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oi-Vishwanath Saini
Waqf Amendment Bill: भारत में वक्फ संशोधन बिल 3 अप्रेल 2025 को लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हो गया। राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल के पक्ष में 128 और विरोध में 95 वोट पड़े। अब इस बिल पर सिर्फ राष्ट्रपति की मुहर लगने का इंतजार है वक्फ बिल की सुर्खियों के बीच भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी का घर ‘एंटीलिया’ (Mukesh Ambani house Antilia) एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
सोशल मीडिया पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं के पुराने भाषण वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे दावा करते नजर आ रहे हैं कि मुकेश अंबानी का घर ‘एंटीलिया’ वक्फ बोर्ड की जमीन पर बना हुआ है।

सोशल मीडिया पर लोग AI टूल Grok से भी पूछ रहे हैं कि मुंबई में मुकेश अंबानी का आलीशान घर ‘एंटीलिया’ किसकी जमीन पर बना है? Grok के जवाब में अनाथालय की इस जमीन को साल 2002 में बेचे जाने का जिक्र है। आइए जानते हैं कि मुकेश अंबानी का घर व वक्फ बोर्ड की जमीन का यह पूरा मामला क्या है?
दैनिक भास्कर डॉट कॉम पर 10 साल पहले प्रकाशित खबर में वक्फ बोर्ड द्वारा पेश की गई एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) की रिपोर्ट का जिक्र है, जिसमें दावा किया गया है कि अंबानी को जमीन बेचने के लिए सही तरीका नहीं अपनाया गया। उस समय भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भाजपा के देवेंद्र फडनवीस ने कहा था कि उनकी सरकार रिपोर्ट के आधार पर एक्शन लेगी।
उस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मुकेश अंबानी के घर के लिए खरीदी गई जमीन के लिए वक्फ बोर्ड के सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत जरूरी था। लैंड डील के लिए वक्फ बोर्ड की बैठक तक नहीं बुलाई गई। चैरिटी कमिश्नर के फैसले का भी यह तर्क गलत ठहराया गया कि वे वक्फ के मामलों पर फैसला वक्फ बोर्ड ही कर सकता है। ना कि चैरिटी कमिश्नर।
महाराष्ट्र विधानसभा में पेश की गई उस रिपोर्ट के अनुसार वक्फ बोर्ड की संपत्ति को निजी उपयोग के लिए बेचा नहीं जा सकता। मामला लंबे समय से कोर्ट में विचाराधीन है। अब इससे जुड़े करीम भाई ट्रस्ट और वक्फ बोर्ड को साथ आकर मामला सुलझाना चाहिए।
करीम भाई ने वक्फ बोर्ड को दी थी जमीन
बता दें कि मुकेश अंबानी ने मुंबई में अपना ‘एंटीलिया’ बनाने के लिए साल 2002 में 4,532.39 स्क्वेयर मीटर वाला प्लॉट 21.5 करोड़ रुपए में खरीदा था। यह सौदा वक्फ बोर्ड की जमीन के दावे की वजह से उसी वक्त विवादों में आ गया था।
महाराष्ट्र विधानसभा में पेश की गई एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) में कहा गया था कि साल 1986 में करीब भाई इब्राहिम ने धार्मिक शिक्षा और अनाथालय बनाने के लिए वक्फ बोर्ड को दी थी, जिसे बोर्ड ने अंबानी को बेच दिया था।
किसी जमीन पर वक्फ के दावे का यह इकलौता मामला नहीं बल्कि ऐसे अनेक केस हैं। अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि भारत में साल 1950 में वक्फ बोर्ड के पास मात्र 52 हजार एकड़ जमीन थी, जो 2025 तक बढ़कर 9.4 लाख एकड़ हो चुकी है।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 की जरूरत क्यों पड़ी?
