Last Updated:
शशि थरूर ने साफ कहा कि ट्रंप के टैरिफ वार ने भारत को अपनी आर्थिक रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है. जहां एक ओर वेनेजुएला का तेल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को संभालेगा, वहीं दूसरी ओर यूरोपीय संघ के साथ एफटीए भारत की व्यापारिक निर्भरता को अमेरिका से हटाकर यूरोप की ओर शिफ्ट कर सकता है. भारत अब यह साबित करने में जुटा है कि वह किसी एक महाशक्ति के भरोसे बैठने वाला देश नहीं है.
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के लोकसभा सांसद शशि थरूर. (फाइल फोटो)जियोपॉलिटिक्स के शतरंज पर तेल का खेल बहुत मायने रखता है, और इस दांव में इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद उलझ गए हैं. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसके पीछे की कहानी बताई. थरूर ने समझाया कि किस तरह अमेरिका ने खुद को और दुनिया को एक मुश्किल स्थिति में डाल दिया है. ईरान, रूस पर शिकंजा कसने और भारत को घेरने के बाद अब अमेरिका की मजबूरी बन गया है कि वह वेनेजुएला के तेल के दरवाजे दुनिया के लिए खोल दे.
शशि थरूर ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील लंबे समय से लटकी हुई है, लेकिन तेल के मोर्चे पर जो हो रहा है वह हैरान करने वाला नहीं है. उन्होंने समझाया कि रूस, ईरान और वेनेजुएला पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण दुनिया भर में तेल की आपूर्ति सीमित हो गई थी. अब तक भारत, पश्चिमी देशों की मूक सहमति से रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदकर वैश्विक आपूर्ति पर दबाव कम कर रहा था. लेकिन अब ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया तो भारत के लिए रूस से तेल खरीदना मुश्किल हो गया. इसके अलावा, रूसी तेल खरीदने वाली कंपनियों पर भी अमेरिकी प्रतिबंधों की तलवार लटक रही है, जिससे रूस से खरीदारी में भारी गिरावट आई है.
वेनेजुएला अमेरिका का ‘सेफ्टी वाल्व’
- थरूर ने कहा कि वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन और वहां की नई सरकार को मान्यता देने के पीछे अमेरिका का असली मकसद तेल बाजार को संतुलित करना था.
- अगर रूस से तेल की सप्लाई रुकती है और कोई नया स्रोत नहीं खुलता, तो वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी. इससे अमेरिका में ‘पेट्रोल पंप’ पर कीमतें बढ़ेंगी, जिसका सीधा असर अमेरिकी वोटरों पर होगा.
- थरूर के अनुसार, जब अमेरिका रूस पर पेंच कसता है, तो उसे वेनेजुएला की टोंटी खोलनी ही होगी. अब भारतीय कंपनियां, जो पहले रूस और ईरान से तेल खरीद रही थीं, वेनेजुएला की ओर रुख करेंगी.
- चूंकि एक तरफ से सप्लाई बंद हुई है और दूसरी तरफ से खुल रही है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है.
भारत-यूरोपीय संघ FTA संजीवनी
जियोपॉलिटिकल संदेश
थरूर के मुताबिक, ईयू के साथ समझौता दुनिया को यह संदेश देता है कि भारत के पास विकल्पों की कमी नहीं है. हमारे पास और भी रास्ते, और भी दोस्त और साझेदार हैं. यह संदेश जरूरी है ताकि कोई भी देश भारत को ‘टेकन फॉर ग्रांटेड’ न समझे.
About the Author
Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें

