Last Updated:
सुल्तानपुर के वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि सुल्तानपुर में गांधी परिवार का जोड़ा का मुख्य केंद्र अमेठी लोकसभा सीट रही है क्योंकि सुल्तानपुर क्षेत्र की अमेठी रियासत जिसके राजा राजर्षि रणंजय सिंह के समय में पंडित मोतीलाल नेहरू का काफी गहरा जुड़ाव था. पंडित मोतीलाल नेहरू अमेठी स्टेट के वकील भी थे. यही वजह है कि बाद में इस
उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला ना सिर्फ पौराणिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण जिला है बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह काफी महत्वपूर्ण जिला माना जाता है. गांधी परिवार का और सुल्तानपुर का राजनीतिक रूप से काफी गहरा संबंध रहा है, क्योंकि पहले अमेठी लोकसभा क्षेत्र भी सुल्तानपुर जनपद का ही हिस्सा हुआ करता था. ऐसे में एक लंबी फेहरिस्त रही है सुल्तानपुर से गांधी परिवार के जुड़ाव की. जहां सुल्तानपुर में मौजूद चीनी मिल गांधी परिवार की देन मानी जाती है. इसके साथ ही सुल्तानपुर में वरुण गांधी,मेनका गांधी, संजय गांधी समेत कई गांधी परिवार के दिग्गजों ने चुनाव लड़ा तो आज हम जानेंगे कि आखिर सुल्तानपुर में गांधी परिवार की कब एंट्री होती है और राजनीतिक रूप से गांधी परिवार और सुल्तानपुर का किस तरह से जुड़ाव रहा है.
संजय और राजीव गांधी का दौर
सुल्तानपुर के वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि सुल्तानपुर में गांधी परिवार का जोड़ा का मुख्य केंद्र अमेठी लोकसभा सीट रही है क्योंकि सुल्तानपुर क्षेत्र की अमेठी रियासत जिसके राजा राजर्षि रणंजय सिंह के समय में पंडित मोतीलाल नेहरू का काफी गहरा जुड़ाव था. पंडित मोतीलाल नेहरू अमेठी स्टेट के वकील भी थे. यही वजह है कि बाद में इस संबंध को सुल्तानपुर से गांधी परिवार ने बरकरार रखा. इंदिरा गांधी का भी भावनात्मक जुड़ाव सुल्तानपुर से रहा है. 1976 में संजय गांधी ने सुल्तानपुर से ही अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की थी.
वरुण गांधी का आगमन
एक लंबे अंतराल के बाद जब सुल्तानपुर से अमेठी जिला 2010 में अलग हो गया तो सुल्तानपुर की सीट पर साल 2014 के लोकसभा चुनाव में वरुण गांधी ने पर्चा दाखिल किया और फिर से सुल्तानपुर जनपद का गांधी परिवार से जुड़ाव बन गया. 2014 में संजय गांधी के पुत्र वरुण गांधी ने सुल्तानपुर से यहां की जनता का लोकसभा में नेतृत्व किया. वरुण गांधी ने अपने पिता के पुराने राजनीतिक गढ़ को फिर से प्राप्त करने के उद्देश्य से साल 2014 में सुल्तानपुर का रुख किया.
मेनका गांधी का प्रतिनिधित्व
साल 2014 के बाद फिर से गांधी परिवार ने ही सुल्तानपुर में यहां की जनता का नेतृत्व लोकसभा में किया. साल 2019 के चुनाव में गांधी परिवार के इस धड़े ने अपनी पारंपरिक सीटों की अदला-बदली की. वरुण गांधी पीलीभीत चले गए और उनकी मां मेनका गांधी सुल्तानपुर से चुनाव मैदान में उतरी. वरुण गांधी की मां और संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी ने भाजपा के टिकट पर सुल्तानपुर से चुनाव लड़ा और कांटे की टक्कर में जीत हासिल क. वे इस क्षेत्र की सांसद चुनी गईं. 2024 के लोकसभा चुनावों में मेनका गांधी एक बार फिर सुल्तानपुर से भाजपा की उम्मीदवार थीं लेकिन इस बार उन्हें समाजवादी पार्टी (SP) के उम्मीदवार राम भुवाल निषाद के हाथों हार का सामना करना पड़ा. समय-समय पर परिणाम भले ही विपरीत रहे हो लेकिन गांधी परिवार का भावनात्मक जुड़ाव सुल्तानपुर से काफी गहरा रहा है.
About the Author
विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

