BrahMos NG Su-30MKI Jet: दुनिया के तमाम देश ऐसे वेपन सिस्टम डेवलप करने में जुटे हैं, जिससे अपनी जमीन से ही ऐसा वार किया किया जाए कि दुश्मन चारों खाने चित्त हो जाए. इसमें कटिंग एज टेक्नोलॉजी की मदद से डेवलप किए जा रही मिसाइल्स की भूमिका काफी अहम है. रेंज और घातक क्षमता में वृद्धि की वजह से आधुनिक मिसाइलें काफी कारगर साबित हो रही हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ने अपनी क्षमता से पूरी दुनिया को अवगत कराया था. ब्रह्मोस के प्रचंड प्रहार से पाकिस्तान के हौसले के परखच्चे उड़ गए और वो सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाने लगा था. Su-30MKI फाइटर जेट की रफ्तार और ब्रह्मोस की मार से पाकिस्तान आज तक कराह रहा है. अब इसी ब्रह्मेस मिसाइल को अपग्रेड किया जा रहा है. ब्रह्मोस-NG यानी ब्रह्मोस-नेक्स्ट जेनरेशन में ऐसी खासियत एड की गई हैं कि दुश्मनों के होश उड़ जाएंगे. ब्रह्मोस का मौजूदा वर्जन (Brahmos-A) Su-30MKI फाइटर एयरक्राफ्ट में फिट होता है. दिक्कत यह है कि वजन ज्यादा होने की वजह से फिलहाल एक ही ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल Su-30MKI फाइटर जेट में फिट या इंटीग्रेट होती है. लेकिन, ब्रह्मोस-NG मिसाइल को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि वजन तो कम हो पर उसकी लेथेलिटी (घातक होने की क्षमता) पर कोई असर न पड़े. बताया जा रहा है कि ब्रह्मोस-NG के डेवलप होने के बाद Su-30MKI जेट में एक साथ ऐसी 5 मिसाइलें इंटीग्रेट की जाएंगी. इससे एक तरह जहां साल्वो अटैक (एक ही समय में ताबड़तोड़ कई प्रहार) करना संभव हो सकेगा, वहीं दुश्मनों को संभलने का मौका दिए बगैर उसे पूरी तरह से तबाह किया जा सकेगा. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नूर खान एयरबेस पर ब्रह्मोस से अटैक किया गया था, जिससे पाकिस्तान को काफी नुकसान हुआ था. फर्ज कीजिए यदि ब्रह्मोस-NG से एक के बाद एक 5 अटैक किए गए होते तो पूरा एयरबेस ही स्वाहा हो जाता.
भारतीय वायुसेना की हवाई हमले की क्षमता आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव देखने वाली है. ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित की जा रही ब्रह्मोस-एनजी (नेक्स्ट जेनरेशन) मिसाइल, मौजूदा ब्रह्मोस फैमिली की घातक ताकत को और अधिक प्रभावी रूप में पेश करेगी. सबसे अहम बात यह है कि यह मिसाइल आकार और वजन में कहीं अधिक हल्की होगी, जिससे लड़ाकू विमानों पर इसके इस्तेमाल की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी. विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस-एनजी के आने से भारतीय वायुसेना के Su-30MKI फाइटर जेट की स्ट्राइक लोड क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हो सकती है. ब्रह्मोस-NG की सबसे बड़ी खासियत इसका वजन है. मौजूदा एयर-लॉन्च्ड ब्रह्मोस-A मिसाइल का वजन लगभग 2,900 किलोग्राम है, जिसकी वजह से Su-30MKI केवल एक ही मिसाइल ले जाने में सक्षम है. इसके मुकाबले ब्रह्मोस-NG का अनुमानित वजन करीब 1.2 टन (1200 किलोग्राम) यानी लगभग आधा से भी कम होगा. हालांकि, इसकी मारक दूरी करीब 300 किलोमीटर ही रहने की संभावना है, जो मौजूदा ब्रह्मोस के बराबर है, लेकिन वजन में भारी कमी इसे कहीं अधिक बहुउपयोगी बना देती है.
BrahMos NG Su-30MKI Jet: ब्रह्मोस-NG या ब्रह्मोस मिसाइल के नए संस्करण से Su-30MKI फाइटर एयरक्राफ्ट की मारक क्षमता काफी बढ़ जाएगी. (फोटो/Reuters)
Su-30MKI में एक साथ कितने ब्रह्मोस-NG होंगे फिट?
रक्षा मामलों पर नजर रखने वाली वेबसाइट idrw.org के अनुसार, ब्रह्मोस-NG के हल्के डिजाइन की वजह से संशोधित Su-30MKI को एक साथ 5 मिसाइलें ले जाने के लिए कॉन्फ़िगर किया जा सकता है. यदि यह योजना साकार होती है, तो यह भारतीय वायुसेना के लिए बड़ी रणनीतिक छलांग साबित होगी. अभी जहां एक विमान केवल एक ब्रह्मोस-A मिसाइल से हमला कर पाता है, वहीं भविष्य में एक ही विमान से कई लक्ष्यों पर एक साथ सटीक प्रहार संभव हो सकेगा. इससे न केवल हमले की तीव्रता बढ़ेगी, बल्कि दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने की क्षमता भी मजबूत होगी. हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर 5 मिसाइलों वाले कॉन्फ़िगरेशन की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा पहले किए गए प्रदर्शनों से कुछ संकेत जरूर मिले हैं. बीते वर्षों में एक Su-30MKI के मॉक-अप को 3 ब्रह्मोस-एनजी मिसाइलों के साथ दिखाया गया था. इसमें एक मिसाइल विमान के फ्यूजलेज के सेंटरलाइन पर और दो इनबोर्ड विंग स्टेशनों पर लगी हुई थीं. यह व्यवस्था इस बात का प्रमाण थी कि ब्रह्मोस-एनजी को उन हार्डपॉइंट्स पर भी लगाया जा सकता है, जो भारी ब्रह्मोस-A के लिए उपयुक्त नहीं थे.
