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Micro sculpture: बांकुड़ा के कलाकार इंद्रनील चटर्जी ने माँ काली की अद्भुत सूक्ष्म मूर्तियाँ बनाई हैं. ब्लेड, चावल, पेंसिल की नोक और बोतल के भीतर एल्युमीनियम पर उकेरी गई ये कलाकृतियाँ श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध क…और पढ़ें
माँ काली की अनोखी मूर्तियां
बांकुड़ा के प्रसिद्ध सूक्ष्म कलाकार इंद्रनील चटर्जी ने इस बार काली पूजा के अवसर पर माँ काली की अद्भुत मूर्तियों का अनोखा संग्रह तैयार किया है. उनकी कला की खासियत यह है कि वे बेहद छोटी और बारीक चीजों पर माँ काली के चित्र उकेरते हैं. ब्लेड, चावल, पेंसिल की नोक, और यहाँ तक कि बोतल के भीतर के एल्युमीनियम पर भी उन्होंने माँ काली की मूर्ति उकेरी है. उनकी यह कलाकारी देखकर हर कोई हैरान है और श्रद्धा से भर उठा है.
पत्थर और धातु पर उकेरी गई देवी की छवि
इंद्रनील चटर्जी ने केवल सूक्ष्म वस्तुओं तक ही अपनी कला को सीमित नहीं रखा, बल्कि बारीक चूना पत्थर के 4 सेंटीमीटर मोटे टुकड़े पर भी माँ काली की भव्य आकृति बनाई है. उनकी इस कला में देवी के अलग-अलग रूप उभरकर आते हैं, जो भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं. यह न केवल उनकी प्रतिभा का प्रमाण है, बल्कि माँ काली के प्रति उनकी गहरी आस्था और भक्ति भी दर्शाता है.
कला में नयापन और परंपरा का संगम
इंद्रनील चटर्जी भले ही पेशे से चित्रकार हैं, लेकिन उनकी पहचान अब एक सूक्ष्म कलाकार के रूप में बन चुकी है. वे बारीक और छोटी वस्तुओं पर देवी की मूर्तियाँ तराशने में निपुण हैं. उनकी कला यह साबित करती है कि सुदूर इलाकों में भी कला की साधना संभव है और नए प्रयोगों से इसमें नयापन लाया जा सकता है. उनकी कलाकृतियाँ देखने के लिए लोग दूर-दूर से आ रहे हैं और माँ काली के इस अनोखे रूप को देखकर अचंभित हो रहे हैं.
कलाकार का जुनून और समर्पण
इंद्रनील चटर्जी का कहना है, “मैं वही करता हूँ जो मुझे पसंद है. मेरी आँखें जब तक ठीक हैं, मैं यह कला करता रहूँगा.” उनका यह समर्पण ही उनकी कला को खास बनाता है. माँ काली के प्रति उनकी गहरी भक्ति और इस कला के प्रति उनका प्रेम ही उनकी कलाकृतियों को विशेष बनाता है. उनकी मेहनत और प्रतिभा ने साबित कर दिया कि जुनून और समर्पण से किसी भी कला को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है.
माँ काली की मूर्तियों के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
इंद्रनील चटर्जी द्वारा बनाई गई इन सूक्ष्म मूर्तियों को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है. श्रद्धालु माँ काली के इन रूपों के दर्शन कर आशीर्वाद ले रहे हैं और कलाकार की प्रतिभा की सराहना कर रहे हैं. उनकी कलाकृतियाँ न केवल एक धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि यह दिखाती हैं कि कैसे परंपरा और आधुनिकता को जोड़कर नई ऊँचाइयों तक पहुँचा जा सकता है.
Bankura,West Bengal
March 17, 2025, 12:50 IST

