इंडी वाले प्लान बनाकर बैठे हैं कि इलेक्शन कमीशन वाले मामले में सड़कों पर उतरेंगे. रैलियां करेंगे. प्रोटेस्ट मार्च करेंगे. शुक्रवार (02 अक्टूबर 2026) से ये लोग मोर्चा भी खोलने जा रहे हैं. सड़क पर उतरने जा रहे हैं. कॉकरोच पार्टी वाले अलग मोर्चा खोले हुए हैं. उधर आज भी राहुल गांधी ने इसी पर माहौल बनाया और ये पूछा कि नए वोटर को जोड़ने वाले फॉर्म 6 में बदलाव कर दिया गया. ये बदलाव किसके आदेश पर हुआ. लेकिन असली बात तो ये है कि माहौल कितना भी बना लो, असली टेस्ट तो इलेक्शन में ही होता है. और वहां इनका हाल ये है कि आपस में ही कोई बॉन्डिंग नहीं दिखती. आप देख लीजिए कि आगे यूपी और पंजाब में इलेक्शन होने हैं, वहां पर इंडी वालों का क्या हाल हो रखा है.
यूपी में ऐसी मार मची है कि कांग्रेस वाले अखिलेश से 150 सीटें मांग रहे हैं, उधर सपा वाले कह रहे हैं कि कांग्रेस को 50 सीट से ज्यादा देना पैरों पर कुल्हाड़ी मारना होगा. 50 सीट से ज्यादा कांग्रेस को देना भी नहीं चाहिए क्योंकि इनके पास ना काडर है, ना कैंडिडेट है. अभी सीटें ले लेंगे बाद में कैंडिडेट भी सपा वालों से ही मांगेंगे.
उधर यूपी में ऐसा हाल देखकर केजरीवाल की पार्टी अलग मजे ले रही है वो कह रहे हैं कि समझ में नहीं आ रहा कि कांग्रेस वाले बीजेपी से लड़ रहे हैं या समाजवादी पार्टी से लड़ रहे हैं. आज हम इसके बारे में आपको डिटेल में बताएंगे. और आपको ये भी बताएंगे कि इधर कांग्रेस से सीटों पर अखिलेश उलझे हैं, उधर राज्यसभा की तीसरी सीट ने भी फंसा रखा है
या फिर मुस्लिम सिर्फ वोटबैंक बना रहेगा और दरी बिछाने का ही काम करेगा. अखिलेश यादव कह तो रहे हैं कि तीसरी सीट पर कैंडिडेट जरूर देंगे लेकिन ये कैंडिडेट मुस्लिम होगा या कोई और होगा. इस पर अभी सस्पेंस है. इसी की उलझन में अखिलेश फंसे है. क्योंकि ये तीसरा कैंडिडेट अगर कोई भी हो, उसके जीतने के चांस बहुत कम है
इंडी वाले ने बैठक में ही ऐलान किया था कि वे ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ मार्च निकालेंगे. 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेव डेमोक्रेसी वीक’ मनाएंगे.
SIR और EVM को लेकर ये प्रदर्शन करने वाले हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं.
इधर दिल्ली में वही लोग फिर से सड़कों पर उतर चुके हैं जिन्होंने जंतर मंतर पर गदर काटा था. शुक्रवार फिर ये लोग जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट करेंगे.
इंडी के साथ साथ कॉकरोच पार्टी वालों ने भी मोर्चा खोल रखा है. कॉकरोच पार्टी वाले शुक्रवार मुंबई में शिवाजी पार्क से मार्च निकालने वाले हैं. लेकिन उससे पहले क्या क्या ये लोग कह रहे हैं, वो सुन लीजिए
- राहुल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ऑनलाइन फॉर्म-6 में अवैध रूप से बदलाव किया गया, जैसा कि चुनाव आयोग के आयुक्तों ने खुद दर्ज किया है.
- चुनाव आयोग में किसने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को यह बदलाव करने का आदेश दिया?
- राहुल ने पूछा कि TCS में किसने इसपर हस्ताक्षर किए? और क्या उन पर ऐसा करने के लिए दबाव डाला गया था?
