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मिर्जापुर जिले में कचहरी की स्थापना ब्रिटिश गवर्नमेंट में की गई थी. ब्रिटिश सरकार में कचहरी बनने के बाद यहां पर न्यायिक वाद की सुनवाई शुरू हुई थी, जहां न्याय का बड़ा केंद्र बना. ब्रिटिश सरकार में ही यहां पर जिला बार एसोसिएशन की स्थापना की गई थी. यह सात सदस्यों से शुरू हुआ. जिला बार एसोसिएशन में अब तीन हजार सदस्यों पर पहुंच गया है. आज भी यहां की इमारत प्राचीन इतिहास की गवाही देता है और पुराने दौर की याद भी दिलाता है.
मिर्जापुर: जिले में ब्रिटिश काल में बना न्यायालय आज भी लोगों के न्याय का बड़ा केंद्र है. मिर्जापुर जिले में कचहरी की स्थापना ब्रिटिश गवर्नमेंट में की गई थी. ब्रिटिश सरकार में कचहरी बनने के बाद यहां पर न्यायिक वाद की सुनवाई शुरू हुई थी, जहां न्याय का बड़ा केंद्र बना. ब्रिटिश सरकार में ही यहां पर जिला बार एसोसिएशन की स्थापना की गई थी. यह सात सदस्यों से शुरू हुआ. जिला बार एसोसिएशन में अब तीन हजार सदस्यों पर पहुंच गया है. आज भी यहां की इमारत प्राचीन इतिहास की गवाही देता है और पुराने दौर की याद भी दिलाता है.
ब्रिटिश काल से शुरू हुआ बार एसोसिएश
मिर्जापुर जिले में ब्रिटिश काल में शुरू हुआ जिला बार एसोसिएशन की स्थापना 1907 में किया गया था. 1907 में शुरू हुए जिला बार एसोसिएशन में सबसे पहले 7 अधिवक्ता ही शामिल थे, जिसके बाद कारवां बढ़ता गया, फिर 50 उसके बाद 100 सदस्य शामिल हुए. धीरे-धीरे करवा बढ़ता गया. अब करीब तीन हजार सदस्य हैं और 25 सौ वोटर हैं. मिर्जापुर जिला बार एसोसिएशन में अधिवक्ता रहे एकमात्र व्यक्ति हैं, जो इलाहाबाद हाई कोर्ट में न्यायाधीश बने थे. आज भी जिला बार एसोसिएशन अपने प्राचीनतम इतिहास को समेटे हुए जीवंत खड़ा है.
7 सदस्यों से हुआ शुरू
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अभय राज सिंह ने बताया कि यह न्यायालय ब्रिटिश सरकार के समय का है. ब्रिटिश सरकार में ही यहां के बार एसोसिएशन का गठन हुआ था, यहां पर बनी लाइब्रेरी में पढ़कर कई विद्वान अधिवक्ता बने. कई अधिवक्ता यहां से हाईकोर्ट जाकर भी प्रैक्टिस की. आज ही यहां पर वरिष्ठ अधिवक्ताओं को पूरा सम्मान दिया जाता है. सात सदस्यों से बार शुरू हुआ था, जहां करीब 2500 वोटर हैं. जो इमारत बनी हुई है, उसे भी अधिवक्ताओं के सहयोग से बनाया गया है. आज भी यह हम लोगों की पहचान है और धरोहर के रूप में प्रयोग होती है.
मधुकर मिश्रा ने बताया कि जिला बार एसोसिएशन का इतिहास अत्यंत प्राचीन है. यहां पर न्यायालय की स्थापना के बाद जिला बार एसोसिएशन बनाया गया था. लंबे समय से सदस्य बड़े संगठन से जुड़कर यहां पर प्रैक्टिस कर रहे हैं. ऐतिहासिक घटनाक्रमों को खुद में समेटे हुए यह संगठन आज भी मजबूत खड़ा हुआ है, यहां की इमारतें सबसे बड़ी पहचान है, जो प्राचीन और आजादी के पहले की बनाई हुई है. जिसकी नक्काशी भी अद्भुत है.
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