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मनरेगा का नाम बदलने की तैयारी, क्या होगा नया नाम?मनरेगा अब पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना के नाम से जाना जाएगा. सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने की तैयारी में है, जिसका नया नाम ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ हो सकता है. ग्रामीण विकास मंत्रालय ने यह प्रस्ताव तैयार किया है, जो महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज दर्शन को मजबूत करने का प्रयास है. यह बदलाव कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, लेकिन योजना का मूल ढांचा – ग्रामीण परिवारों को सालाना 100 दिन की गारंटी मजदूरी में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं होगा.
मनरेगा, जो 2005 में UPA सरकार द्वारा शुरू की गई थी. इसे भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. यह 25 करोड़ से ज्यादा परिवारों को आजीविका सुरक्षा देती है, बेरोजगारी कम करती है और स्थायी संपत्तियां (सड़कें, तालाब, वनरोपण) बनाती है. 2025-26 के बजट में इसके लिए 86,000 करोड़ रुपये आवंटित हैं, जो पिछले वर्ष से 10% अधिक है.
विश्व बैंक ने इसे ग्रामीण विकास का उत्कृष्ट उदाहरण कहा है और 2025 में 15 करोड़ से ज्यादा कार्य दिवस पूरे हो चुके हैं. योजना ने महामारी के दौरान करोड़ों प्रवासियों को रोजगार दिया, लेकिन देरी, भुगतान असमानता और FTO समस्याएं बनी हुई हैं.
इतिहास क्या है?
इस योजना का इतिहास काफी गहरा है. 2005 में रघुवंश प्रसाद सिंह द्वारा पेश बिल 23 सितंबर को पारित हुआ था. 2 अक्टूबर 2005 को गांधी जयंती पर कानून बना. 2009 में इसका नाम मनरेगा रखा गया. विश्व बैंक ने भी 2014 में इस योजना का तारीफ किया था. विश्व बैंक ने इस ‘ग्रामीण विकास का उत्कृष्ट उदाहरण’ कहा था. वर्तमान, यह 7 करोड़ जॉब कार्ड धारकों को लाभ पहुंचाती है. 2025 में 15 करोड़ से ज्यादा मनरेगा कार्य दिवस पूरे हो चुके हैं.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें

