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Indias Crude Import : होर्मुज से तेल की आवाजाही पर तीन महीने से पहरा लगा हुआ है. भारत इसी रास्ते अपने कुल तेल का 40 फीसदी मंगाता था, लेकिन रास्ता बंद होने के बावजूद उसके आयात पर खास असर नहीं दिखा. अप्रैल में क्रूड आयात के आंकड़े देख दुनिया हैरान कि कैसे भारत ने इतने कम समय में अपने लिए वैकल्पिक रूट और सप्लायर तैयार कर लिए.
होर्मुज पर ताला लगने के बावजूद भारत का क्रूड आयात मामूली रूप से ही कम हुआ है.
नई दिल्ली. ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध ने जहां दुनिया को हलकान-परेशान कर रखा है, वहीं भारत ने आपदा के इस वक्त में भी अपने लिए अवसर निकाल लिया. तेल की आवाजाही के दुनिया में सबसे प्रमुख रास्तों में शुमार होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान और अमेरिका दोनों ने ताला जड़ रखा है. बावजूद इसके भारत ने अप्रैल महीने में प्रतिदिन करीब 44 लाख बैरल तेल मंगाया, जो उसके युद्ध से पहले के आंकड़ों के मुकाबले मामूली रूप से कम हैं. भारत के इस डाईवर्सिफिकेशन और रणनीति को देख दुनिया हैरान है. यह अलग बात है कि तेल की कीमतें बढ़ने की वजह से कम आयात पर भी डेढ़ गुना ज्यादा बिल चुकाना पड़ा है.
ग्लोबल एनर्जी एजेंसी केप्लर के अनुसार, होर्मुज का रास्ता बंद होने की वजह से भारत के क्रूड आयात पर मामूली असर दिखा है. इसकी वजह से अप्रैल, 2026 में भारत ने रोजाना करीब 44 लाख बैरल तेल आयात किया, जबकि ईरान-अमेरिका युद्ध से पहले फरवरी में यह आंकड़ा 50 लाख बैरल प्रतिदिन था. आंकड़ों में यह संख्या भले ही कम दिख रही है, लेकिन जितना तेल आया है वह काफी अहम माना जा रहा है. इसकी वजह ये है कि भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी तेल आयात करता है, जिसमें से 40 फीसदी सिर्फ होर्मुज के रास्ते से आता है. ऐसे में होर्मुज से आवाजाही बंद होने के बावजूद आयात का यह आंकड़ा काबिल-ए-तारीफ है.
अप्रैल में कितना तेल आया
केप्लर के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि अप्रैल महीने में 2.01 करोड़ मीट्रिक टन क्रूड भारत ने आयात किया है. यह पिछले साल के अप्रैल महीने में आयात किए गए 2.10 करोड़ मीट्रिक टन से बस कुछ ही कम है. यह अलग बात है कि क्रूड की कीमतों में आए भारी उछाल की वजह से भारतीय कंपनियों को इस आयात के लिए 16.3 अरब डॉलर (करीब 1.56 लाख करोड़ रुपये) का बिल चुकाना पड़ा, जो पिछले साल की समान अवधि में 10.7 अरब डॉलर (करीब करीब 1 लाख करोड़ रुपये) रहा था.
किन देशों से मंगाया सबसे ज्यादा तेल
- रूस : केप्लर का डाटा बताता है कि भारत ने संकट के इस समय भी रूस का ही सहारा लिया. रूस ने मार्च में भारत को 19.2 लाख बैरल तेल प्रतिदिन सप्लाई किया था, जबकि अप्रैल में भी यह आंकड़ा 15.70 लाख बैरल प्रतिदिन रहा. हालांकि, टर्मिनल पर लोडिंग आदि में समस्या आने वजह से 20 फीसदी की गिरावट दिख रही है. बावजूद इसके देश के कुल आयात का करीब 35 से 40 फीसदी क्रूड रूस से ही आया है.
- सऊदी अरब : सऊदी अरब ने भी भारत को बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई की है और अप्रैल में यह आंकड़ा मार्च के मुकाबले बढ़कर 6.97 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया.
- यूएई : संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई लंबे समय से भारत का ऊर्जा साझेदार रहा है, जहां से अप्रैल में रोजाना 6.19 लाख बैरल क्रूड की खरीदारी हुई है.
- वेनेजुएला और ब्राजील : ईरान के साथ युद्ध में फंसे अमेरिका से भारत का आयात कम हुआ है, जबकि इराक से भी तेल खरीद पर असर पड़ा. होर्मुज बंद होने की वजह से भारत ने इन दोनों के विकल्प के तौर पर वेनेजुएला और ब्राजील से तेल खरीदा है.
- ईरान : भारत ने इस दौरान ईरान से भी कुछ तेल मंगाया, जबकि नाइजीरिया, अंगोला से भी आयात पर जोर दिया गया. हालांकि, इराक से जेल की खरीद लगभग शून्य हो गई है.
किस रूट से आया तेल
आप सोच रहे होंगे जब होर्मुज का रास्ता बंद था, तो भारत ने तेल मंगाया किस रास्ते. दरअसल, रूस से आने वाला तेल होर्मुज से नहीं गुजरता है और यह बाल्टिक महासागर से होकर आकृटिक और स्वेज नहर के जरिये भारत तक पहुंचता है. खाड़ी देशों के सप्लायर्स ने भी फारस की खाड़ी के बजाय लाल सागर के जरिये शिपमेंट भेजी. यूएई ने अपना तेल पहले पाइपलाइन के जरिये ओमान की खाड़ी तक भेजा और फिर वहां से होर्मुज को बायपास करते हुए भारत आ गया. इसी तरह, वेनेजुएला और ब्राजील से आने वाला क्रूड भी होर्मुज से नहीं गुजरा और भारत ने अपनी जरूरत का लगभग सारा कच्चा तेल बिना किसी व्यवधान से आयात कर लिया.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

