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Pushkar Brahma Mandir: राजस्थान का पुष्कर केवल विश्व प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर के लिए ही नहीं, बल्कि एक प्राचीन शक्तिपीठ के लिए भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता सती की कलाई (मणिबंध) गिरने से यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रतिष्ठित हुआ। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु ब्रह्मा मंदिर के साथ इस पवित्र शक्तिपीठ के भी दर्शन करते हैं। मान्यता है कि यहां श्रद्धा से पूजा-अर्चना करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। यह स्थल पुष्कर की धार्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
अजमेर. अजमेर जिले में स्थित तीर्थनगरी पुष्कर विश्वभर में ब्रह्मा मंदिर और पवित्र सरोवर के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यहां एक ऐसा प्राचीन शक्तिपीठ भी स्थित है, जिसे धार्मिक ग्रंथों में विशेष महत्व दिया गया है. श्री राजराजेश्वरी पुरुहूता मणि वैदिक शक्तिपीठ को लेकर मंदिर के पुजारी उमेंद्र पुरी ने बताया कि यह स्थान 108 सिद्धपीठों में 15वें सिद्धपीठ के रूप में वर्णित है. उनके अनुसार इस शक्तिपीठ का संबंध माता सती के मणिबंध (कलाई) से जुड़ा माना जाता है और यहां मां भगवती के साथ गायत्री, शिव-सती, महाकाली, चामुंडा, अंबालिका तथा गौरी-गणेश सहित कई दिव्य स्वरूपों का आध्यात्मिक निवास माना जाता है.
पुजारी उमेंद्र पुरी ने आगे बताया कि प्राचीन समय में माता का मूल स्वरूप पर्वत शिखर पर विराजमान था. एक वृद्ध भक्त की प्रार्थना पर माता ने जनसामान्य के सुगम दर्शन के लिए तलहटी में विराजने का संकल्प लिया. इसी कालखंड में ब्रह्माजी के यज्ञ और भगवान शिव की सहभागिता से जुड़ी घटनाओं के कारण माता सती के कलाई स्वरूप तथा गायत्री माता के प्राकट्य की मान्यता इस पीठ से जुड़ गई.
जर्जर अवस्था में है यह शक्तिपीठ
उन्होंने आगे कहा कि वर्षों पुराना यह शक्तिपीठ आज भी अपेक्षित पहचान नहीं पा सका है. मंदिर परिसर में कई निर्माण कार्य जारी हैं, लेकिन मुख्य शिखर पर अब तक ध्वजा स्थापित नहीं हो सकी है. उनका कहना है कि जनजागरण और श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर का संरक्षण और विकास किया जा सकता है.
भक्तों से सहयोग की अपील
उमेंद्र पुरी ने बताया कि वे वर्ष 2007 से इस शक्तिपीठ की सेवा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मंदिर में संत निवास, भक्त निवास, छात्रावास और गौशाला बनाने की योजना है. उन्होंने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि पुराणों में वर्णित इस शक्तिपीठ की महिमा अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे, ताकि पुष्कर आने वाले श्रद्धालु माता के दर्शन और आशीर्वाद से वंचित न रहें.
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