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Muslim Youth Killed in Pahalgam Terror Attack: पहलगाम में आतंकवादी हमले में 27 पर्यटकों की मौत हुई है. कई पर्यटक घायल हुए है. आतंकियों ने धर्म पूछकर गोलियां चलाईं. ऐसे में सैयद आदिल हुसैन शाह की मौत पर सवाल उठ …और पढ़ें
आतंकवादी हमले में अब तक 27 लोगों की मौत हो गई है.
हाइलाइट्स
- पहलगाम हमले में 27 पर्यटकों की मौत हुई.
- आतंकियों ने धर्म पूछकर गोलियां चलाईं.
- मुस्लिम सैयद आदिल हुसैन शाह भी मारे गए.
Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में आतंकवादी हमले में अब तक 27 पर्यटकों की मौत हो चुकी है. कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं. आतंकवादियों ने पर्यटकों से उनका धर्म पूछ-पूछकर उन पर गोलियां बरसाई. उनके इस आतंक की वजह से पल भर में कई महिलाओं की मांगें सूनी हो गई तो कई बच्चों के माथे से पिता का साया उठ गया. उन्होंने कई मां-बाप से उनके बुढ़ापे का सहारा छीन लिया. घाटी में आमतौर पर आतंकवादी पर्यटकों पर हमला नहीं करते हैं. बीते करीब दो दशक में पर्यटकों पर यह सबसे बड़ा हमला है. बीते साल मई महीने में भी आतंकवादियों ने दो पर्यटकों को मार दिया था.
इस हमले में मारे गए 27 पर्यटकों में से एक इजरायली और एक इतावली नागरिक शामिल है. लेकिन, सबसे बड़ा सवाल मुस्लिम नागरिक सैयद आदिल हुसैन शाह की मौत को लेकर उठ रहे हैं. आतंकवादियों ने हर एक पर्यटक से उनका धर्म पूछकर उन पर हमले किए. लेकिन, फिर उन लोगों ने सैयद हुसैन को क्यों मारा. सैयद हुसैन तो एक मुस्लिम थे. अगर उनकी दुश्मनी गैर मुस्लिम लोगों से है तो फिर वे सैयद हुसैन को छोड़ सकते थे. इससे कम से कम एक जिंदगी तो बच जाती.
आतंकवाद का कोई धर्म या मजहब नहीं
दरअसल, हम आतंकवाद को केवल आतंकवाद मानते हैं. आतंकवाद का कोई धर्म या मजहब नहीं होता. लेकिन, ये आतंकवादी हैं जो अपनी दहशतगर्दी को धर्म के दायरे में बांधते हैं. सैयद आदिल एक स्थानीय नागरिक था. वह अपने परिवार में कमाने वाले एक मात्र सदस्य था. उसकी कमाई से उसके परिवार का भरणपोषण होता था. वह घोड़ों की सवारी करवाता था. वह घोड़ों पर पर्यटकों को लाने-ले जाने का काम करता था.
सैयद के पिता सैयद हैदर शाह ने कहा कि उनका बेटा मंगलवार को कमाने के लिए पहलगाम गया हुआ था. दोपहर तीन बजे के आसपास उन्हें पहलगाम में हमले के बारे में पता चला. फिर उन्होंने आदिल को फोन किया लेकिन उस वक्त उसका फोन बंद था. एएनआई से बातचीत में उन्होंने बताया कि दोपहर चाढ़े चार बजे फोन चालू हुआ लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया. फिर वह पुलिस स्टेशन पहुंचे तो उनको पता चला कि उनका बेटा हमले में घायल हो गया है.
पिता ने कहा कि वह मानते हैं कि उनका बेटा शहीद हुआ है. वह निर्दोष था. उन्होंने सवाल किया कि उसे क्यों मारा गया? आदिल की हत्या के लिए जो भी जिम्मेदार हैं उनको सजा मिलनी चाहिए. आदिल की मां का हाल बहुत बुरा है. वह रो-रोकर बेजान हो गई है. उसका परिवार बहुत गरीब है. लेकिन, आतंकवादियों को इस आदिल पर तरस नहीं आई. उसके गरीब मां-बाप पर तरस नहीं आई.