राज्यसभा से पहले 2 अप्रेल 2025 (बुधवार) की देर रात लोकसभा से इस विधेयक को पारित किया गया, जिसमें कुल 520 सांसदों ने हिस्सा लिया। 12 घंटे लंबी बहस के बाद 288 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 232 ने विरोध में वोट डाले। इस विधेयक को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने UMMEED (Unified Wakf Management Empowerment, Efficiency and Development) नाम दिया है।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 संशोधन विधेयक के तहत वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता लाने की कोशिश की गई है। यह पुराने कानूनों में कई अहम बदलाव करता है और वक्फ संपत्तियों को लेकर दशकों से चली आ रही अनियमितताओं और विवादों को सुलझाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के प्रमुख प्रावधान
1. डिजिटल डेटाबेस की अनिवार्यता
विधेयक के अनुसार अब हर वक्फ संपत्ति का ऑनलाइन पंजीकरण आवश्यक होगा। वक्फ को डोनेशन में मिली जमीन की जानकारी – जैसे दानकर्ता का नाम, संपत्ति की उत्पत्ति, उससे होने वाली आय और उसका उपयोग – छह महीने के भीतर एक सेंट्रल पोर्टल पर सार्वजनिक करनी होगी।
2. गैर-मुस्लिम और महिलाओं को वक्फ बोर्ड में शामिल करना अनिवार्य
नए कानून के तहत अब हर राज्य वक्फ बोर्ड में दो मुस्लिम महिलाओं और दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इसके अलावा बोर्ड में शिया, सुन्नी, पिछड़े मुसलमानों, बोहरा और आगाखानी समुदायों से भी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। यह कदम वक्फ प्रबंधन में विविधता और समावेशिता को बढ़ावा देगा।
3. वक्फ संपत्ति पर अधिकार का स्पष्ट निर्धारण
अब कोई भी व्यक्ति केवल वही जमीन वक्फ में डोनेट कर सकता है, जो कानूनी रूप से उसके नाम दर्ज है। दूसरे की जमीन को वक्फ बताकर कब्जा नहीं किया जा सकेगा। इस तरह के दान को अवैध माना जाएगा।
4. विवाद समाधान के लिए नया प्रावधान
यदि किसी संपत्ति को लेकर विवाद है कि वह वक्फ की है या नहीं, तो इसकी जांच का अधिकार राज्य सरकार के कलेक्टर रैंक या उससे ऊपर के अधिकारी को होगा। अफसर की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि संपत्ति वक्फ की है या सरकारी।
5. न्यायिक अपील के विकल्प
ट्रिब्यूनल के फैसलों को अब रेवेन्यू कोर्ट, सिविल कोर्ट या हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी। पहले यह विकल्प उपलब्ध नहीं था। अब कोई भी व्यक्ति 90 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।
6. सरकारी संपत्तियों पर वक्फ का दावा नहीं चलेगा
कानून स्पष्ट करता है कि जिन सरकारी जमीनों पर वक्फ दावा करता आया है, उन्हें वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा जब तक कि वे विधिवत प्रमाणित न हों। जांच में वक्फ का दावा झूठा निकलता है तो वह जमीन सरकारी मानी जाएगी और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होगी।
7. ऑडिट और निगरानी
अब केंद्र और राज्य सरकारों को वक्फ बोर्ड के खातों का ऑडिट कराने का अधिकार होगा। इससे वक्फ संपत्तियों से संबंधित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम लग सकेगी।
8. महिलाओं को मिलेगा उत्तराधिकार
‘वक्फ-अल-औलाद’ के तहत अब वक्फ संपत्तियों से होने वाली आमदनी में महिलाओं को भी उत्तराधिकारी माना जाएगा। पहले यह अधिकार सिर्फ पुरुषों तक सीमित था।
9. बिना दस्तावेज कब्जे पर रोक
विधेयक के अनुसार अब वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने के लिए साक्ष्य और सर्वे रिपोर्ट के बिना दावा नहीं कर सकता। इसका मकसद अनधिकृत कब्जे पर रोक लगाना है।
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