Last Updated:
Mutual Fund NFO : आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ने बाजार ने नया एनएफओ लॉन्च किया है, जिसमें 17 अक्टूबर तक निवेश किया जा सकता है. इस फंड की खासियत यह है कि इसके जरिये 240 कंपनियों में एकसाथ निवेश किया जा सकता है.
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ने नया एनएफओ लॉन्च किया है.नई दिल्ली. स्टॉक मार्केट और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ा मौका आया है. देश की दिग्गज म्यूचुअल फंड कंपनी आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड ने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल कॉन्ग्लोमरेट फंड के नाम से एक नया एनएफओ लॉन्च किया है. इस एनएफओ में 3 अक्टूबर 2025 से 17 अक्टूबर 2025 तक निवेश किया जा सकेगा. यह योजना कॉन्ग्लोमरेट थीम पर आधारित एक इक्विटी योजना है, जो उन प्रमोटरों के नेतृत्व वाले समूहों में निवेश करेगी जिनके पास कम से कम 2 सूचीबद्ध कंपनियां हों और जो विभिन्न सेक्टरों/उद्योगों में काम करती हों.
ओपन एंडेड इक्विटी थीम पर है यह फंड
यह एक ओपन-एंडेड इक्विटी योजना है जो कॉन्ग्लोमरेट थीम का पालन करेगी. कॉन्ग्लोमरेट उन प्रमोटरों के नेतृत्व वाले समूह होते हैं जो भारत में स्थित हैं और जिनकी दो या अधिक सूचीबद्ध कंपनियां अलग-अलग सेक्टरों या उद्योगों में होती हैं. मजबूत प्रमोटरों और विविध कारोबारी गतिविधियों के बल पर ये समूह मंदी के समय को संभालने, नए उभरते सेक्टरों में विस्तार करने और अलग-अलग क्षेत्रों या उद्योगों में अवसरों को भुनाने के लिए अच्छी स्थिति में रहते हैं.
क्या है इसकी खास बात
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के ईडी और सीआईओ संकरण नरेन ने कहा कि भारत के प्रमुख कारोबारी समूहों ने दशकों से खुद को दोबारा गढ़ने की अद्भुत क्षमता दिखाई है, चाहे वह संगठित रिटेल की शुरुआत करना हो, टेलीकॉम को बदलना हो, या फिर रिनीवेबल एनर्जी सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य वाले क्षेत्रों में प्रवेश करना हो. वे पैमाने के साथ दूरदर्शिता और मजबूती के साथ अनुकूलन क्षमता को जोड़ते हैं. इस फंड के जरिये हम उसी ताकत को सामने लाना चाहते हैं और निवेशकों को एक ऐसी थीम देना चाहते हैं जिसमें भारत की बदलती हुई ग्रोथ स्टोरी की झलक मिलती है.
क्या है कॉन्ग्लोमरेट्स?
कॉन्ग्लोमरेट्स को ऐसी संरचनात्मक बढ़त मिलती है, जिसमें मजबूती और विकास दोनों शामिल हैं. मजबूत पूंजी और संतुलित बैलेंस शीट से अधिक ऑपरेटिंग कैश फ्लो पूंजीगत खर्च और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है. यह कम पूंजी लागत के साथ मजबूत क्रेडिट रेटिंग अस्थिर समय में सहायक होती है. फॉरवर्ड, बैकवर्ड और एडजेसेंट इंटीग्रेशन के साथ कई समूह लॉजिस्टिक्स, एनर्जी, वित्तीय शाखाओं या डिज़ाइन जैसे क्षेत्रों में विस्तार करते हैं, जिससे सप्लाई स्थिर होती है, लागत घटती है और नए राजस्व स्रोत बनते हैं. मंदी के समय प्रबंधन की क्षमता होने से कमजोर प्रतिद्वंद्वियों को खरीदने और मंदी के दौरान विस्तार करने में सक्षम बनाते हैं.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें

