IAF Electronic Warfare: बीसवीं सदी के शुरुआत में पैदल सेना यानी आर्मी की ताकत से किसी भी देश की औकात का पता चलता था. जिस देश के पास जितनी विशाल आर्मी होती थी, उसे उतना ताकतवर माना जाता था. समय बदला और एयरफोर्स के साथ ही नेवी का रोल अहम हो गया. आज जब दुनिया 21वीं सदी में है, तब युद्ध का तौर-तरीका भी बदल चुका है. रूस-यूक्रेन से लेकर इजरायल-ईरान तक के सशस्त्र संघर्ष में टेक्नोलॉजी का व्यापक इस्तेमाल देखा गया. अमेरिका का ऑपरेशन वेनेजुएला में भी तकनीक का व्यापक प्रयोग किया गया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने मॉडर्न टेक्नोलॉजी का यूज करते हुए पाकिस्तान को धूल चटा दी. इंडियन आर्म्ड फोर्सेज ने पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम और रडार को डीएक्टिवेट कर एरियल अटैक को अंजाम दिया. आतंकवादियों के कई ठिकानों को मिट्टी में मिला दिया गया. अब दुनिया तेजी से इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की ओर बढ़ रही है. इस सेगमेंट में जो देश जितना सशक्त है, वह मॉडर्न वॉरफेयर में उतना सफल है. अमेरिकी सेना ने जब वेनेजुएला पर अटैक किया तो वहां के तमाम रडार सिस्टम को जाम कर दिया गया, जिससे वहां के सिक्योरिटी डिपार्टमेंट को कुछ पता नहीं चल सका और ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया गया. अब इंडियन एयरफोर्स को ऐसा ब्रह्मास्त्र मिला है, जिसकी मदद से दुश्मनों के एयर डिफेंस सिस्टम को ब्लाइंड करना आसान हो जाएगा. फाइटर जेट और रडार सिस्टम में भी सेंध लगाकर उसे कबाड़ बनाया जा सकेगा. वायुसेना को ग्राउंड बेस्ड वेरी-अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी (GBVU) की डिलीवरी शुरू हो चुकी है, जिसकी मदद से दुश्मन के कम्यूनिकेशन सिस्टम को भेदना आसान हो जाएगा. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में यह गेमचेंजर साबित हो सकता है.
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने भारतीय वायुसेना (IAF) को अपना अत्याधुनिक ग्राउंड बेस्ड वेरी-हाई/अल्ट्रा-हाई फ्रिक्वेंसी (GBVU) कम्युनिकेशन जैमर की डिलीवरी शुरू कर दी है. यह स्वदेशी प्रणाली भारत की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है, जिससे युद्धक्षेत्र में दुश्मन की कम्यूनिकेशन सिस्टम को बाधित करने और उस पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में वायुसेना को नई बढ़त मिलेगी. रक्षा मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख इकाई BEL द्वारा विकसित यह जैमर 30 से 1,000 मेगाहर्ट्ज तक के व्यापक स्पेक्ट्रम पर काम करता है, जिसमें आधुनिक सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले VHF और UHF बैंड शामिल हैं. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह न केवल शत्रु के कम्यूनिकेशन सिस्टम को जाम कर सकता है, बल्कि उन्हें वास्तविक समय में इंटरसेप्ट और मॉनिटर भी कर सकता है. इससे ऑपरेटरों को दुश्मन के नेटवर्क की तुरंत पहचान कर सटीक इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर अपनाने में मदद मिलती है.
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) क्या होता है?
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सैन्य रणनीति का वह हिस्सा है, जिसमें दुश्मन के रडार, संचार प्रणाली और सेंसर नेटवर्क को बाधित, भ्रमित या निष्क्रिय किया जाता है, ताकि उसकी युद्ध क्षमता कमजोर की जा सके.
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के मुख्य प्रकार कौन-से हैं?
इसके तीन प्रमुख प्रकार हैं – इलेक्ट्रॉनिक अटैक (दुश्मन के सिस्टम को जाम करना), इलेक्ट्रॉनिक प्रोटेक्शन (अपने सिस्टम को सुरक्षित रखना) और इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट (दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों की निगरानी व पहचान करना).
आधुनिक युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्यों महत्वपूर्ण हो गया है?
आज की लड़ाइयां तकनीक आधारित हैं, जहां रडार, ड्रोन और सैटेलाइट संचार निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के जरिए बिना सीधे हथियारों के दुश्मन की सैन्य बढ़त को कमजोर किया जा सकता है.
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर का इस्तेमाल किन क्षेत्रों में होता है?
इसका इस्तेमाल वायुसेना के लड़ाकू विमानों, नौसेना के युद्धपोतों, थलसेना के संचार नेटवर्क और ड्रोन संचालन में किया जाता है, जिससे युद्ध के मैदान में रणनीतिक बढ़त मिलती है.
भारत की सुरक्षा रणनीति में इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर की क्या भूमिका है?
भारत अपनी सेनाओं में स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम विकसित कर रहा है, ताकि भविष्य के हाई-टेक युद्धों में संचार सुरक्षा मजबूत हो और दुश्मन की तकनीकी क्षमताओं का प्रभावी मुकाबला किया जा सके.
GBVU पारंपरिक जैमर से अलग कैसे?
GBVU जैमर की दिशा-निर्धारण (डायरेक्शन फाइंडिंग) क्षमता इसे पारंपरिक जैमर से अलग बनाती है. यह इंटरसेप्ट किए गए सिग्नल की रेंज और बियरिंग की सटीक जानकारी देता है, जिससे मित्र सेनाएं (जैसे फाइटर स्क्वॉड्रन या जमीनी बल) स्रोत को ट्रायएंगुलेट कर निशाना बना सकते हैं. इस तरह यह सिस्टम केवल कम्यूनिकेशन को बाधित करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध को प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से जोड़ने वाला एक प्रभावी उपकरण बन जाती है. ‘इंडियन डिफेंस न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह सिस्टम दुश्मन द्वारा उपयोग किए जाने वाले सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड कम्यूनिकेशन चैनलों और डाटा लिंक को भी निष्प्रभावी करने में सक्षम है, जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान और चीन जैसी सेनाएं करती हैं. BEL ने इसमें वाइडबैंड नॉइज जैमिंग और डीसेप्टिव सिग्नल इंजेक्शन जैसी उन्नत तकनीकों को शामिल किया है, जिससे कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क, ड्रोन डेटा रिले और स्ट्रैटजिक वॉयस कम्युनिकेशन को भी बाधित किया जा सकता है.
IAF Electronic Warfare: कम्यूनिकेशन जैमर की मदद से शत्रुओं के फाइटर जेट के रडार में सेंध लगाकर उसे भ्रमित करना आसान हो जाएगा. (फाइल फोटो/Reuters)
एयर डिफेंस सिस्टम में भी कारगर
IAF के ऑपरेशनल नेटवर्क में इस जैमर का इंटीग्रेशन विशेष रूप से उन अग्रिम क्षेत्रों में एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करेगा, जो सीमा पार से संभावित घुसपैठ या हवाई खतरे के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं. तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमानों और आकाश मिसाइल सिस्टम्स के साथ मिलकर यह सिस्टम स्पेक्ट्रम डॉमिनेंस को और मजबूत बनाएगा. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान के JF-17 प्लेटफॉर्म्स में इस्तेमाल होने वाले डेटा लिंक या चीन के J-10C जैसे फाइटर जेट्स के सुरक्षित रेडियो सिस्टम्स को काउंटर करने में भी सक्षम होगा, जिससे टू-फ्रंट वॉर कंडीशन में भारत की स्थिति मजबूत होगी. ऑपरेशनल दृष्टि से GBVU जैमर ट्रक-माउंटेड है, जिससे इसे तेजी से तैनात किया जा सकता है. इसका मॉड्यूलर आर्किटेक्चर इसे विभिन्न मिशन आवश्यकताओं के अनुसार तुरंत री-कॉन्फ़िगर करने की सुविधा देता है. यह एक साथ कई चैनलों पर जैमिंग कर सकता है और इसकी पावर आउटपुट को खतरे के स्तर के अनुसार स्केल किया जा सकता है. उन्नत कूलिंग और पावर सिस्टम इसे लंबे समय तक चलने वाले अभियानों में भी प्रभावी बनाए रखते हैं, जो भारत के क्लाइमेट में बेहद महत्वपूर्ण है.
इंक्शन कब होगा पूरा?
BEL के अनुसार, इस प्रणाली की पूर्ण इंडक्शन प्रक्रिया 2026 के मध्य तक पूरी होने की संभावना है. शुरुआती यूनिट्स पश्चिमी और उत्तरी वायु कमांड के लिए निर्धारित की गई हैं, जहां सीमा सुरक्षा और हवाई निगरानी की आवश्यकताएं सबसे अधिक हैं. कई सौ करोड़ रुपये मूल्य की यह खरीद भारतीय वायुसेना के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर आधुनिकीकरण पर बढ़ते फोकस को भी दर्शाती है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां लगातार जटिल होती जा रही हैं. भविष्य में GBVU जैमर के उन्नत संस्करणों में फ्रीक्वेंसी कवरेज को और विस्तारित करने की योजना है, ताकि उभरते 5G आधारित सैन्य नेटवर्क और अगली पीढ़ी की संचार प्रणालियों को भी प्रभावी ढंग से काउंटर किया जा सके. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली न केवल भारत की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि मित्र देशों को निर्यात के अवसर भी पैदा करेगी. GBVU कम्युनिकेशन जैमर भारतीय रक्षा तकनीक में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. यह न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम करता है, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान, विकास और उत्पादन की क्षमताओं को भी नई पहचान देता है. बदलते भू-राजनीतिक माहौल में, ऐसे उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सिस्टम भारत की सैन्य तैयारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेंगे.

