दोनों देश कर रहे हैं सीईपीए पर विचार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी ने हाल ही में एक बैठक की। इस बैठक के बाद दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में कहा गया है कि दोनों देश व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर विचार कर रहे हैं। इस समझौते का मकसद 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करके 28 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। सीईपीए भी एक तरह का एफटीए ही होता है। इसमें दोनों देश आपस में होने वाले ज्यादातर व्यापार (करीब 90-95 फीसदी) पर लगने वाले टैक्स को या तो पूरी तरह खत्म कर देते हैं या फिर बहुत कम कर देते हैं। इसके अलावा, वे सेवाओं के व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए नियमों को आसान बनाते हैं।
थिंंक टैंक की सावधानी बरतने की सलाह
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार के तरीके को देखते हुए व्यापार समझौते पर सावधानी से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘भारत के पास एक अच्छा पेट्रोकेमिकल उद्योग है। अगर टैक्स में कमी से कतर से सस्ता माल आने लगे तो भारत के उद्योग को मुश्किल हो सकती है।’
श्रीवास्तव के अनुसार, कतर के साथ भारत का पहले से ही व्यापार घाटा है। मतलब हम कतर से ज्यादा सामान खरीदते हैं, बेचते कम हैं। अगर एफटीए के बाद बाजार पहुंच के फायदे को संतुलित नहीं किया गया तो यह घाटा और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा, ‘इस तरह के समझौते पर आगे बढ़ने से पहले क्षेत्रीय प्रभावों, विशेष रूप से ऊर्जा और विनिर्माण का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन जरूरी होगा।’
वित्त वर्ष 2023-24 में कतर से भारत ने 12.34 अरब डॉलर का सामान खरीदा, जबकि कतर को सिर्फ 1.7 अरब डॉलर का सामान बेचा। इससे साफ है कि कतर के साथ भारत का व्यापार असंतुलित है। इसलिए FTA पर फैसला लेने से पहले सभी पहलुओं पर अच्छे से विचार करना जरूरी है।

