कानपुर: कानपुर के लोगों को अब जाम की समस्या से परेशान नहीं होना पड़ेगा. 150 करोड़ की लागत से बना सरैंया रेलवे ओवरब्रिज को शुरू कर दिया गया है. अब गंगा बैराज की तरफ से आने वाले वाहन सरैंया ओवरब्रिज से होते हुए सीधे कानपुर शहर पहुंच सकेंगे. इससे उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ समेत दूसरे शहरों से कानपुर आने-जाने वाले लोगों का सफर आसान हो गया है. खास बात यह है कि रेलवे क्रासिंग बंद होने पर लोगों को घंटों जाम में फंसे रहने की मजबूरी नहीं होगी.
बताया गया कि सरैंया आरओबी गंगा बैराज-शुक्लागंज मार्ग पर रेलवे क्रासिंग के ऊपर बनाया गया है. यह पुल सरैंया गांव की तरफ से शुरू होकर रेलवे लाइन को पार करते हुए मरहला चौराहे से आगे आजाद मार्ग की तरफ उतरता है. यानी शुक्लागंज और आजाद मार्ग से आने वाले वाहन अब रेलवे क्रासिंग पर रुके बिना ओवरब्रिज से निकलकर गंगा बैराज पहुंच सकेंगे.
चार लेन का बनाया गया है ओवरब्रिज
इस रास्ते से वाहन सवार सीधे कानपुर शहर की तरफ जा सकेंगे. इस पुल की लंबाई करीब 1.13 किलोमीटर है और इसे चार लेन का बनाया गया है. पुल पर दोनों तरफ साढ़े सात मीटर चौड़ी सड़क होने की जानकारी भी सामने आई है. पुल पर पांच मोड़ हैं, इसलिए वाहन चालकों को 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलाने की सलाह दी गई है.
वर्ष 2016 में बनी थी योजना, 2020 में शुरू हुआ निर्माण
सरैंया ओवरब्रिज बनाने की योजना वर्ष 2016 में तैयार की गई थी. शुरुआती योजना में पुल की लंबाई 785 मीटर है. इसकी लागत करीब 78 करोड़ रुपये रखी गई थी. वर्ष 2020 में परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ. बाद में इसकी लागत करीब 150 करोंड़ हुई. इसे जून 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन बाद में यातायात के दबाव को देखते हुए पुल की डिजाइन बदलने का फैसला लिया गया. पहले इसे मरहला चौराहे पर ही उतारने की योजना थी, लेकिन यहां जाम की समस्या को देखते हुए पुल को चौराहे से करीब 350 मीटर आगे आजाद मार्ग की तरफ बढ़ा दिया गया. इससे पुल की लंबाई बढ़कर करीब 1129 मीटर हो गई.
छह साल के इंतजार के बाद आवागमन शुरू
जानकारी के मुताबिक, डिजाइन में बदलाव, बजट की मंजूरी और निर्माण एजेंसी से जुड़ी अड़चनों के कारण काम में देरी हुई. सितंबर 2024 में संशोधित योजना के तहत निर्माण दोबारा तेज हुआ. अप्रैल 2025 में शेष निर्माण कार्य पूरा कराने की जिम्मेदारी दूसरी निर्माण एजेंसी को भी दी गई. आखिरकार छह साल के इंतजार के बाद पुल पर वाहनों का आवागमन शुरू हो गया.
एक दिन में 80 बार बंद होता था फाटक
सरैंया रेलवे क्रासिंग पर जाम की समस्या काफी पुरानी थी. कानपुर-लखनऊ रेलमार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही के कारण यहां दिनभर में औसतन 80 बार रेलवे फाटक बंद होता था. एक बार फाटक बंद होने पर करीब 10 से 15 मिनट तक वाहनों को इंतजार करना पड़ता था. इससे दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग जाती थी. कई बार वाहन चालकों को आधे घंटे तक जाम में फंसे रहना पड़ता था. अब ओवरब्रिज शुरू होने से रेलवे क्रासिंग के रास्ते पर वाहनों का दबाव काफी कम हो गया है.
जाजमऊ पुल की मरम्मत में भी मिलेगी मदद
एनएचएआई के निदेशक पंकज यादव ने बताया कि सरैंया आरओबी चालू होने से जाजमऊ गंगा पुल पर वाहनों का लोड कम होगा. अभी तक लखनऊ से कानपुर आने-जाने वाले ज्यादातर वाहनों के लिए जाजमऊ पुल प्रमुख रास्ता था. अब सरैंया के रास्ते भी वाहन निकल सकेंगे. इससे जाजमऊ पुल की मरम्मत का काम तेजी से कराया जा सकेगा. वहीं रोडवेज की लखनऊ और रायबरेली जाने वाली बसों का संचालन भी दीपावली के बाद इस रास्ते से करने की तैयारी है. आरएम रोडवेज महेश कुमार के अनुसार जिला प्रशासन के अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत हो चुकी है.

