड़ का विदेशी निवेश: ED ने आरोप लगाया कि यह निवेश विदेशी निवेश की निर्धारित सीमा और नियमों के खिलाफ था.
* ₹82.63 करोड़ की सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट से जुड़ी रकम: एजेंसी के मुताबिक, यह रकम अमेरिका की Justice & Education Fund, Tricontinental Limited और GSPAN LLC जैसी संस्थाओं से सॉफ्टवेयर सेवाओं के निर्यात के नाम पर प्राप्त हुई, जबकि कथित तौर पर उन सेवाओं का वास्तविक निर्यात नहीं हुआ था.
इसके अलावा, ED ने विदेशी निवेश से संबंधित फॉर्म FC-GPR में गलत जानकारी देने और फॉर्म FLA दाखिल नहीं करने जैसी प्रक्रियागत अनियमितताओं का भी आरोप लगाया.
184 करोड़ का जुर्माना
ED की शिकायत पर हुई FEMA adjudication की कार्यवाही में PPK Newsclick Studio Pvt. Ltd. पर ₹120 करोड़ और प्रबीर पुरकायस्थ पर ₹64 करोड़ का जुर्माना लगाया गया. कुल जुर्माना ₹184 करोड़ है. हालांकि, कंपनी और प्रबीर पुरकायस्थ ने इस फैसले के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ये अपीलें लंबित हैं. इसलिए इस जुर्माने से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया को अंतिम रूप से समाप्त मानना सही नहीं होगा.
अमेरिका में भी सिंघम के नेटवर्क की जांच का दावा
नेविल रॉय सिंघम की गतिविधियों को लेकर अमेरिका में भी जांच और संसदीय पड़ताल का जिक्र सामने आया है. ED के उपलब्ध विवरण के मुताबिक, उसने सिंघम से जुड़ी जांच में मदद के लिए अमेरिकी जांच एजेंसी FBI के साथ जानकारी साझा की है. इसके अलावा, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की Ways and Means Committee द्वारा सिंघम से जुड़े कुछ अमेरिकी संगठनों—The People’s Forum, BreakThrough News और Tricontinental—से वित्तीय रिकॉर्ड मांगे जाने की जानकारी दी गई है. इन संगठनों को सिंघम के नेटवर्क से 2 करोड़ डॉलर से अधिक मिलने का संदेह जताया गया है. मौजूद विवरण में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित संस्थाओं ने वित्तीय रिकॉर्ड सौंपने के लिए जारी समन का विरोध किया. इस घटनाक्रम को किसी आपराधिक आरोप की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में क्या दावे किए गए?
अगस्त 2023 में The New York Times की एक रिपोर्ट में सिंघम के चीन के सरकारी मीडिया तंत्र से कथित करीबी संबंधों और विभिन्न राजनीतिक व मीडिया संगठनों के साथ उनके वित्तीय रिश्तों की पड़ताल की गई थी. सितंबर 2026 की Fox News रिपोर्ट में न्यूयॉर्क में इजरायल-विरोधी प्रदर्शनों के लिए सिंघम से जुड़े संगठनों की कथित फंडिंग का दावा किया गया. रिपोर्ट में The People’s Forum, Code Pink और BreakThrough News का उल्लेख किया गया. इसमें यह आरोप भी लगाया गया कि अलग-अलग देशों में विरोध प्रदर्शनों के लिए एक साझा नेटवर्क के जरिए संसाधन और संदेश जुटाए गए.
अक्टूबर 2026 में प्रकाशित कुछ भारतीय मीडिया रिपोर्टों में भी सिंघम से जुड़े नेटवर्क को लेकर राजनीतिक आरोप सामने आए. Firstpost, News18 और Moneycontrol की रिपोर्टों के हवाले से कांग्रेस नेता राहुल गांधी और भारत में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को विदेशी फंडिंग से जोड़ने के आरोपों का उल्लेख किया गया है. इन दावों में क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन और ऑनलाइन गेमिंग या जुए से जुड़े माध्यमों के इस्तेमाल की बात भी कही गई है. इन राजनीतिक आरोपों और मीडिया रिपोर्टों को जांच एजेंसियों या अदालतों के अंतिम निष्कर्ष के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए. इनके समर्थन में उपलब्ध स्वतंत्र साक्ष्य और संबंधित पक्षों का जवाब अलग से देखना जरूरी है.
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल क्या हैं?
नेविल रॉय सिंघम और न्यूज़क्लिक से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की मुख्य चिंता विदेशी धन के स्रोत, उसे भारत में लाने के तरीके और उसके वास्तविक इस्तेमाल को लेकर है. एक तरफ ED ने विदेशी निवेश और सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट से जुड़े लेन-देन पर सवाल उठाए हैं. दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने UAPA के तहत गंभीर आरोप लगाए हैं और CBI ने FCRA के कथित उल्लंघन की जांच की है. लेकिन इन सभी मामलों की कानूनी स्थिति एक जैसी नहीं है. 2020 की FIR और उससे जुड़ी ECIR को दिल्ली हाईकोर्ट रद्द कर चुका है और ED ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. 2023 के UAPA मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जबकि FEMA के जुर्माने के खिलाफ अपीलें लंबित हैं. इसलिए इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यह है कि विदेशी फंडिंग से जुड़े वित्तीय लेन-देन, कथित राजनीतिक या मीडिया गतिविधियों और आपराधिक साजिश के आरोपों को अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग परखा जाए.

