पणजी. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को गोवा में भारतीय तटरक्षक बल के लिए देश में ही डिजाइन और निर्मित पहले प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को औपचारिक रूप से सेवा में शामिल किया. समारोह दक्षिण गोवा के वास्को स्थित गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) परिसर में आयोजित किया गया, जहां गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि भी मौजूद रहे.
अधिकारियों के अनुसार ‘समुद्र प्रताप’ पूरी तरह आधुनिक तकनीक से लैस प्रदूषण नियंत्रण पोत है, जिसे गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने तैयार किया है. 114.5 मीटर लंबे इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है. इसका वजन लगभग 4,200 टन है और यह 22 नॉट से अधिक की गति से चलने में सक्षम है. इसे दिसंबर में ही औपचारिक रूप से तटरक्षक बल को सौंप दिया गया था, जिसके बाद अब इसे ऑपरेशनल सेवा में शामिल किया गया है.
यह पोत समुद्री प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानकों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इसके माध्यम से समुद्र में तेल या रसायन रिसाव जैसी घटनाओं की निगरानी और नियंत्रण किया जा सकेगा. इसके साथ ही यह जहाज समुद्री कानून प्रवर्तन, खोज और बचाव अभियान (सर्च एंड रेस्क्यू) तथा भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की निगरानी और सुरक्षा में भी तैनात किया जाएगा.
समारोह को संबोधित करते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का मानना है कि समुद्री संसाधन किसी एक देश की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की साझा धरोहर हैं. उन्होंने कहा कि जब विरासत साझा होती है तो उसकी जिम्मेदारी भी साझा होती है, और इसी सोच ने भारत को एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित किया है. उन्होंने ‘समुद्र प्रताप’ को समुद्री क्षमता और स्वदेशी निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.
रक्षामंत्री ने अपने भाषण में महिलाओं की भागीदारी का विशेष उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में महिलाओं की पर्याप्त और सार्थक हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए. उन्होंने सराहना की कि तटरक्षक बल महिला सशक्तीकरण पर गंभीरता से काम कर रहा है. उनके अनुसार, महिला अधिकारियों को पायलट, ऑब्जर्वर, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और लॉजिस्टिक्स ऑफिसर जैसी जिम्मेदार भूमिकाओं में नियुक्त किया गया है.
राजनाथ सिंह ने यह भी बताया कि महिलाओं को ‘होवरक्राफ्ट’ संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और उन्हें अग्रिम मोर्चे के अभियानों में सक्रिय रूप से तैनात किया जा रहा है. उनके शब्दों में, आज महिलाएं केवल सहायक भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अग्रिम पंक्ति की योद्धा के रूप में भी राष्ट्र की सेवा कर रही हैं.
भारतीय तटरक्षक बल ने एक बयान में कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ का शामिल होना पोत निर्माण और समुद्री संचालन क्षमता के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है. बल का मानना है कि इस पोत से प्रदूषण नियंत्रण क्षमता बढ़ेगी, पर्यावरण सुरक्षा मजबूत होगी और समुद्री सीमाओं की रक्षा और अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी.

