नए साल के जश्न में नाच गाना और शोर शराबा करना और हुड़दंग मचाना, शराब पीना, जुआ खेलना ये तमाम काम शरीयत-ए-इस्लामिया में नाजायज और हराम करार दिए हैं। जो भी मुसलमान इस तरह के काम करता हुआ पाया जाएगा या किसी तरह से उसका इसमें अमल-दखल होगा तो गोया कि वो शरीयत की रोशनी में मुजरिम है और शरीयत के खिलाफ काम कर रहा है। ये सख्त गुनाह है और नाजायज है।
मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी
मौलाना ने कहा, ‘क्योंकि नए साल से ईसाईयों का नया साल यानी अंग्रेजी साल शुरू होता है। यह इसाइयों को मजहबी प्रोग्राम है। ऐसे में किसी भी गैर-मज़हबी प्रथाओं को मनाना मुसलमानों के लिए सख्त नाजायज है।’ उन्होंने कहा कि नए लड़के और लड़कियों को ये हिदायत दी गई है कि नए साल का जश्न न मनाएं। मुसलमानों को नए साल का जश्न मनाने से बचना चाहिए। ये शरीयत की रोशनी में नाजायज है। जो लोग मनाते हैं वो गुनहगार होंगे।
मौलाना ने कहा, ‘नए साल के जश्न में नाच गाना और शोर शराबा करना और हुड़दंग मचाना, शराब पीना, जुआ खेलना ये तमाम काम शरीयत-ए-इस्लामिया में नाजायज और हराम करार दिए हैं। जो भी मुसलमान इस तरह के काम करता हुआ पाया जाएगा या किसी तरह से उसका इसमें अमल-दखल होगा तो गोया कि वो शरीयत की रोशनी में मुजरिम है और शरीयत के खिलाफ काम कर रहा है। ये सख्त गुनाह है और नाजायज है।’ उन्होंने हिदायत दी कि मुसलमानों को चाहिए कि वो नया साल मनाने से बचें।

