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BJP MLA Raju Singh news: रसूख के नशे में की गई हर्ष फायरिंग ने एक हंसते-खेलते परिवार को जीवन भर का दर्द दे दिया. करीब साढ़े सात साल पुराने इस चर्चित मामले में आखिरकार दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपना बड़ा फैसला सुना दिया है. अदालत ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहिबगंज विधानसभा सीट से बाहुबली विधायक राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन का दोषी पाया है और अब आज सजा सुनाई जाएगी.
बीजेपी विधायक राजू सिंह हर्ष फायरिंग केस में आज सजा पर बहस.
पटना. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने डॉक्टर अर्चना गुप्ता की मौत से जुड़े चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में दोषी ठहराया है. अब आज (9 जून) को अदालत में सजा के बिंदु पर बहस होनी है, जिसके बाद यह तय होगा कि विधायक को कितनी सजा मिलेगी. बता दें कि बीते 6 जून को अदालत पहले ही उन्हें गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दे चुकी है. विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने दोषसिद्धि के तुरंत बाद विधायक को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दे दिया था. अब हर किसी की नजर आज होने वाली सुनवाई पर टिकी है.
साल 2018 के आखिरी दिन का वो खूनी वाकया
बता दें कि यह पूरी घटना 31 दिसंबर 2018 की रात की है. तब दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित बसंत कुंज इलाके के एक आलीशान फार्महाउस में नए साल के स्वागत का जश्न मनाया जा रहा था. इस पार्टी में भारी भीड़ मौजूद थी और लोग नाच-गाने का आनंद ले रहे थे. इसी दौरान रसूख के नशे में चूर आरोपी विधायक राजू कुमार सिंह ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल निकाली और हवा में गोलियां चलानी शुरू कर दीं. बदकिस्मती से उनकी पिस्तौल से निकली एक गोली वहां मौजूद 45 वर्षीय महिला डॉक्टर अर्चना गुप्ता के सिर में जा लगी. गोली लगते ही डॉक्टर अर्चना लहूलुहान होकर गिर पड़ीं. उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान 3 जनवरी 2019 को उन्होंने दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद डॉक्टर अर्चना के पति की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने फतेहपुर बेरी थाने में केस दर्ज किया था.
कोर्ट ने लापरवाही को माना गंभीर अपराध
बीते 6 जून को अदालत ने गवाहों के बयान और उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर राजू सिंह को दोषी ठहराया है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस हत्याकांड मामले पर बेहद सख्त टिप्पणी भी की थी. न्यायाधीश ने कहा कि नए साल की पार्टी जैसे भीड़भाड़ वाले माहौल और डांस फ्लोर पर हथियार से गोली चलाना यह साफ दिखाता है कि आरोपी को इस बात की पूरी जानकारी थी कि उसके इस कृत्य से किसी व्यक्ति की जान जा सकती है. कोर्ट ने इस बात को पूरी तरह खारिज कर दिया कि यह महज एक दुर्घटना थी. अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में रखा.
तीन अन्य आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
हालांकि, इस मामले में पुलिस ने विधायक राजू कुमार सिंह के अतिरिक्त उनकी पत्नी और पूर्व विधान परिषद सदस्य रेणु सिंह, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को भी आरोपी बनाया था. इन तीनों पर आरोप था कि इन्होंने घटना के बाद फार्महाउस पर पड़े खून के धब्बों को साफ किया और सबूतों को मिटाने की कोशिश की थी. लेकिन, लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि इन तीनों के खिलाफ सबूत मिटाने के पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं. इसके बाद कोर्ट ने राजू सिंह की पत्नी सहित तीनों सह-आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया.
दांव पर लगी है विधायक राजू सिंह की विधायकी
कानूनी जानकारों के अनुसार, भारतीय दंड संहिता की धारा 304 पार्ट-2 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत दोषी पाए जाने पर अपराधी को अधिकतम 7 साल तक की जेल या जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है. ऐसे में राजू सिंह के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से आज का दिन बेहद संवेदनशील है. नियमों के अनुसार यदि कोर्ट उन्हें 2 वर्ष या उससे अधिक की जेल की सजा सुनाती है, तो उनकी साहिबगंज विधानसभा सीट की सदस्यता तुरंत रद्द हो जाएगी. बता दें कि वह चार बार के विधायक और बिहार सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके हैं. ऐसे में यदि सजा 2 वर्ष सेअधिक होती है तो बीजेपी को भी झटका लगेगा.
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