बेसिक शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक शुमायला खान ने फर्जी निवास प्रमाणपत्र के जरिये सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल कर ली थी। वह प्राथमिक विद्यालय माधोपुर में 2015 से कार्यरत थी। उसकी नागरिकता को लेकर की गई एक शिकायत पर उसके प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया था। एसडीएम सदर ने इसकी जांच की थी।
उसके प्रमाण पत्र रामपुर जिले से बने थे। एसडीएम रामपुर की जांच में साफ हुआ कि शुमायला का निवास प्रमाणपत्र त्रुटिपूर्ण है। उसे बनवाने में जानकारी छिपाई गई है। शुमायला खान का निवास प्रमाणपत्र 2024 में निरस्त कर दिया गया था। बेसिक शिक्षा विभाग से मांगे गए स्पष्टीकरण पर वह प्रमाणपत्र की सत्यता साबित नहीं कर पाई थी। जिसके कारण बीएसए ने 3 अक्टूबर 2024 को शुमायला खान को निलंबित कर दिया था।
चार दिन पहले उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। बीएसए संजय सिंह के निर्देश पर फतेहगंज पश्चिमी के खंड शिक्षा अधिकारी भानु शंकर गंगवार ने ने उसके खिलाफ एफआईआऱ भी लिखआ दी थी। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। दरअसल, बेसिक शिक्षा विभाग शुमायला से वेतन, भत्ते समेत वर्ष 2016-17 और 2020-21 में मिले बोनस की रकम को वसूलेगी।
दरअसल, माहिरा खान का जन्म पाकिस्तान में हुआ था। उनका विवाह 17 जून 1979 को पाकिस्तान के लाहौर में सिगबत अली से हुआ था। शादी के तीन साल बाद माहिरा ने अपने पति को छोड़ दिया। अपने दोनों बच्चों शुमायला और आलिमा के साथ भारत के रामपुर आ गईं। इस समय उनके पास पाकिस्तान का नागरिकता प्रमाण पत्र था।
माहिरा को भारत में आने के बाद भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं हुई। माहिरा खान ने भारत में आकर अपने और अपनी बेटियों के लिए कई दस्तावेज बनवाए। शुमायला ने भारतीय दस्तावेज प्राप्त करने के लिए अपने जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया, जिसे उसकी मां ने बनवाया था।

