Bengaluru Airport Protest: नेपाल घूमने का सपना लेकर निकले लोगों के लिए यह सफर किसी ट्रैवल एक्सपीरियंस से ज्यादा एक मानसिक और शारीरिक टेस्ट बन गया. बेंगलुरु से काठमांडू जाने वाली फ्लाइट लगातार दो दिनों तक लैंड नहीं कर सकी और करीब 180 यात्रियों को 30 घंटे से ज्यादा समय तक अनिश्चितता, थकान और जानकारी के अभाव का सामना करना पड़ा. मौसम खराब होने की वजह से फ्लाइट की लैंडिंग नहीं हो पाई. लेकिन यात्रियों का आरोप है कि एयरलाइन की खराब प्लानिंग और संवाद की कमी ने हालात को ‘टॉर्चर’ जैसा बना दिया. लंबा इंतजार, बार-बार डायवर्जन और स्पष्ट जानकारी न मिलने से यात्रियों का गुस्सा आखिरकार एयरपोर्ट पर फूट पड़ा.
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार यात्रियों का कहना है कि वे घंटों तक विमान के अंदर बैठे रहे. पहले फ्लाइट काठमांडू नहीं उतर सकी और वापस लौटी. अगले दिन फिर उड़ान भरी गई, लेकिन इस बार विमान को लखनऊ डायवर्ट कर दिया गया. यात्रियों के मुताबिक उन्हें विमान के अंदर ही बैठाकर रखा गया और कोई स्पष्ट अपडेट नहीं दिया गया. थकान और नाराजगी बढ़ती गई. आखिरकार यात्रियों ने विमान के अंदर ही विरोध शुरू कर दिया. इसके बाद उन्हें वापस बेंगलुरु लाया गया जहां एयरपोर्ट पर भारी हंगामा देखने को मिला.
- बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 पर लौटने के बाद यात्रियों ने इमिग्रेशन एरिया के पास धरना शुरू कर दिया. उनका कहना था कि दो दिन बर्बाद हो गए और पूरी नेपाल यात्रा खराब हो गई. कई यात्रियों ने आर्थिक नुकसान की भी बात कही. करीब 29 पर्यटक कोलार से थे जिन्होंने पहले से ट्रिप प्लान की थी. यात्रियों ने तत्काल वैकल्पिक फ्लाइट और मुआवजे की मांग की, जबकि एयरलाइन की ओर से अगले दिन व्यवस्था का आश्वासन दिया गया.
- स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब यात्रियों ने आरोप लगाया कि उन्हें 30 घंटे से ज्यादा समय तक यात्रा की अनिश्चित स्थिति में रखा गया. CISF कर्मियों को मौके पर हस्तक्षेप करना पड़ा और यात्रियों को शांत कराने की कोशिश की गई. हालांकि कई यात्री एयरलाइन से जवाब और जिम्मेदारी तय करने की मांग पर अड़े रहे. फिलहाल एयरलाइन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
यात्रियों का गुस्सा और मुआवजे की मांग ने बढ़ाया विवाद
लगातार दो बार लैंडिंग फेल होना, विमान का डायवर्जन, घंटों विमान में इंतजार और क्लियर इन्फॉर्मेशनका अभाव इन सभी वजहों ने इस घटना को बड़ा विवाद बना दिया. यात्रियों का कहना है कि मौसम समस्या हो सकती है लेकिन यात्रियों को बेसिक सुविधाएं और पारदर्शी जानकारी देना एयरलाइन की जिम्मेदारी है.
आखिर फ्लाइट काठमांडू में क्यों नहीं उतर सकी?
मौसम संबंधी खराब परिस्थितियों को लैंडिंग फेल होने की मुख्य वजह बताया गया है. हालांकि यात्रियों का आरोप है कि मौसम की जानकारी पहले से होने के बावजूद एयरलाइन ने पर्याप्त वैकल्पिक योजना नहीं बनाई, इससे बार-बार उड़ान भरने और लौटने की स्थिति बनी.
यात्रियों ने ’30 घंटे का टॉर्चर’ क्यों कहा?
यात्रियों के अनुसार उन्हें लंबे समय तक विमान के अंदर बैठाकर रखा गया. न खाने-पीने की सही व्यवस्था थी और न ही स्पष्ट सूचना दी गई. लगातार देरी, डायवर्जन और मानसिक तनाव ने इस अनुभव को बेहद कठिन बना दिया.
क्या यात्रियों को मुआवजा मिल सकता है?
एविएशन नियमों के तहत यदि एयरलाइन की लापरवाही या खराब प्रबंधन साबित होता है तो यात्रियों को मुआवजा मिल सकता है. इसमें टिकट रिफंड, वैकल्पिक फ्लाइट, होटल स्टे या आर्थिक क्षतिपूर्ति शामिल हो सकती है. हालांकि अंतिम फैसला जांच और एयरलाइन की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा.

