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Paddy Crop Protection: लगातार बारिश और जलभराव से धान की फसल में फंगस, जड़ सड़न और कीट-रोग का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में किसानों को सबसे पहले खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी करनी चाहिए और मेड़बंदी मजबूत करनी चाहिए. फसल में रोग के लक्षण दिखने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उचित दवा का इस्तेमाल करें. वहीं बारिश से फसल खराब होने पर पात्र किसान फसल बीमा योजना के तहत समय पर नुकसान की सूचना देकर क्लेम कर सकते हैं.
बारिश का मौसम है ऐसे में दिन प्रतिदिन बारिश होती रहती है. जिससे धान की फसल में जल खराब होते ही अलग-अलग बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं. ऐसे में सबसे पहले जल निकाशी कर उसकी मेड़बन्दी कर दें साथ ही फंगस से बचाव करें,दवा का छिड़काव करें,फसल बीमा क्लेम,यूरिया और पोटाश जैसी कई चीजों का सहारा लेकर आप अपने धान की फसल को खराब होने से बचा सकते हैं. इन सभी चीजों का प्रयोग कर धान की फसल में होने वाले विभिन्न रोग से भी छुटकारा पा सकते हैं.अत्यधिक बारिश या जलभराव से धान की फसल को बचाने और नुकसान की भरपाई के लिए तुरंत यह कदम उठाने जरूरी होते हैं.
बारिश के मौसम में लगातार ज्यादा पानी गिरने से खेतों में जलभराव की समस्या बढ़ जाती है. जिससे फसल की जड़ों में हवा और ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और पौधे कमजोर होकर खराब हो सकते हैं. ऐसे में किसान भाई खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था जरूर करें. खेत में जहां पानी जमा हो रहा है.वहां छोटी-छोटी नालियां बनाकर अतिरिक्त पानी को खेत से बाहर निकाल दें.
साथ ही किसान साथी खेत की मेड़बंदी मजबूत कर दें. ताकि बाहर का पानी खेत में प्रवेश न कर सके और फसल सुरक्षित रहे. खासकर सब्जियों, धान के अलावा दलहन और तिलहन जैसी फसलों में जलभराव से नुकसान हो सकता है. समय पर जल निकासी और मजबूत मेड़बंदी करने से फसल को भारी बारिश के नुकसान से काफी हद तक बचाया जा सकता है.
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बारिश के मौसम में खेत में ज्यादा पानी भर जाने से फसल में फंगस और जड़ सड़न का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में किसान भाई सबसे पहले खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी करें. इसके लिए खेत में छोटी-छोटी नालियां बनाकर जमा पानी को बाहर निकाल दें. ताकि पौधों की जड़ों में लंबे समय तक पानी जमा न रहे. पानी निकलने के बाद खेत को कुछ समय सूखने दें और तुरंत सिंचाई न करें.
फसल में पत्तियों पर धब्बे, तने पर सड़न या पौधे के मुरझाने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत ध्यान दें. खेत में खरपतवार को भी नियंत्रित रखें, ताकि हवा का आवागमन बना रहे. फंगस की समस्या ज्यादा दिखाई देने पर फसल के अनुसार ट्राइकोडर्मा जैसे जैविक फफूंद नियंत्रण या उपयुक्त दवा का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करें.
बारिश के मौसम में धान की फसल में ज्यादा नमी और लगातार पानी भरा रहने से कई तरह के रोग और कीट लगने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में किसान भाई अपनी फसल की नियमित निगरानी जरूर करें. धान की पत्तियों पर धब्बे, पत्तियों का पीला पड़ना, तने में सड़न या पौधों का अचानक सूखना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर दवा का छिड़काव कर दें.
बारिश के मौसम में लगातार तेज बारिश, जलभराव या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण अगर किसान की फसल को नुकसान हो जाता है.तो किसान भाई फसल बीमा योजना के तहत नुकसान की भरपाई के लिए दावा कर सकते हैं. इसके लिए सबसे जरूरी है कि किसान समय पर अपने फसल नुकसान की सूचना संबंधित विभाग, बीमा कंपनी या निर्धारित माध्यम से दें.
धान की फसल में लगातार ज्यादा बारिश होने से खेत में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, जिससे पौधों की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित होता है. ऐसे समय में किसान भाई फसल की स्थिति देखकर पोषक तत्वों की पूर्ति पर ध्यान दें. बारिश के बाद खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी जरूर करें और मिट्टी में नमी सामान्य होने के बाद ही खाद का प्रयोग करें. यूरिया का इस्तेमाल फसल में नाइट्रोजन की कमी होने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें. जबकि पोटाश पौधों को मजबूत बनाने और प्रतिकूल मौसम में सहनशीलता बढ़ाने में मदद कर सकता है. खाद की मात्रा मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के अनुसार रखें. जरूरत से ज्यादा यूरिया देने से फसल गिरने और रोग-कीट का खतरा बढ़ सकता है. सही मात्रा और सही समय पर पोषण देने से धान की अच्छी बढ़वार और बेहतर उपज में मदद मिल सकती है.

