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FCRA Bill: अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने एफसीआरए को लेकर पैदा हुए भ्रम को दूर करते हुए ‘मिथ बनाम रियलिटी’ के जरिए भारत का रुख साफ किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि FCRA का उद्देश्य नागरिक समाज या एनजीओ के विदेशी फंड पर रोक लगाना नहीं, बल्कि इसके इस्तेमाल में पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा को पुख्ता करना है.
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने एफसीआरए बिल के फायदे बताए. (फाइल फोटो)
FCRA Amendment Bill: अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर फैली गलतफहमियों पर Myth vs Reality के जरिए स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि FCRA का मकसद NGOs या सिविल सोसाइटी को विदेशी फंड लेने से रोकना नहीं, बल्कि विदेशी पैसों के इस्तेमाल में पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है. भारत में FCRA कानून 1976 से लागू है और 2010, 2016, 2018 और 2020 में इसमें बदलाव किए गए.
क्वात्रा के मुताबिक, 2024-25 में FCRA के तहत विदेशी योगदान बढ़कर करीब 2.67 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2010-11 में यह करीब 1.2 अरब डॉलर था. भारत में 30 लाख से ज्यादा NGOs हैं, जिनमें से करीब 14,450 ही FCRA के तहत रजिस्टर्ड हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून किसी धर्म या समुदाय को निशाना नहीं बनाता. कानून का मकसद धार्मिक संस्थाओं, अस्पतालों, स्कूलों और मानवीय संगठनों को नियमों के तहत विदेशी फंड हासिल करने की अनुमति है.
क्वात्रा ने कहा कि भारत इस तरह का नियमन करने वाला अकेला देश नहीं है. अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में भी विदेशी फंडिंग और विदेशी प्रभाव को लेकर ऐसे नियम मौजूद हैं.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
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