कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर पार्टी लाइन से अलग जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करने के कारण चर्चा में हैं. रामनाथ गोयनका लेक्चर में पीएम मोदी के भाषण को उन्होंने ‘आर्थिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक आह्वान’ करार दिया और यह भी कहा कि तेज़ बुखार और खांसी के बावजूद वह उन्हें सुनने पहुंचे, क्योंकि यह भाषण भारत की विकास-यात्रा और उसकी ‘रचनात्मक बेचैनी’ पर आधारित था.
थरूर ने पीएम मोदी के उस संदेश की सराहना की जिसमें उन्होंने उपनिवेशकालीन मानसिकता से बाहर निकलने और भारत की भाषाई-ज्ञान परंपराओं को नई ऊर्जा देने की बात कही. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का संबोधन यह विश्वास जगाता है कि भारत अब सिर्फ एक उभरता बाज़ार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक ‘इमर्जिंग मॉडल’ बनकर उभर रहा है.
क्या कह रहे कांग्रेस नेता?
हालांकि शशि थरूर ने जिस तरह से पीएम मोदी की तारीफ की है, वो कांग्रेस को रास नहीं आ रही. कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने थरूर के ट्वीट को ‘निराधार’ और ‘बेमानी’ बताया. उनका कहना था कि प्रधानमंत्री को स्वतंत्र पत्रकारिता पर उठ रहे सवालों का जवाब देना चाहिए था, लेकिन भाषण में ऐसी कोई आत्म-आलोचना देखने को नहीं मिली. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘मुझे (पीएम मोदी के) भाषण में तारीफ़ के लायक कुछ नहीं लगा. मुझे लगता है कि पीएम को कई बातों का जवाब देना चाहिए. वह एक अखबार के कार्यक्रम में थे. उन्हें हमें बताना चाहिए कि निष्पक्ष पत्रकारिता से उन्हें क्या दिक्कत है. उन्हें हमें बताना चाहिए था कि वह सच दिखाने और बोलने वालों से खुश क्यों नहीं हैं… इसलिए, मुझे उनकी सराहना करने का कोई कारण नहीं दिखा. मुझे नहीं पता कि उन्हें (शशि थरूर को) यह कैसे मिल गया… मुझे यह एक तुच्छ भाषण लगा. उन्होंने वहां भी कांग्रेस की आलोचना की. पीएम दिन-रात कांग्रेस के बारे में सोचते हैं. यह आश्चर्यजनक है.’
कांग्रेस के भीतर कई दूसरे नेता भी थरूर के इस रुख से नाराज़ हैं. संदीप दीक्षित ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि थरूर अगर शिष्टाचार में तारीफ कर दें तो ठीक, लेकिन नीति पर कैसे कर सकते हैं? आप कांग्रेस की विचारधारा के साथ हैं तो बीजेपी की विचारधारा से कोई मेल नहीं. हमारे और बीजेपी के बीच दक्षिण और उत्तर का मामला है.’
इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘शशि थरूर को कांग्रेस की तारीफ करते तो देखा नहीं मैंने पंडित नेहरू की आलोचना ही करते हैं वह. तो मुझे लगता है कि आप कांग्रेस में इसलिए हो कि संसद का टिकट मिल गया है. यह तो ढकोसला है कि आप टिकट के लिए हैं यहां. अगर आप कांग्रेस की विपरीत विचारधारा के साथ खड़े हैं तो कांग्रेस में रहना कम से कम आपके लिए उचित नहीं है.’
थरूर पर क्यों कोई एक्शन नहीं ले रही कांग्रेस?
तो शशि थरूर को लेकर कांग्रेस के भीतर एक बड़ा तूफान चल रहा है. सूत्र बताते हैं कि स्थानीय इकाई उन्हें नोटिस भेज चुकी है. लेकिन कांग्रेस आला कमान उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई करने के पक्ष में नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस आला कमान चाहता है कि शशि थरूर को बेवजह की सहानुभूति न मिले. पार्टी उनके अगले कदम का इंतज़ार कर रही है. पार्टी अभी भी थरूर को कांग्रेस नेता ही मानती है. पार्टी उन्हें राजनीतिक शहीद के रूप में नहीं पेश करना चाहती. आपको बता दें, कि ये कोई पहला मौका नहीं है, जब शशि थरूर ने इस तरह पीएम मोदी की खुलकर तारीफ की है. इससे पहले भी बीते कुछ सालों से शशि थरूर पार्टी लाइन के इतर पीएम मोदी की अलग अलग मंचों से सराहना कर चुके हैं. उनकी नीतियों की तारीफ कर चुके हैं.
इस पूरे विवाद का राजनीतिक असर भी दिखने लगा है. सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस की केरल यूनिट थरूर को नोटिस भेज चुकी है. लेकिन कांग्रेस आलाकमान उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई करने के पक्ष में नहीं है. ऐसा इसलिए कि कांग्रेस आलाकमान चाहता है कि शशि थरूर को बेवजह की सहानुभूति न मिले. पार्टी उनके अगले कदम का इंतज़ार कर रही है.
कांग्रेस कमान का मानना है कि किसी बड़े कदम से थरूर राजनीतिक शहीद बन सकते हैं, जिससे नुकसान पार्टी को ही होगा. इसलिए फिलहाल नेतृत्व उनका अगला कदम देखने की रणनीति पर काम कर रहा है. पार्टी का यह भी मानना है कि थरूर भले ही बार-बार लाइन तोड़ते हों, लेकिन अभी भी वह कांग्रेस के ही नेता हैं और कोई भी निर्णय जल्दबाज़ी में नहीं लिया जाना चाहिए.
शशि थरूर की तरफ से पीएम मोदी की तारीफ कोई नई बात नहीं है. बीते वर्षों में भी वह कई मौकों पर पीएम की नीतियों और भाषणों की खुलेआम सराहना कर चुके हैं. पार्टी के भीतर यह बात लंबे समय से खटकती रही है. उन पर आरोप लगता रहा है कि वह कार्यक्रमों में जाकर पार्टी लाइन तोड़ते हैं, आंतरिक बैठकों में अनुपस्थित रहते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा व विदेश नीति जैसे मुद्दों पर अक्सर पार्टी से अलग बयान देते हैं. केरल कांग्रेस की इकाई भी सार्वजनिक तौर पर कह चुकी है कि थरूर के विचार कई बार कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से मेल नहीं खाते. इमरजेंसी, वंशवाद और भाजपा नेताओं के साथ उनके लगातार सौहार्दपूर्ण व्यवहार जैसे मुद्दों ने कई बार पार्टी में असहजता बढ़ाई है.
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि थरूर की यह बार-बार की प्रधानमंत्री प्रशंसा क्या किसी बड़े राजनीतिक फैसले की भूमिका है? क्या वह अपनी भविष्य की राजनीतिक राह तय करने की तैयारी कर रहे हैं? या फिर यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक शैली है, जो कांग्रेस नेतृत्व को चुनौती दे रही है? जबकि पार्टी अंदरखाने उन्हें समझाने की कोशिश कर रही है, उनके ताज़ा ट्वीट ने एक बार फिर पार्टी को असहज कर दिया है.
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाएं साफ दिखा रही हैं कि पार्टी के भीतर थरूर को लेकर धैर्य की सीमा लगातार घटती जा रही है. वहीं थरूर की चुप्पी और पीएम मोदी की लगातार तारीफें इस अटकल को और हवा दे रही हैं कि जल्द ही वह कोई ‘फाइनल फैसला’ ले सकते हैं… चाहे वह कांग्रेस के भीतर अपनी भूमिका तय करना हो या राजनीतिक रूप से कोई नया रास्ता चुनना हो.

