बहराइच: बरसात का मौसम आते ही जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत मिलती है, वहीं यह अपने साथ एक बड़ा खतरा भी लेकर आता है. यह खतरा है स्नेक बाइट (सांप के काटने) का. दरअसल, बारिश के दौरान जंगल, झाड़ियों, नालों और बिलों में पानी भर जाता है. जब बारिश का पानी सांपों के बिलों में प्रवेश करता है, तो वे बाहर निकलकर आबादी वाले इलाकों और लोगों के घरों में घुस जाते हैं. ऐसे में अनजाने में उन पर पैर पड़ने या उनके संपर्क में आने से वे काट लेते हैं. आइए जानते हैं कि इससे कैसे बचाव करें और अगर सांप काट ले तो क्या करना चाहिए.
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए DFO ने दी जरूरी सलाह
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए बहराइच के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) अपूर्व दीक्षित ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. उन्होंने बताया कि बारिश का पानी जब सांपों के प्राकृतिक आवास और बिलों में प्रवेश करता है, तो वे सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश में इंसानी आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं. घरों में घुसने के बाद ये सांप अक्सर कबाड़ वाली जगहों, बाहर रखे जूतों के अंदर, बेड और सोफे के नीचे या अंधेरे कोनों में छिपकर बैठ जाते हैं. ऐसे में अनजाने में उनके संपर्क में आने पर वे काट सकते हैं.
बरसात के मौसम में सबसे पहले कर लें ये काम
जानकारी देते हुए अधिकारी ने बताया कि बरसात के मौसम में पेड़-पौधे और झाड़ियां तेजी से बढ़ जाती हैं तथा कई जगहों पर पानी जमा हो जाता है. ऐसे में घर के आसपास की झाड़ियों की पहले से ही सफाई कर लें और घर को भी साफ-सुथरा रखें. जिन सामानों का उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें कबाड़ के रूप में इकट्ठा न होने दें. खासकर बाहर रखे जूतों को इधर-उधर न छोड़ें. जूते पहनने से पहले उन्हें अच्छी तरह झाड़कर और देखकर ही पहनें.
इसके अलावा, सांप अक्सर घरों में गंदे पानी की निकासी वाले रास्तों से प्रवेश कर जाते हैं. इसलिए ऐसे स्थानों पर जाली जरूर लगाएं. यदि घर में खिड़कियां हैं, तो उनमें भी जाली लगवाएं. वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग रात के समय घर से बाहर निकलते समय जूते जरूर पहनें और टॉर्च साथ रखना न भूलें.
अगर सांप काट ले तो न करें ये गलती
डीएफओ ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए बताया कि सांप के काटने पर घबराने या इधर-उधर भटकने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) पर पर्याप्त मात्रा में, लगभग 350 एंटी-वेनम इंजेक्शन उपलब्ध हैं.
उन्होंने कहा कि झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें. ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग झाड़-फूंक के भरोसे समय गंवा देते हैं, जिससे कई बार उनकी जान तक चली जाती है. यदि समय रहते मरीज को अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो अधिकांश मामलों में उसकी जान बचाई जा सकती है और उचित इलाज मिल जाता है.

