तकनीकी विशेषताएं
- प्रत्येक MRTT विमान में दो जनरल इलेक्ट्रिक CF6-80C2 या समकक्ष टर्बोफैन इंजन लगे होंगे, जो लगभग 60,200 पाउंड (करीब 268 किलो न्यूटन) का थ्रस्ट प्रदान करते हैं.
- इसका अधिकतम टेक-ऑफ वजन लगभग 1,86,000 किलोग्राम होगा और यह 72,500 से 90,700 किलोग्राम तक ईंधन हस्तांतरित करने में सक्षम होगा.
- ये विमान मैक 0.80 (करीब 851 किमी/घंटा) की गति से उड़ान भर सकते हैं और इनकी फेरी रेंज 11,000 किलोमीटर से अधिक होगी. यह क्षमता मौजूदा Il-78 विमानों की तुलना में कहीं अधिक है.
- अंडरविंग पॉड्स के जरिए ये प्रोब-एंड-ड्रोग और बूम दोनों प्रकार की रिफ्यूलिंग सपोर्ट कर सकते हैं.
बोइंग 767 बेस्ड प्लेटफॉर्म
सेलेक्टेड MRTT प्लेटफॉर्म बोइंग 767 यात्री विमान के परिवर्तित संस्करण (Transformed Version) पर आधारित है, जिसे आधुनिक सैन्य आवश्यकताओं के अनुसार बदला गया है. ‘इंडियन डिफेंस न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह विमान अधिक ईंधन वहन क्षमता, बेहतर उड़ान सहनशीलता और आधुनिक प्रोब-एंड-ड्रोग रिफ्यूलिंग सिस्टम के साथ आएगा, जो भारतीय वायुसेना के अधिकांश लड़ाकू विमानों के अनुकूल है. इस सौदे में HAL की भागीदारी इसे रणनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण बनाती है. HAL न केवल विमानों में भारतीय प्रणालियों के एकीकरण में सहयोग करेगा, बल्कि देश के भीतर मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) ढांचे के विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा. इससे आयातित स्पेयर पार्ट्स पर निर्भरता घटेगी और विमान उपलब्धता में सुधार होगा. यह पहल सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अनुरूप है, जिसके तहत रक्षा उत्पादन और रखरखाव में स्वदेशी क्षमता को बढ़ावा दिया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि HAL और IAI की साझेदारी से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भविष्य में निर्यात की संभावनाएं भी खुल सकती हैं.
लंबी दूरी के अभियानों में नई ताकत
एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान किसी भी आधुनिक वायु सेना के लिए फोर्स मल्टीप्लायर माने जाते हैं. ये विमानों को बिना फॉरवर्ड बेस पर उतरे लंबी दूरी तक मिशन पूरा करने में सक्षम बनाते हैं. भारत जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र और विविध समुद्री सीमाओं वाले देश के लिए यह क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण है. हाल के वर्षों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. चीन की बढ़ती समुद्री और हवाई गतिविधियों तथा पाकिस्तान के साथ संभावित तनावों के बीच इंडियन एयरफोर्स को अपनी ऑपरेशनल पहुंच को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस हो रही थी. MRTT विमानों की तैनाती से भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में सतत निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और दूरस्थ अभियानों में बढ़त मिलेगी.
Multirole Tanker Transport Aircraft: एक्सटेंडेड मिशन पर निकले राफेल, Su-30MKI और तेजस जैसे फाइटर जेट को फ्लाइट के दौरान ही सपोर्ट मिल सकेगा. (फाइल फोटो/Reuters)
ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख
पिछले वर्ष हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान एयरफोर्स को सीमा पार अभियानों में ईंधन आपूर्ति से जुड़ी सीमाओं का सामना करना पड़ा था. रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस अनुभव ने नीति-निर्माताओं को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया और एयर रिफ्यूलिंग क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया गया. MRTT विमानों के शामिल होने से राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान लंबी दूरी की सटीक हथियार प्रणालियों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगे. वहीं, Su-30MKI फाइटर जेट को अधिक समय तक हवा में बने रहने और गश्त करने की क्षमता मिलेगी, जबकि तेजस जैसे हल्के लड़ाकू विमानों की सामरिक लचीलापन भी बढ़ेगा. भूराजनीतिक दृष्टि से यह सौदा भारत की स्थिति को और सुदृढ़ करता है. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ जारी तनाव और पाकिस्तान के साथ संभावित संघर्ष परिदृश्यों में विस्तारित हवाई पहुंच भारत की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगी. हिंद महासागर क्षेत्र में यह कदम भारत को समुद्री शक्ति संतुलन में अग्रणी भूमिका निभाने में मदद करेगा.
चीन से सीधा मुकाबला
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सौदा क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने की भारत की नीति के अनुरूप भी है. चीन की बढ़ती टैंकर क्षमता, विशेषकर उसके H-6U बेड़े के विस्तार के बीच भारतीय MRTT विमानों की तैनाती एक प्रभावी संतुलन स्थापित करेगी. नए विमानों की तैनाती के साथ भारतीय वायु सेना के पायलटों और ग्राउंड स्टाफ के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी बदलाव किया जाएगा. IAI के साथ सिम्युलेटर अनुबंधों के माध्यम से क्रू को बूम ऑपरेशन, मल्टी-पॉइंट रिफ्यूलिंग और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर में दक्ष बनाया जाएगा. लागत के लिहाज से भी यह सौदा अपेक्षाकृत किफायती माना जा रहा है. छह विमानों के लिए 1.1 अरब डॉलर की कीमत प्रति विमान लागत को यूरोपीय A330 MRTT जैसे नए प्लेटफॉर्म की तुलना में कम रखती है. गवन्रमेंट-टू-गवर्नमेंट रूट से किए गए इस समझौते से लंबी निविदा प्रक्रिया से बचते हुए त्वरित मंजूरी सुनिश्चित की गई है.
स्क्वाड्रन कमी में राहत
भारतीय वायु सेना वर्तमान में स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही है, जहां स्वीकृत 30 स्क्वाड्रनों के मुकाबले केवल 18 सक्रिय स्क्वाड्रन हैं. MRTT विमानों के आने से मौजूदा लड़ाकू विमानों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, जिससे कम संसाधनों के बावजूद अधिक मिशन आउटपुट हासिल किया जा सकेगा. इससे स्वदेशी उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) जैसे भविष्य के प्लेटफॉर्म के विकास और तैनाती तक समय भी मिलेगा. छह MRTT विमानों की यह खरीद भारतीय वायु सेना के लिए केवल पुराने प्लेटफॉर्म का प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक छलांग है. यह सौदा न केवल परिचालन क्षमता, उड़ान सहनशीलता और मिशन लचीलापन बढ़ाएगा, बल्कि आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन, क्षेत्रीय संतुलन और दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को भी मजबूती प्रदान करेगा. बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में यह कदम भारत की वायु शक्ति को नई परिभाषा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है.

