सड़क किनारे खड़े ट्रक का पंक्चर ठीक करते समय बस की टक्कर से ड्राइवर की हुई मौत के मामले में बड़ा फैसला आया है. दिल्ली के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने इस मामले में मृत चालक के परिवार को सवा 25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. यह हादसा अप्रैल 2022 में हुआ था. अधिकरण ने इस हादसे के लिए बस की तेज रफ्तार और ड्राइवर की लापरवाही को जिम्मेदार माना है. साथ ही, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSCRTC) को मुआवजे की रकम पर ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया है.
पीठासीन अधिकारी विक्रम ने मृतक के परिवार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. 10 अक्टूबर को जारी आदेश में अधिकरण ने कहा कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदार बस चालक की लापरवाही साफ है. अधिकरण ने निगम को 23 नवंबर 2023 से मुआवजे की रकम जमा करने तक 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का भी निर्देश दिया है.
पंक्चर ठीक करते समय हुआ था हादसा
यह दुर्घटना 28 अप्रैल 2022 को उत्तम शुगर मिल के पास हुई थी. उस्मान नाम के ट्रक चालक ने अपने ट्रक को सड़क किनारे खड़ा किया था और उसका पंक्चर ठीक कर रहा था. इसी दौरान एक तेज रफ्तार बस ने उसे टक्कर मार दी थी. इस हादसे में उस्मान गंभीर रूप से घायल हो गया. उस्मान को पहले रुड़की के एक अस्पताल ले जाया गया. इसके बाद उसे मुजफ्फरनगर के सरकारी अस्पताल भेजा गया, जहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. हादसे के बाद मृतक के परिवार ने मुआवजे के लिए अधिकरण का दरवाजा खटखटाया था.
चश्मदीदों की गवाही बनी अहम आधार
मामले की सुनवाई के दौरान अधिकरण ने हादसे के चश्मदीद संदीप की गवाही पर भरोसा किया. संदीप दुर्घटनास्थल के पास टायर पंक्चर ठीक करने की दुकान चलाता था. उसने बताया कि उसने अपनी आंखों से देखा था कि जब उस्मान ट्रक का पंक्चर ठीक कर रहा था, तभी बस ने उसे टक्कर मार दी.
अधिकरण ने यह भी ध्यान दिया कि बस चालक ने अपने हलफनामे में स्वीकार किया था कि हादसे के समय उस्मान ट्रक का पंक्चर ठीक कर रहा था. यह कबूलनामा बचाव पक्ष के उस तर्क के उलट था कि दुर्घटना ट्रक चालक की लापरवाही के कारण हुई.
इन तथ्यों के आधार पर अधिकरण ने माना कि हादसा बस चालक की लापरवाही के कारण हुआ था. उसने कहा कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदार चालक की गलती स्पष्ट रूप से सामने आती है.
कैसे तय हुआ सवा 25 लाख रुपये का मुआवजा?
अधिकरण ने मृतक की आय तय करने के लिए उत्तर प्रदेश में कुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित न्यूनतम मजदूरी को आधार बनाया. इसके मुताबिक, उस्मान की मासिक आय 11,743 रुपये मानी गई. इसके बाद मुआवजे की अलग-अलग मदों को ध्यान में रखते हुए कुल सवा 25 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई.
अधिकरण ने इस रकम का भुगतान करने की जिम्मेदारी यूपीएसआरटीसी पर डाली. इसकी वजह यह थी कि दुर्घटना में शामिल बस का मालिकाना हक और संचालन निगम के पास था. साथ ही, रिकॉर्ड में दुर्घटना की तारीख पर बस को कवर करने वाली किसी बीमा पॉलिसी का प्रमाण नहीं मिला.
30 दिन में जमा करनी होगी रकम
अधिकरण ने यूपीएसआरटीसी को 30 दिन के भीतर मुआवजे की राशि जमा करने का निर्देश दिया है. निगम को 23 नवंबर 2023 से भुगतान होने तक 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा. यदि निगम तय समय में रकम जमा नहीं करता है, तो देरी की अवधि के लिए उसे 10 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा.
इस आदेश के तहत मृतक के परिवार को मुआवजे के रूप में 25.25 लाख रुपये मिलने हैं. अधिकरण ने अपने फैसले में प्रत्यक्षदर्शी की गवाही, बस चालक के बयान और दुर्घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को ध्यान में रखते हुए बस चालक की लापरवाही को हादसे की वजह माना.

