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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की राजनीति विकास और आधुनिकता पर केंद्रित रही है. राइजिंग भारत समिट 2025 में उनकी उपस्थिति न केवल आंध्र प्रदेश बल्कि पूरे भारत की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए महत्व…और पढ़ें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू राइजिंग भारत समिट में हिस्सा लेंगे.
राइजिंग भारत समिट 2025 में आने वाले तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के सुप्रीमो और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भारतीय राजनीति का एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपनी प्रशासनिक दक्षता, दूरदृष्टि और तकनीकी विकास की सोच से प्रदेश की तस्वीर बदली. उनकी कार्यशैली और विजन को देखते हुए उन्हें “आंध्र प्रदेश का चाणक्य” और “विजनरी लीडर” भी कहा जाता है. उनकी तकनीकी समझ और प्रशासनिक कुशलता के कारण लोग उन्हें ‘साइबर बाबू’ भी कहते हैं, क्योंकि उन्होंने हैदराबाद को एक आईटी हब में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
राजनीतिक सफर की शुरुआत
चंद्रबाबू नायडू का जन्म 20 अप्रैल 1950 को आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में हुआ था. उन्होंने श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर्स किया. उनका राजनीतिक सफर 1978 में कांग्रेस पार्टी से शुरू हुआ, लेकिन आगे चलकर वे 1982 में अपने ससुर और महान नेता एन. टी. रामाराव द्वारा स्थापित तेलुगु देशम पार्टी (TDP) में शामिल हो गए.
तेलुगु देशम पार्टी और नेतृत्व
1995 में चंद्रबाबू नायडू ने तेलुगु देशम पार्टी की कमान संभाली और राज्य की सत्ता अपने हाथ में ली. वे तीन बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और अपनी नीतियों के चलते राज्य को आईटी हब के रूप में स्थापित किया. उनके कार्यकाल में हैदराबाद को साइबराबाद बनाने की योजना बनी, जिससे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने निवेश किया.
तकनीकी क्रांति और विकास कार्य
चंद्रबाबू नायडू को भारत में ई-गवर्नेंस और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने वाले नेताओं में से एक माना जाता है. उनके नेतृत्व में राज्य में आईटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई परियोजनाएं और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाएं लागू की गईं. उन्होंने कृषि क्षेत्र में भी बड़े सुधार किए और किसानों को डिजिटल तकनीक से जोड़ने का काम किया.
चुनौतियां और वापसी की रणनीति
2019 के चुनावों में हार के बाद चंद्रबाबू नायडू थके नहीं और उन्होंने पार्टी को फिर से मजबूत करने की रणनीति बनाई. 2024 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने सहयोगी दलों के साथ मिलकर आंध्र प्रदेश की दो तिहाई सीटें जीत लीं. अब वे उन सपनों को पूरा करने में जुट गए हैं, जो पांच साल पहले अधूरे रह गए थे.

