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Patna NEET aspirant death case: शंभू गर्ल्स हॉस्टल नीट छात्रा मौत मामले में पटना पुलिस ने जांच की दिशा, बयान और त्वरित निष्कर्ष निकाल लिए उसके कारण एक बड़ा सवाल आम जनता के मन में गूंज रहा है- क्या पुलिस जांच शुरू से ही संदिग्धों में से किसी को बचाने का प्रयास कर रही थी? अब जब सबूत फॉरेंसिक रिपोर्ट के रूप से सामने आए और और सच लगातार उजागर हो रहा है, तब वही सवाल सरकार, पुलिस और न्यायपालिका के सामने खड़ा है- क्या न्याय निष्पक्ष रूप से मिलेगा? और किसे बचाने की कोशिश की जा रही थी?
पटना शंभू गर्ल्स हॉस्टल NEET छात्रा मौत केस में पटना पुलिस की जांच पर सवाल. (AI जेनरेटेड)पटना. बिहार की राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल (Shambhu Girls Hostel) में नीट (NEET) की तैयारी कर रही 18-साल की छात्रा की संदिग्ध मौत ने बिहार पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है.मामले की जांच की शुरुआत में ही पटना पुलिस ने इसे नींद की गोलियों के ओवरडोज और आत्महत्या बता दिया था, लेकिन अब जब फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम ने यौन हिंसा का संकेत दिया है तो पुलिस की शुरुआत की जांच पर सवाल उठ रहे हैं. अब नीट छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में पटना पुलिस ने 15 संदिग्धों की डीएनए जांच के लिए लिस्ट तैयार की है, जिसमें हॉस्टल भवन का मालिक मनीष रंजन भी शामिल है. इसके साथ ही कंकड़बाग थाना में हिरासत में लिए गए तीन सस्पेक्ट की डीएनए सैंपल लिया गया है, जिनमें से दो मृतक के करीबी हैं जबकि एक पटना का निवासी है. परिजनों का दावा है कि हॉस्टल में घिनौना काम हुआ है और पुलिस की जांच शक के घेरे में है. परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने शुरू से ही जांच में लापरवाही दिखाई है.
फॉरेंसिक रिपोर्ट से जांच में आया बड़ा मोड़
बता दें कि इस मामले में पटना पुलिस की लापरवाही तब भी सामने आई थी जब पटना पुलिस ने बेटशीट धुलकर FSL टीम को सौंपी थी. इसके पहले जांच में लापरवाही बरतने के मामले में अबतक दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. वहीं, SIT गठित कर मामले की जांच की जा रही है और पुलिस ने हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को गिरफ्तार किया जा चुका है. SIT ने दोबारा घटनास्थल की फॉरेंसिक जांच कराई है और मोबाइल लोकेशन डेटा खंगाला है. इसके साथ ही कई दस्तावेज जब्त किए हैं और प्रभात मेमोरियल अस्पताल के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है.
मामला हत्या और यौन अपराध की ओर बढ़ रहा!
बता दें कि तथ्य भी यही है कि थानेदार और प्रभात हॉस्पिटल की रिपोर्ट पर यकीन करने से पुलिस की किरकिरी हुई. दरअसल, छात्रा को 6 जनवरी को पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल के कमरे में बेहोश पाया गया, उसके बाद उसे निजी अस्पताल ले जाया गया जहां 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा को पूरी तरह माना नहीं गया था और पटना पुलिस ने दावा किया कि वह नींद की गोलियों के अधिक सेवन से बेहोश हुई थी. परिवार को भी बताया गया कि टेस्ट और सीसीटीवी में कोई यौन हमला नहीं है.
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत, यौन हिंसा के संकेत, पुलिस जांच पर उठे सवाल,
छात्रा के साथ यौन हिंसा की आशंका
परिजनों ने शुरुआती रिपोर्ट पर कड़ा संदेह जताया और कहा कि उनके कहे अनुरूप शारीरिक चोटों और खरोंचों की जांच नहीं की गई. वे लगातार इस बात पर जोर दे रहे थे कि बेटी के साथ रेप और हत्या हुई है और यह मामला केवल ‘आत्महत्या’ नहीं है. पुलिस ने 10 जनवरी को जब परिवार ने छात्रा के कपड़े, जिनके साथ उन्होंने पुलिस से संपर्क किया, सीधे जांच के लिए दिए तो उस पर फॉरेंसिक जांच में मेल सीमेन (स्मेन) के निशान मिले. यह बात अब पुलिस और जांच एजेंसियों ने स्वीकार की है जिससे यह पुष्टि होती है कि छात्रा के साथ यौन हिंसा की आशंका है.
पुलिस की कार्रवाई और लापरवाही के आरोप
इस बीच DNA प्रोफाइलिंग का काम चल रहा है ताकि संदिग्धों के साथ मैच किया जा सके. अब तक की रिपोर्ट के बाद जांच का पैमाना बदल गया है और अब यह हत्या और यौन अपराध के गंभीर आरोप की ओर बढ़ रहा है, न कि केवल आत्महत्या की दिशा में. घटना के शुरुआती दिनों में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. मृत छात्रा के कमरे और हॉस्टल को तुरंत सील नहीं किया गया और सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूत समय पर संकलित नहीं किए गए. शुरुआती मेडिकल और पुलिस बयान में सुसाइड नरेटिव अधिक पुष्ट किया गया.
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत, FSL को धुली बेडशीट भेजने पर पुलिस जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं.
पटना पुलिस पर सबसे बड़ा सवाल
परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस और हॉस्टल प्रशासन साक्ष्यों को दबाने और आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहे थे. ऐसे में इन कारणों से पुलिस की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं. कांग्रेसी और विपक्षी राजनीतिक नेताओं से लेकर आम जनता तक पूछ रहे हैं -क्या वास्तव में किसी प्रभावशाली व्यक्ति या किसी बड़े नेटवर्क को बचाने के लिए जांच को मोड़ा गया? शुरुआती जांच में हुई देरी और कथित तौर पर हुई चूकों ने इस सवाल को और मजबूती दी है. साफ है कि शुरू से ही पुलिस की जांच रही शक के घेरे में है और सवाल यही है कि आखिर किसे बचाना चाहती थी पटना पुलिस?
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