शाहजहांपुर: आम के बागवानों के लिए फल का पकना साल भर की मेहनत का फल होता है, लेकिन कई बार तैयार आम अंदर से सड़ने लगते हैं. यह समस्या किसानों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं है, क्योंकि आम की फसल साल में एक ही बार आती है. जब पके हुए सुंदर फलों को काटने पर अंदर कालापन या सड़न निकलती है, तो बाजार में इसकी कीमत कौड़ियों के दाम रह जाती है. यह न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि किसान की पूरी साल की लागत और उम्मीदों पर भी पानी फेर देता है. इस बीमारी के कारण बागवानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है, जिससे किसानों की आय पर बुरा असर दिखता है.
कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि आम के फलों में अंदरूनी सड़न एक गंभीर समस्या है जिसे ‘इंटरनल नेक्रोसिस’ भी कहा जाता है. अक्सर बाहर से स्वस्थ दिखने वाला आम अंदर से खराब हो जाता है. इसका मुख्य कारण पोषक तत्वों की कमी, विशेषकर बोरॉन की कमी होती है. ऐसे में जैसे ही किसान को इसके लक्षण दिखाई दें, उन्हें तुरंत सुहागा यानि बोरेक्स का छिड़काव करना चाहिए. उनका कहना है कि अगर समय रहते सही उपचार किया जाए, तो न केवल फल की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी और उनका परिवार खुशहाल बनेगा.
समस्या की पहचान और लक्षण
आम के फलों में होने वाली आंतरिक सड़न को पहचानना मुश्किल होता है, क्योंकि फल बाहर से बिल्कुल सामान्य और आकर्षक दिखाई देता है. लेकिन जब इन फलों को काटकर देखा जाता है, तो गुठली के पास का हिस्सा काला, भूरा या अत्यधिक गला हुआ मिलता है. यह समस्या एक विशिष्ट बीमारी के कारण होती है जो फल के आंतरिक ऊतकों को नष्ट कर देती है. अगर समय पर इस सड़न के लक्षणों को न पहचाना जाए, तो पूरी फसल खराब हो सकती है और बाजार में किसान की साख गिर सकती है.
बोरेक्स का प्रभावी समाधान
इस समस्या का समाधान काफी सरल और किफायती है. 8 से 10 ग्राम बोरेक्स प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर आम के पेड़ों पर छिड़काव करना चाहिए. यह घोल बोरॉन की कमी को पूरा करता है, जो इस सड़न का प्राथमिक कारण है. नियमित अंतराल पर और सही मात्रा में छिड़काव करने से फलों की आंतरिक संरचना मजबूत होती है और सड़ने की प्रक्रिया रुक जाती है. यह एक आजमाया हुआ तरीका है जो बागवानों के नुकसान को न्यूनतम कर सकता है.
किसानों की आय पर प्रभाव
आम की फसल से किसानों को साल में केवल एक बार आमदनी होती है. ऐसे में फलों की गुणवत्ता उनके पूरे साल के बजट को निर्धारित करती है. अगर सड़न की समस्या पर काबू पा लिया जाता है, तो फलों का उचित दाम मिलता है. वैज्ञानिक तकनीकों और उचित पोषक तत्वों के प्रबंधन से किसान अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं. जब फसल अच्छी होगी और बाजार में उसकी मांग बढ़ेगी, तो किसान आर्थिक रूप से समृद्ध होगा और उसका जीवन स्तर भी सुधरेगा.
बागवानी में जागरूकता का महत्व
बागवानी में केवल फसल उगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बीमारियों के प्रति जागरूक रहना भी जरूरी है. किसान समय रहते अगर लक्षण पहचान लें तो अपनी मेहनत को सुरक्षित रख सकते हैं. आंतरिक सड़न जैसी समस्याओं के लिए बोरेक्स का उपयोग करना चाहिए. कई बार जागरूकता के अभाव में किसान अक्सर गलत दवाओं का प्रयोग कर देते हैं, जिससे लाभ के बजाय हानि होती है.

