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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुजरात से कनेक्शन दशकों पुराना है. लेकिन एक किस्सा ऐसा भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को पता है. नरेंद्र मोदी जब 2010 में गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने स्वर्णिम गुजरात समारोह मनाया था. उसी वक्त उन्होंने जापान समेत दुनिया के कई देशों में बसे गुजरातियों से मिट्टी और पानी मांगा था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची.
जापान की पीएम सनाए ताकाइची भारत आई हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपनी छोटी बहन बताया. इन्वेस्टमेंट, ट्रेड , पार्टनरशिप की खूब बातें हुईं. कई डील भी हुईं, जो भारत जापान रिश्तों की बुनियाद और मजबूत करेंगी. लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती. यह पीएम मोदी के जापान रिश्ते की सिर्फ एक कड़ी है. किस्से कई हैं, लेकिन एक किस्सा ऐसा भी है जब पीएम मोदी ने जापान में बसे भारतीयों से मिट्टी पानी भेजने की डिमांड की थी. आखिर उसका हुआ क्या?
बात 2010 की है. नरेंद्र मोदी तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे. गुजरात के 50 साल पूरे होने पर उन्होंने पूरे साल ‘स्वर्णिम गुजरात’ समारोह मनाया. तब कई प्रोग्राम किए गए. इन्हीं में से एक था गांधी नगर में महात्मा गांधी का मंदिर बनाना. प्रधानमंत्री ने सोचा कि इस जगह को पूरी दुनिया में बसे गुजरातियों से जोड़ना चाहिए. फिर क्या था, उन्होंने विदेशों में बसे गुजरातियों से अपील की कि वे जिस देश में रहते हैं, वहां की मिट्टी और जल गुजरात भेजें. जापान, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और खाड़ी देशों में बसे गुजराती संगठनों को भी बकायदा पत्र भेजा गया.
मिट्टी और पानी क्यों मंगाया गया?
इसका मकसद निर्माण सामग्री जुटाना नहीं था. इसके पीछे तीन मैसेज थे. पहला, दुनिया के अलग-अलग देशों की मिट्टी और जल एक जगह आकर वैश्विक गुजराती समुदाय का प्रतीक बनें. दूसरा, प्रवासी गुजराती भी गुजरात के स्वर्ण जयंती समारोह में भागीदार महसूस करें. और तीसरा, महात्मा मंदिर केवल एक कन्वेंशन सेंटर नहीं, बल्कि दुनियाभर में बसे गुजरातियों के भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बने.
जापान का क्या रोल था?
जापान उस समय गुजरात का बड़ा इन्वेस्टर बन रहा था. कई जापानी कंपनियां गुजरात में पैसा लगा रही थीं. जापान में गुजराती व्यापारियों का बड़ा समूह था और काफी एक्टिव था. इसी वजह से पीएम मोदी ने जापान के गुजराती संगठनों से भी मिट्टी और जल भेजने का आग्रह किया गया. रिपोर्टस बताती हैं कि दुनियाभर में बसे गुजरातियों ने मिट्टी और जल भेजा. इसका इस्तेमाल महात्मा गांधी मंदिर में किया गया. बड़े गर्व से गुजराती इसे देखते हैं.
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<strong>Gyanendra Kumar Mishra</strong> is a senior journalist with nearly <strong>20 years of experience</strong> in the media industry. He is currently associated with <strong>News18 Hindi </strong>(hindi.new…और पढ़ें

