Last Updated:
अयोध्या के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि धर्मशास्त्रों के अनुसार ग्रहों की चाल समय-समय पर बदलती रहती है. कभी ग्रह गोचर करते हैं तो कभी वक्री होकर विशेष फल प्रदान करते हैं. शनि देव न्याय और कर्म के देवता माने जाते हैं. इसलिए उनकी चाल में परिवर्तन व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है. इस बार शनि मीन राशि में वक्री हैं, जिसका असर विशेष रूप से मेष, कर्क, मकर और मीन राशि के लोगों पर अधिक देखने को मिल सकता है. उनके अनुसार इन चार राशियों के जातकों के जीवन में अचानक आर्थिक खर्च बढ़ने, परिवार में तनावपूर्ण परिस्थितियां बनने, अस्पताल के चक्कर लगाने, कार्यों में रुकावट आने, बनते-बनते काम बिगड़ने, वाद-विवाद की स्थिति पैदा होने और दुर्घटना जैसी संभावनाओं के संकेत बन सकते हैं.
अयोध्या: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार समय-समय पर ग्रह और नक्षत्र अपनी चाल बदलते रहते हैं. ग्रहों के गोचर, वक्री और मार्गी होने का प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलता है. हिंदू पंचांग के अनुसार कर्मफलदाता भगवान शनिदेव 27 जुलाई से मीन राशि में वक्री हो चुके हैं और 11 दिसंबर तक इसी अवस्था में रहेंगे.इस दौरान सावन का पवित्र महीना भी चल रहा है, ऐसे में ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय विशेष महत्व का माना जा रहा है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि की वक्री चाल का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन चार राशियों के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है.
न्याय और कर्म के देवता हैं शनि
अयोध्या के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि धर्मशास्त्रों के अनुसार ग्रहों की चाल समय-समय पर बदलती रहती है. कभी ग्रह गोचर करते हैं तो कभी वक्री होकर विशेष फल प्रदान करते हैं. शनि देव न्याय और कर्म के देवता माने जाते हैं. इसलिए उनकी चाल में परिवर्तन व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है. इस बार शनि मीन राशि में वक्री हैं, जिसका असर विशेष रूप से मेष, कर्क, मकर और मीन राशि के लोगों पर अधिक देखने को मिल सकता है. उनके अनुसार इन चार राशियों के जातकों के जीवन में अचानक आर्थिक खर्च बढ़ने, परिवार में तनावपूर्ण परिस्थितियां बनने, अस्पताल के चक्कर लगाने, कार्यों में रुकावट आने, बनते-बनते काम बिगड़ने, वाद-विवाद की स्थिति पैदा होने और दुर्घटना जैसी संभावनाओं के संकेत बन सकते हैं. हालांकि यह सामान्य ज्योतिषीय संकेत हैं और इनका प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.
सकारात्मक फल मिलने की मान्यात
पंडित कल्कि राम का कहना है कि सावन भगवान शिव की आराधना का सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिदेव भगवान शिव के प्रमुख गणों में से एक हैं. ऐसे में यदि भगवान शिव प्रसन्न होते हैं तो शनि की प्रतिकूलता भी अनुकूलता में बदल सकती है. इसलिए सावन के दौरान विशेष पूजा-अर्चना करने से सकारात्मक फल मिलने की मान्यता है. उन्होंने बताया कि प्रातःकाल स्नान करने के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें. इसके बाद हाथ में थोड़े से काले तिल लेकर उन्हें शिवलिंग पर अर्पित करें. फिर जिस उंगली से चंदन लगाया जाता है, उसी उंगली से बिना किसी चंदन या रंग का प्रयोग किए शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखें. इसके बाद भगवान शिव से प्रार्थना करें कि प्रभु आपके समस्त गणों की अनुकूलता हम पर बनी रहे. ज्योतिषाचार्य के अनुसार श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए इस उपाय से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है तथा शनिदेव की अनुकूलता मिलने की मान्यता है. इससे जीवन में चल रही उथल-पुथल कम हो सकती है और आने वाली संभावित कठिनाइयों से राहत मिलने की धार्मिक मान्यता बताई गई है.
About the Author
Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
और पढ़ें