फॉर्म-6 के बारे में राहुल गांधी जो बातें कर रहे हैं, उस पर तो सीधी बात ये है कि जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां पर फॉर्म 6 से एक्सट्रा जानकारी लेने की बात हटा ली गई है. SIR इसलिए हो रहा था कि ज्यादा जानकारी वोटर के बारे में पता चले इसलिए फॉर्म-6 में एक्सट्रा जानकारी मांगी गई थी. अब जहां SIR पूरा हो गया वहां से ये बदलाव कर दिया गया.
आप देखिए कि इन सब के बीच उधर गोवा में SIR में फंसे 97 वोटरों का मामला निपट चुका. चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से जिन 97 लोगों को तार्किक विसंगति का नोटिस भेजा था, उसमें अब नया अपडेट सामने आ गया है.
- गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, कुल 97 में से 88 लोगों ने वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए Form-6 की प्रक्रिया पूरी कर ली है.
- इससे पहले 26 सितंबर तक 81 लोगों ने Form-6 भरा था. अब 7 और लोगों ने आवेदन कर दिया है.
- बाकी 9 लोगों में से 3 लोगों के पास पुर्तगाली पासपोर्ट होने की जानकारी सामने आई है. यानी वो पुर्तगाली नागरिक हो सकते हैं.
- जबकि बाकी 6 लोग फिलहाल भारत से बाहर रह रहे हैं और चुनाव अधिकारी उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं.
यानी कि कुल 97 मामलों में अब स्थिति साफ है. 88 लोगों ने Form-6 भर दिया है. 3 के पास पुर्तगाल का पासपोर्ट मिला है. और बाकी के 6 लोग विदेश में हैं.
यानी आप देखिए कि अगर कही कोई शिकायत सामने आती है तो उनका निपटारा किया जा रहा है लेकिन इंडी वाले इसी को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं. इन्होंने पूरी प्लानिंग कर ली है. लेकिन सवाल है कि सिर्फ रोड पर उतरने से क्या होगा. असली टेस्ट तो इलेक्शन में होता है और वहां इनकी गाड़ी डिसबैलेंस हो जाती है.
यूपी में चुनाव होने वाला है. वहां समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की बॉन्डिंग कुछ सही नहीं लग रही है. सीट बंटवारे को लेकर दोनों में तनातनी चल रही है. कांग्रेस 150 सीटों की डिमांड कर रही है. जबकि अखिलेश की पार्टी उतना भाव देने के मूड में नहीं है.
कांग्रेस वाले अखिलेश से 150 सीटें मांग रहे तो समाजवादी पार्टी के नेता ये कह रहे कि 50 सीट से ज्यादा कांग्रेस को नहीं देंगे. क्योंकि यूपी में कांग्रेस के पास ना काडर है, ना कैंडिडेट. ये बयान सुनिए.
इंडी वाले आपस में भिड़ गए हैं. अब इसपर केजरीवाल की पार्टी मजे ले रही है. आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ये कह रहे कि राहुल की पार्टी ने अखिलेश को तंग कर के रख दिया है. समझ ही नहीं आ रहा कि कांग्रेस BJP से लड़ रही है कि समाजवादी पार्टी के खिलाफ है.
इंडी वालों के बीच आपस में ही घमासान मचा हुआ है. ये एकजुट होने की बात कह रहे लेकिन बिखरते ही जा रहे हैं. इंडी गठबंधन से DMK के अलग होने पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है.
- कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने कहा कि गठबंधन छोड़ने पर DMK को पछतावा होगा.
- गठबंधन मजबूत है, जिन लोगों ने गठबंधन छोड़ा है, उन्हें अपनी गलती पर पछताना पड़ेगा.
- उन्होंने तंज कसा कि DMK संसद में BJP के बगल में बैठना चाहती थी. इसलिए वे गठबंधन से बाहर निकल गए.
- DMK सांसद एमके कनिमोझी ने तीसरा मोर्चा बनाने के लिए जिनके भी दरवाजे खटखटाए, वे सब बंद मिले.
