International
oi-Bhavna Pandey
China laser attack on German surveillance plane: 21वीं सदी की शुरुआत में जो लेजर तकनीक केवल विज्ञान में दिखाई देती थी, वह आज वैश्विक सेनाओं के लिए एक व्यावहारिक और प्रभावशाली हथियार प्रणाली बन चुकी है। अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन, इज़राइल, और भारत की सेनाएं इस तकनीक का इस्तेमाल केवल परीक्षण के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक सैन्य अभियानों में कर रही हैं।
हाल ही में एक चौंकाने वाली घटना ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया, जब चीनी वॉरशिप ने जर्मनी के एक निगरानी विमान को लेजर से निशाना बनाया। जिसके बाद बर्लिन ने चीनी राजदूत को तलब किया और कड़ी आपत्ति जताई। जर्मनी का दावा है कि रेड सागर में यूरोपीय संघ के नेतृत्व वाले EU मिशन (ASPIDES) के तहत निगरानी कर रहा उनका विमान चीनी वॉरशिप द्वारा लेजर से निशाना बनाया गया।

जर्मनी का एयरक्राफ्ट यमन के हूती विद्रोहियों से खतरे का सामना कर रहे हाई रिस्क वाले जलमार्गों से गुजरने वाले civilian ship की सुरक्षा करता है। एहतियात के तौर पर विमान ने अपना मिशन रद्द कर दिया और जिबूती स्थित अपने बेस पर सुरक्षित रूप से उतर गया।
अमेरिका भी चाइना पर लगा चुका है ये आरोप
यह पहली बार नहीं है, 2018 में अमेरिका ने भी चीन पर इसी तरह के आरोप लगाए थे। पेंटागन ने आरोप लगाया था कि अफ्रीका के तिबूती देश में स्थित सैन्य बेस से चाइना ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट को हाई-ग्रेड लेजर्स से टारगेट किया गया।
वैश्विक सुरक्षा में ये हथियार बने नई चुनौती
बता दें लेजर हथियार अब युद्धनीति का अभिन्न अंग बन चुके हैं, और उनका प्रयोग न केवल ड्रोन और मिसाइलों को निष्क्रिय करने में हो रहा है, बल्कि संभावित दुश्मन के विमानों को निशाना बनाने जैसे आक्रामक उपायों में भी हो रहा है। आधुनिक काल के युद्ध या द्विपक्षीय तनाव सिर्फ पारंपरिक हथियारों से ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक, लेज़र और तकनीकी सत्ता से भी संचालित हो रहे हैं। इतना ही नहीं लेजर तकनीक रक्षा के अलावा रणनीतिक दबाव और आक्रामक इशारे के लिए भी उपयोग में लाई जा रही है। ये वैश्विक सुरक्षा में ये लेजर हथियार नई चुनौती बन चुके हैं।
चीन और रूस
चीन ने “Shen Nung” और “LASS” जैसी प्रणाली विकसित की हैं। रिपोर्टों के अनुसार, रूस में इन तकनीकों का परीक्षण किया गया है, और यह ड्रोन व मिसाइल हमलों से निपटने में सक्षम हैं।
ब्रिटेन
हाल ही में ब्रिटिश आर्मी ने अपनी लेजर टेक्नालॉजी “DragonFire” का सफल परीक्षण किया। इसका उपयोग ड्रोन और छोटे हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में किया जा रहा है। यह तकनीक युद्ध के मैदान में पहली बार एक बख्तरबंद वाहन (Wolfhound) पर तैनात की गई।
इज़राइल
मई 2025 में गाजा संघर्ष के दौरान इज़राइल ने “Iron Beam” (लेजर आधारित रक्षा प्रणाली) का इस्तेमाल किया। यह प्रणाली राफेल द्वारा विकसित की गई है और इसने कई आत्मघाती ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया।
भारत
अप्रैल 2025 में DRDO ने Mk-II(A) लेजर हथियार का परीक्षण किया। यह प्रणाली ड्रोन स्वार्म और क्रूज़ मिसाइलों को केवल कुछ सेकंड में नष्ट कर सकती है। यह भारत की “स्वदेशी रक्षा क्षमताओं” को एक नया स्तर देती है।
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