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El Nino 2026 Heat Wave Alert: भारत समेत दुनिया पर एक बार फिर महाविनाशकारी अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी है कि मई 2026 से अल नीनो एक्टिव हो सकता है. इससे भारत समेत पूरी दुनिया में भीषण गर्मी और सूखे के हालात पैदा होंगे. अप्रैल की गर्मी ने पहले ही रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अब मई और जून में पारा और भी ऊपर जाने की आशंका जताई गई है. (Photos : PTI/ANI)
अप्रैल के महीने में ही सूरज के तेवर इतने तीखे हो गए हैं कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है. भारत के कई हिस्सों में लू यानी हीटवेव ने अभी से बेहाल कर दिया है. इसी बीच संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी यानी वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) ने एक डराने वाली रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट के मुताबिक मई से जुलाई 2026 के बीच ‘अल नीनो’ (El Nino) की वापसी होने जा रही है. यह एक ऐसी समुद्री घटना है जो पूरी दुनिया के तापमान को बढ़ा देती है. पिछली बार जब अल नीनो आया था, तो उसने गर्मी के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे. इस बार भी इसके बहुत ज्यादा ताकतवर होने के संकेत मिल रहे हैं.
मई के महीने से प्रशांत महासागर की सतह का तापमान तेजी से बढ़ना शुरू हो जाएगा. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बदलाव का सीधा असर ग्लोबल वेदर पैटर्न पर पड़ेगा. भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह खबर काफी चिंताजनक है. क्योंकि अल नीनो का सीधा संबंध कमजोर मानसून और कम बारिश से होता है. अप्रैल की मौजूदा गर्मी तो बस एक शुरुआत है. आने वाले महीनों में यह स्थिति और भी भयानक हो सकती है. एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि अल नीनो और क्लाइमेट चेंज की जुगलबंदी दुनिया को एक नए संकट की ओर धकेल रही है.
अल नीनो एक प्राकृतिक घटना है जो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में होती है. इसमें समुद्र की सतह का पानी सामान्य से कहीं ज्यादा गर्म हो जाता है. इस गर्मी की वजह से हवाओं के चलने का रास्ता और दबाव का क्षेत्र बदल जाता है. इसका असर सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है. जब भी अल नीनो एक्टिव होता है, तो दुनिया के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ आती है. वहीं दूसरी तरफ भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देशों में भीषण सूखा और गर्मी पड़ती है. (AI Photo)
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WMO के क्लाइमेट प्रेडिक्शन चीफ विल्फ्रेन मोफौमा ओकिया ने कहा है कि साल की शुरुआत न्यूट्रल रही थी. लेकिन अब मॉडल्स बता रहे हैं कि अल नीनो का आना तय है. मई से जुलाई के बीच इसके विकसित होने की पूरी संभावना है. इसके बाद यह धीरे-धीरे और भी ज्यादा इंटेंस होता जाएगा. आमतौर पर अल नीनो हर दो से सात साल में एक बार आता है. यह दौर लगभग 9 से 12 महीने तक चलता है. इस बार इसके मई से शुरू होने का मतलब है कि साल 2026 का दूसरा हिस्सा बेहद गर्म रहने वाला है.
भारत के लिए अल नीनो हमेशा से बुरी खबर लेकर आता है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही संकेत दिए हैं कि इस साल मानसून सामान्य से कम रह सकता है. अनुमान के मुताबिक इस बार लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) की सिर्फ 92 परसेंट बारिश होने की उम्मीद है. अगर ऐसा होता है, तो यह पिछले तीन सालों में मानसून का सबसे खराब प्रदर्शन होगा. भारत में खेती पूरी तरह से मानसून की बारिश पर निर्भर करती है. अगर बारिश कम हुई, तो फसलों की पैदावार पर बुरा असर पड़ेगा और महंगाई भी बढ़ सकती है.
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन ने बताया कि फिलहाल ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर न्यूट्रल की ओर बढ़ रही हैं. लेकिन मानसून के दूसरे हाफ में अल नीनो का प्रभाव बढ़ जाएगा. इसका मतलब है कि जून में शायद उतनी दिक्कत न हो, लेकिन जुलाई से सितंबर के बीच बारिश में बड़ी कमी देखी जा सकती है. इसके साथ ही इंडियन ओशन डिपोल (IOD) के पॉजिटिव होने की भी उम्मीद है. यह मानसून को थोड़ी राहत दे सकता है, लेकिन अल नीनो की ताकत के आगे यह कितना टिक पाएगा, यह कहना मुश्किल है.
इतिहास गवाह है कि जब भी अल नीनो आता है, गर्मी के रिकॉर्ड टूटते हैं. साल 2023 और 2024 के सबसे गर्म साल बनने के पीछे भी अल नीनो का ही हाथ था. अब 2026 में इसकी वापसी फिर से ग्लोबल टेम्परेचर को खतरनाक लेवल पर ले जा सकती है. डब्लूएमओ के मुताबिक अगले तीन महीनों में लगभग पूरी दुनिया के जमीनी तापमान में बढ़ोतरी देखी जाएगी. खासकर नॉर्थ अमेरिका, सेंट्रल अमेरिका, यूरोप और नॉर्थ अफ्रीका में इसका सबसे ज्यादा असर होगा. इन इलाकों में पारा सामान्य से काफी ऊपर जा सकता है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि अल नीनो एक नेचुरल प्रोसेस है. लेकिन इंसान की वजह से बढ़ रही ग्लोबल वार्मिंग इसे और भी घातक बना रही है. ग्रीनहाउस गैसों की वजह से धरती पहले ही गर्म है. अब ऊपर से अल नीनो का तड़का इसे ‘हीट बम’ बना सकता है. इसका असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि समुद्री जीवों और इकोसिस्टम पर भी पड़ेगा. गरम पानी की वजह से समुद्री तूफानों और हरिकेन की तीव्रता भी बढ़ सकती है.
मौसम विभाग की इस चेतावनी का मकसद देशों को समय रहते अलर्ट करना है. खेती, पानी का मैनेजमेंट और हेल्थ सेक्टर ऐसे क्षेत्र हैं जो अल नीनो से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. सूखे की स्थिति में पीने के पानी की किल्लत हो सकती है. वहीं भीषण गर्मी की वजह से हीटस्ट्रोक और अन्य बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं. सरकारों को अब अपनी वॉटर स्टोरेज पॉलिसी और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देने की जरूरत है. किसानों को ऐसी फसलों की सलाह दी जा रही है जिनमें पानी की कम खपत होती है.
अल नीनो का आना अब लगभग तय माना जा रहा है. अप्रैल की लू ने हमें पहले ही चेतावनी दे दी है कि आने वाला समय आसान नहीं होगा. हमें अब अपनी लाइफस्टाइल और संसाधनों के इस्तेमाल में बदलाव करना होगा. क्लाइमेट चेंज और अल नीनो की यह दोहरी मार भविष्य में बार-बार देखने को मिलेगी. ऐसे में एडवांस वार्निंग सिस्टम और सही प्लानिंग ही हमें इस भयानक गर्मी और सूखे से बचा सकती है.