यानी ये सब एक दूसरे पर ही अटैक कर रहे हैं. इनसब के बीच यूपी में राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के तीसरे कैंडिडेट के लिए अलग ही खिचड़ी पक रही है. संख्या बल के हिसाब से समाजवादी पार्टी मात्र 2 ही उम्मीदवार को जिताने की स्थिति में है लेकिन अखिलेश ने तीसरे कैडिंडेट को उतारने का दावा कर दिया है.
अखिलेश ये कह रहे हैं कि जिसकी संख्या ज्यादा है उसको मौका मिलना चाहिए. आप भी अखिलेश यादव को सुनिए
अखिलेश यादव, SP : लोकतंत्र में नीयत तो ये होनी चाहिए कि जिसकी संख्या ज्यादा है उसको मौका मिलना चाहिए. लोकतंत्र में बेईमानी नहीं होनी चाहिए. BJP की बेईमानी पिछली बार नहीं होती तो समाजवादी पार्टी के 3 राज्यसभा सांसद गए होते. लोकतंत्र में ये मर्यादाएं होनी चाहिए.
आंकड़े यही बता रहे कि अखिलेश के तीसरे कैंडिडेट को जिताने के लिए क्रास वोटिंग ही एक तरीका हो सकता है. क्योंकि ऐसे तो नंबर नहीं है.
उधर अखिलेश इस बात पर भी फंसे हैं अगर वो तीसरा कैंडिडेट उतारेंगे तो वो कैंडिडेट क्या मुस्लिम होगा. अखिलेश पर प्रेशर बन रहा है. क्योंकि असदुद्दीन औवैसी की पार्टी ने अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. AIMIM ने निशाना साधा कि BJP नेता के रिश्तेदार समाजवादी पार्टी से राज्यसभा जाएंगे और मुसलमान क्या सिर्फ दरी बिछाएंगे.
- ओवैसी की पार्टी ने हमला बोला कि समाजवादी पार्टी का नया नारा बन चुका है, ‘मुसलमानों को BJP का डर दिखाकर वोट लो और राज्यसभा में BJP नेताओं के परिवारों को जगह दो.’
- AIMIM ने पूछा कि क्या मुसलमान सिर्फ समाजवादी पार्टी को वोट देने के लिए ही हैं?
- AIMIM ने तंज कसा कि मुसलमान BJP के खिलाफ समाजवादी पार्टी को वोट देते हैं, लेकिन जब राज्यसभा भेजने की बात आती है तो समाजवादी पार्टी BJP समर्थित परिवारों को मौका देती है.
- क्या समाजवादी पार्टी के मुस्लिम नेता केवल पार्टी में दरी बिछाने के लिए ही रह गए हैं?
इधर ये सब चल रहा, उधर पंजाब कांग्रेस में अलग ही कलह मची हुई है.
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने आज प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. राजा वडिंग ने अप्रैल 2022 में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला था. आज उन्होंने इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर अपना बायो भी चेंज कर लिया और नाम के नीचे पंजाब कांग्रेस का पूर्व अध्यक्ष लिख दिया.
पंजाब कांग्रेस में यह बड़ा बदलाव विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ है. पिछले दिनों पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट ने वहां गए थे. इन्होंने पंजाब कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया था. अंदरूनी कलह कई दिनों से चल रही है. हाईकमान को इसकी खबर थी. क्योंकि पार्टी के भीतर ही बवाल मचा हुआ था.
बताया जा रहा है कि सचिन पायलट ने जब कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया था. तब चन्नी खेमे के कई नेताओं ने राजा वडिंग को अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी. लेकिन हाईकमान ने वडिंग को पद पर बनाए रखा. हालांकि चन्नी को चुनाव अभियान समिति का चेयरमैन बना दिया. लेकिन इससे भी दोनों खेमों के बीच मतभेद खत्म नहीं हुए.
चन्नी समर्थक नेताओं में सुखजिंदर सिंह रंधावा और शेर सिंह घुबाया जैसे नेता वडिंग के नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे. इसके बाद संगठनात्मक समीक्षा हुई और आज राजा वडिंग ने आज प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया.
इसी के साथ पंजाब में चर्चा शुरू हो गई है कि पार्टी का नया अध्यक्ष कौन होगा. विजय इंदर सिंगला का नाम रेस में सबसे आगे चल रहा है.