- कॉन्सेप्ट और जेनरेशन
ब्रह्मोस-A: यह ब्रह्मोस परिवार का मौजूदा एयर-लॉन्च्ड संस्करण है, जिसे खास तौर पर Su-30MKI लड़ाकू विमान से दागने के लिए विकसित किया गया.
ब्रह्मोस-NG: NG यानी नेक्स्ट जेनरेशन. यह ब्रह्मोस-A का उन्नत और हल्का संस्करण है, जिसे भविष्य के अधिक प्लेटफॉर्म-फ्रेंडली विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. - वजन और आकार
ब्रह्मोस-A: इसका वजन लगभग 2.5 टन के आसपास है और आकार बड़ा होने के कारण इसे सिर्फ भारी फाइटर जेट ही कैरी कर सकते हैं.
ब्रह्मोस-NG: वजन करीब 1.2-1.5 टन तक सीमित रखा गया है. आकार छोटा होने से इसे अधिक विमानों पर तैनात किया जा सकेगा. - पेलोड इंटीग्रेशन
ब्रह्मोस-A: Su-30MKI एक समय में केवल एक ब्रह्मोस-A मिसाइल ले जा सकता है.
ब्रह्मोस-NG: छोटे और हल्के होने के कारण Su-30MKI जैसे विमान भविष्य में तीन से पांच ब्रह्मोस-NG मिसाइल तक ले जाने में सक्षम हो सकते हैं. - प्लेटफॉर्म
ब्रह्मोस-A: फिलहाल Su-30MKI तक सीमित. अन्य फाइटर जेट्स पर इसका इंटीग्रेशन चुनौतीपूर्ण है.
ब्रह्मोस-NG: इसे तेजस, मिराज-2000, मिग-29 और भविष्य के मल्टी-रोल फाइटर जेट्स के साथ भी इंटीग्रेट करने की योजना है. - रणनीतिक प्रभाव
ब्रह्मोस-A: सीमित संख्या में भारी स्ट्राइक के लिए उपयुक्त.
ब्रह्मोस-NG: हल्की होने के कारण ‘मल्टी-मिसाइल साल्वो अटैक’ संभव होगा, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस को भेदना आसान होगा.
NEW DELHI : BRAHMOS-A. PTI GRAPHICS(PTI11_22_2017_000124B)
क्यों होगा ऐतिहासिक?
अब सवाल यह है कि बाकी दो मिसाइलें कहां लगाई जाएंगी, जिससे कुल संख्या पांच तक पहुंच सके. idrw.org की रिपोर्ट के मुताबिक, एक संभावित विकल्प इंजन नैसेल स्टेशनों में बदलाव का हो सकता है. वर्तमान में इन स्टेशनों का उपयोग Kh-31P एंटी-रेडिएशन या Kh-31A एंटी-शिप मिसाइलों के लिए किया जाता है, जिनका वजन ब्रह्मोस-एनजी के अपेक्षाकृत करीब है. यदि ढांचे को मजबूत किया जाए और एवियोनिक्स इंटीग्रेशन किया जाए, तो इन नैसेल-माउंटेड पाइलन्स पर भी ब्रह्मोस-एनजी को लगाया जा सकता है. हालांकि, फिलहाल यह संभावना केवल अटकलों पर आधारित है और इसकी आधिकारिक पुष्टि बाकी है. यदि इस तरह का कॉन्फ़िगरेशन हकीकत में बदलता है, तो Su-30MKI दुनिया के उन गिने-चुने लड़ाकू विमानों में शामिल हो जाएगा, जो एक साथ इतनी बड़ी संख्या में एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइलें ले जा सकते हैं. इससे इंडियन एयरफोर्स को बड़े और हाई-वैल्यू वाले जमीनी या समुद्री लक्ष्यों पर एक ही सॉर्टी यानी उड़ान में कई सटीक हमले करने की क्षमता मिलेगी. इसका सीधा फायदा यह होगा कि किसी मिशन को अंजाम देने के लिए कम विमानों की जरूरत पड़ेगी, जिससे ऑपरेशनल लचीलापन और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगे.
आंख उठाने से पहले सौ बार सोचेगा दुश्मन
हालांकि, ब्रह्मोस-NG के अंतिम इंटीग्रेशन, ट्रायल और डिप्लॉयमेंट से जुड़ी कई जानकारियां अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन इतना तय है कि इसके छोटे आकार और हल्के वजन ने नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं. जैसे-जैसे इसका विकास आगे बढ़ेगा और उड़ान परीक्षण शुरू होंगे, Su-30MKI और ब्रह्मोस-एनजी की जोड़ी क्षेत्र में भारत की लंबी दूरी की सटीक स्ट्राइक क्षमता को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकती है. यह न केवल भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि देश की सामरिक Deterrence को भी कहीं अधिक मजबूत बनाएगा.

