Last Updated:
Padma Shri Award: सुशीलम्मा ने अपनी 50 साल पुरानी यात्रा को याद करते हुए बताया कि यह सफर केवल 15 रुपए, एक दोस्त और तीन बच्चों के साथ शुरू हुआ था. आज वह खुद को ‘हजारों की मां’ मानती हैं. उन्होंने देश के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि उन्हें रोजगार और समाज सेवा के क्षेत्र में आगे आना चाहिए. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों की भी सराहना की और कहा कि एक आदिवासी महिला को देश का राष्ट्रपति बनाना गर्व की बात है और यह देश के लिए एक बड़ा संदेश है.
डॉ. एसजी सुशीलम्मा को पद्मश्री अवॉर्ड देने का ऐलान किया गया है.बेंगलुरु. बेंगलुरु की डॉ. एसजी सुशीलम्मा को पद्म पुरस्कार मिलने पर उनकी आंखों में खुशी के आंसू हैं. उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि महज 15 रुपए से शुरू हुआ उनका सफर यहां तक पहुंचेगा. सुशीलम्मा ने आईएएनएस से बात करते हुए अपनी संघर्षपूर्ण दास्तां सुनाई. उन्होंने बताया कि जब उन्हें अवॉर्ड की खबर मिली तो पहले यकीन ही नहीं हुआ.
उन्होंने सबसे पहले भगवान का शुक्रिया अदा किया. 50 साल पहले जब उन्होंने समाज सेवा की शुरुआत की थी, तब उनके पास सिर्फ 15 रुपए, एक दोस्त और तीन बच्चे थे. आज वे खुद को ‘हजारों की मां’ मानती हैं. यह सम्मान उनके लिए बहुत संतोष देने वाला पल है. सुशीलम्मा ने युवाओं और समाज के अमीर लोगों से भी खास अपील की है.
जेब में सिर्फ 15 रुपए थे…
सुशीलम्मा ने अपने पुराने दिनों को भावुक होकर याद किया. उन्होंने बताया कि यह सफर 50 साल पहले शुरू हुआ था. उस वक्त जेब में सिर्फ 15 रुपए थे. साथ में एक दोस्त और तीन बच्चे थे. आज हजारों लोग उन्हें मां मानते हैं. लोगों का प्यार और सम्मान देखकर उन्हें बहुत सुकून मिलता है. जब लोग बधाई देते हैं और पैर छूते हैं तो दिल खुश हो जाता है. उन्हें लगता है कि यह उनके जीवन की एक नई शुरुआत है.
पीएम मोदी की तारीफ, युवाओं को दिया मंत्र
उन्होंने देश के युवाओं को एक बड़ा मैसेज दिया है. सुशीलम्मा ने कहा कि युवाओं को रोजगार और समाज सेवा में आगे आना चाहिए. भारत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी युवाओं पर ही है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी खुलकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति बनाना गर्व की बात है. यह पूरे देश के लिए एक बहुत बड़ा और सकारात्मक संदेश है.
आदिवासियों को घर और रोजगार दिलाना मकसद
डॉ. सुशीलम्मा आदिवासियों की जिंदगी बदलने में जुटी हैं. उन्होंने मौगड़ी और बांदीपुर जैसे इलाकों में काम शुरू किया है. मौगड़ी में उनका 50 फीसदी काम पूरा हो चुका है. बाकी काम भी तेजी से चल रहा है. उनका मकसद आदिवासियों को घर और रोजगार दिलाना है. सुशीलम्मा ने अमीर लोगों से अपील की है कि वे गरीबों की मदद करें. उनका सपना है कि भारत में कोई गरीब न रहे. सबको घर, भोजन और शिक्षा मिले.
About the Author
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

