भारत ने अपनी पारंपरिक मिसाइल क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. डीआरडीओ द्वारा विकसित प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल के कुछ वेरिएंट का सफल परीक्षण किया गया है. ट्रायल ने इस स्वदेशी हथियार प्रणाली की विश्वसनीयता और सटीकता को साबित किया है. प्रलय मिसाइल भारत की सैन्य रणनीति में एक नया आयाम जोड़ सकती है, खासकर चीन के तिब्बत क्षेत्र में स्थित सैन्य ठिकानों को ध्यान में रखते हुए. प्रलय भारत की पहली स्वदेशी स्ट्रैटजिक क्वैसी-बैलिस्टिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है. इसे 2015 में मंज़ूरी दी गई थी और इसके विकास में K सीरीज सबमरी लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइलों और भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रोग्राम से प्राप्त तकनीकों का उपयोग किया गया है. इसका पहला परीक्षण दिसंबर 2021 में हुआ था, जिसके बाद अब हुए सफल टा्रयल ने इसके ऑपरेशनल तैनाती के रास्ते को और मजबूत कर दिया है. 150 से 500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल हाई-वैल्यू एसेट्स वाले दुश्मन ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन की गई है. इनमें एयरबेस, रडार स्टेशन, लॉजिस्टिक्स हब, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और मिसाइल साइट्स शामिल हैं. करीब 5,000 किलोग्राम वजन वाली प्रलय एक रोड-मोबाइल प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जाती है, जिससे इसे तेजी से कहीं भी तैनात किया जा सकता है और दुश्मन की निगरानी व हमले से बचाव की क्षमता बढ़ जाती है.
| ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल |
| ब्रह्मोस | प्रलय |
| ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो हवा में उड़ते हुए लक्ष्य तक पहुंचती है. | प्रलय एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है, जो ऊंची कक्षा में जाकर तेजी से लक्ष्य पर गिरती है. |
| ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में शामिल है, जिसकी गति मैक 2.8 से मैक 3 (3700 KMPH) तक होती है. | प्रलय मिसाइल मैक 6.1 (7500 KMPH) हाइपरसोनिक गति से लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता रखती है। |
| ब्रह्मोस की मारक क्षमता करीब 290–450 किलोमीटर मानी जाती है. | प्रलय मिसाइल की रेंज लगभग 150 से 500 किलोमीटर तक है. |
| ब्रह्मोस को जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है. | प्रलय मिसाइल मुख्य रूप से जमीन से दागी जाने वाली मिसाइल है. |
| ब्रह्मोस का इस्तेमाल दुश्मन के जहाजों, बंकरों और रणनीतिक ठिकानों पर सटीक हमले के लिए होता है. | प्रलय को तेज और भारी पेलोड के साथ सामरिक सैन्य लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है. |
प्रलय मिसाइल इतना खास क्यों?
प्रलय की एक बड़ी विशेषता इसकी विविध वारहेड क्षमता है. यह 350 से 1,000 किलोग्राम तक के पारंपरिक वारहेड ले जा सकती है, जिनमें फ्रैगमेंटेशन, पेनिट्रेशन-कम-ब्लास्ट और रनवे-डिनायल सबम्यूनिशन शामिल हैं. इसका मतलब है कि यह न सिर्फ खुले ठिकानों को, बल्कि मजबूत बंकरों और एयरस्ट्रिप्स जैसे संरक्षित लक्ष्यों को भी निष्क्रिय कर सकती है. हालांकि, जो बात प्रलय को अन्य बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग बनाती है, वह इसकी क्वैसी-बैलिस्टिक फ्लाइट प्रोफाइल है. सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलें ऊंची और अनुमानित कर्व में उड़ती हैं, जिससे उन्हें दुश्मन रडार द्वारा जल्दी पकड़ लिया जाता है. इसके विपरीत, प्रलय कम ऊंचाई पर सपाट और दबे हुए मार्ग से उड़ान भरती है, जिससे यह कम समय के लिए रडार की पकड़ में आती है और इंटरसेप्शन की संभावना घट जाती है. इसके अलावा प्रलय की मिड-कोर्स और टर्मिनल फेज़ में पैंतरेबाजी करने की क्षमता इसे और अधिक घातक बनाती है. उन्नत कंट्रोल सरफेस और गाइडेंस सिस्टम की मदद से यह अपनी उड़ान दिशा बदल सकती है, जिससे दुश्मन की इंटरसेप्टर मिसाइलों के लिए इसके मार्ग की भविष्यवाणी करना मुश्किल हो जाता है. यह विशेषता इसे चीन की HQ-9 या पाकिस्तान की LY-80 जैसी एयर डिफेंस प्रणालियों को भेदने में सक्षम बनाती है.
इंडियन आर्मी ने दे रखा है ऑर्डर
सैटेलाइट इमेज से यह भी सामने आया है कि प्रलय एक कैनिस्टराइज़्ड रोड-मोबाइल सिस्टम है. कैनिस्टराइजेशन से मिसाइल को लंबे समय तक सुरक्षित स्टोरेज और तेज तैयारी की सुविधा मिलती है. इससे किसी भी उभरते खतरे के जवाब में इसे तुरंत तैनात किया जा सकता है, जो आधुनिक युद्ध के लिहाज से एक महत्वपूर्ण लाभ है. भारतीय सेना ने पहले ही 120 प्रलय मिसाइलों की खरीद को मंज़ूरी दे दी है और रिपोर्ट्स के मुताबिक यह संख्या बढ़कर 370 तक जा सकती है. इन मिसाइलों को चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा (LoC) के पास तैनात किए जाने की योजना है. इससे भारत को सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित और सटीक प्रहार की क्षमता मिलेगी, खासकर उन परिस्थितियों में जहाँ वायुसेना की भूमिका सीमित हो सकती है.
Pralay Ballistic Missile: इंडियन रॉकेट फोर्स का अहम मेंबर प्रलय मिसाइल ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से ज्यादा रफ्तार से दुश्मनों पर हमला करने में सक्षम है. (फोटो: PTI/Reuters)
रॉकेट फोर्स का ‘अर्जुन’
प्रलय को भारत की प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स (IRF) का एक अहम स्तंभ माना जा रहा है. यह एक डेडिकेटेड ट्राई सर्विसेज कमान होगी, जिसका उद्देश्य भारत की पारंपरिक मिसाइल क्षमताओं को इंटीग्रेट करना है. यह व्यवस्था चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) के मुकाबले भारत को संतुलन प्रदान करेगी, जिसके पास DF-15 और DF-16 जैसी शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों सहित हज़ारों मिसाइलें हैं. जहां भारत की स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमान परमाणु हथियारों को कंट्रोल और ऑपरेट करता है, वहीं प्रस्तावित IRF का फोकस पूरी तरह पारंपरिक मिसाइल युद्ध पर होगा. प्रलय जैसी प्रणालियों के साथ भारत न केवल अपनी सीमाओं की सुरक्षा मज़बूत कर रहा है, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भी अपनी स्थिति को सुदृढ़ कर रहा है.
इंटरनेशनल बायर
प्रलय की सफलता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है. आर्मेनिया, जो हाल के वर्षों में भारतीय सैन्य प्लेटफॉर्म का एक बड़ा आयातक बनकर उभरा है, कथित तौर पर इस सामरिक मिसाइल को खरीदने में रुचि दिखा रहा है. यदि ऐसा होता है, तो यह भारत के रक्षा निर्यात क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी और “मेक इन इंडिया” पहल को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिलेगी. प्रलय मिसाइल भारत की रक्षा क्षमताओं में एक निर्णायक छलांग है. इसकी गति, सटीकता, गतिशीलता और दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को भेदने की क्षमता इसे आधुनिक युद्धक्षेत्र में एक प्रभावी हथियार बनाती है. विशेष रूप से चीन के तिब्बत क्षेत्र में स्थित सैन्य ढांचे को ध्यान में रखते हुए, प्रलय भारत को एक भरोसेमंद और त्वरित प्रतिक्रिया विकल्प प्रदान करती है. आने वाले वर्षों में इसके बड़े पैमाने पर तैनाती से भारत की पारंपरिक प्रतिरोध क्षमता और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है.

