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Muskan Begam Pilot: हैदराबाद की मुस्कान बेगम ने रूढ़ियों को तोड़ते हुए आसमान में अपनी कामयाबी के रंग बिखेर दिए हैं. दक्षिण अफ्रीका से पायलट की ट्रेनिंग लेकर लौटी मुस्कान हैदराबाद की सबसे कम उम्र की लाइसेंसधारी पायलटों में से एक हैं. पढ़िए उनके संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी.

Muskan Begam Pilot: मुस्कान बेगम ने बचपन का सपना साकार कर सफलता की कहानी रच दी
नई दिल्ली (Muskan Begam Pilot). हर बड़ी सफलता के पीछे एक छोटा सा सपना होता है. हैदराबाद की रहने वाली मुस्कान बेगम के लिए यह सपना 9 साल की उम्र में शुरू हुआ था, जब वह अपनी मां के साथ पिता को छोड़ने एयरपोर्ट जाती थीं. वहां कांच की दीवार से चिपके हुए उड़ते जहाजों को देखना उनके लिए किसी जादू से कम नहीं था. आज वही लड़की उसी कांच के दूसरी तरफ यानी विमान के कॉकपिट में बैठकर आसमान की ऊंचाई नाप रही है.
शिक्षा की मजबूत नींव: स्कूल से कॉलेज तक का सफर
मुस्कान बेगम ने अपनी शुरुआती शिक्षा हैदराबाद के नारायणा ई-टेक्नो हाई स्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने श्री चैतन्य जूनियर कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की. साइंस और मैथ्स में उनकी रुचि हमेशा से रही, जिससे उन्हें एविएशन के मुश्किल कॉन्सेप्ट्स को समझने में मदद मिली. वह कहती हैं- सिर्फ एकेडमिक्स ही नहीं, बल्कि विमानों के प्रति मेरा वह अटूट खिंचाव ही था जिसने मुझे अपनी पढ़ाई में 100 प्रतिशत देने के लिए प्रेरित किया.
वो जादुई पल: जब कॉकपिट ने पुकारा
मुस्कान बेगम के जीवन में एक ऐसा मोड़ आया, जिसने उनके सपने पर मुहर लगा दी. 9 साल की उम्र से ही उनका झुकाव विमानों की तरफ बढ़ने लगा था. एक बार दोहा से लौटते समय नन्ही मुस्कान ने हिम्मत जुटाकर क्रू से कॉकपिट देखने की इजाजत मांगी. लैंडिंग के बाद पायलट ने न केवल उन्हें कॉकपिट दिखाया, बल्कि उन्हें माइक पर बोलने का मौका भी दिया. पायलट ने मुस्कुराते हुए कहा- एक दिन तुम भी इसी सीट पर बैठोगी. मुस्कान कहती हैं कि वो पल आज भी उनके रोंगटे खड़े कर देता है.
दक्षिण अफ्रीका में ट्रेनिंग और भविष्य की तैयारी
मुस्कान बेगम ने दक्षिण अफ्रीका की साउथ अफ्रीकन फ्लाइंग एकेडमी से अपनी कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग पूरी की. वर्तमान में वह अपनी योग्यता बढ़ाने के लिए केप टाउन में इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग और मल्टी-इंजन रेटिंग की तैयारी कर रही हैं. वह न केवल फ्लाइट मैनुअल्स का अध्ययन कर रही हैं, बल्कि एयरलाइन एंट्रेंस एग्जाम्स की तैयारी में भी जुटी हैं. उनका लक्ष्य जल्द ही किसी बड़ी कमर्शियल एयरलाइन का हिस्सा बनना है.
कैप्टन बनने का सपना देख रही हैं मुस्कान
मुस्कान बेगम का सफर यहीं नहीं रुकता. भविष्य में वह इंटरनेशनल रूट्स पर उड़ान भरना चाहती हैं और उनका अंतिम लक्ष्य ‘टाइप रेटेड फर्स्ट ऑफिसर’ और फिर ‘कैप्टन’ बनना है. वह कहती हैं- मैं हर उस मौके के लिए तैयार हूं जो मुझे आगे बढ़ने और सीखने का अवसर दे. मुस्कान बेगम की कहानी साबित करती है कि बचपन के मासूम सपने अगर मेहनत और परिवार के साथ से सींचे जाएं तो हकीकत बनकर आसमान में चमकते हैं. 9 साल की उम्र वाले जुनून को जिंदा रखकर पूरी दुनिया मुट्ठी में कर सकते हैं.
मुस्कान बेगम की कहानी सिखाती है कि पंखों से कुछ नहीं होता, उड़ान हौसलों से होती है. जांबाज बेटी केवल विमान नहीं उड़ा रही, बल्कि लड़कियों को कमतर आंकने वाली समाज की सोच को भी पीछे छोड़ दिया है.
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With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys…और पढ़ें

