राजधानी दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल में शनिवार रात एक दर्दनाक हादसे ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती एक मरीज के ऊपर अचानक सीलिंग फैन गिर गया. हादसे के करीब तीन घंटे बाद मरीज की मौत हो गई. हालांकि अस्पताल सूत्रों का दावा है कि मरीज की मौत पहले से मौजूद गंभीर बीमारियों के कारण हुई, लेकिन परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.
मृतक की पहचान 42 वर्षीय मोहम्मद अकबर के रूप में हुई है. उन्हें 18 जुलाई को गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल के अनुसार वह हाई ब्लड प्रेशर, मेनिंगोएन्सेफलाइटिस और एस्पिरेशन निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे.
बताया जा रहा है कि शनिवार रात करीब 9:30 बजे इमरजेंसी वार्ड-27 में अचानक छत पर लगा सीलिंग फैन टूटकर सीधे अकबर के बेड पर आ गिरा. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पंखा मरीज के पेट पर गिरा, जिसके बाद अस्पताल कर्मियों ने उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता दी. इसके बावजूद रात करीब 12:16 बजे उनकी मौत हो गई.
अस्पताल का दावा, परिजनों के आरोप
हालांकि अस्पताल का कहना है कि मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत की वजह मरीज की पहले से मौजूद गंभीर चिकित्सीय समस्याओं को बताया गया है. वहीं अस्पताल प्रशासन ने यह भी कहा कि घटना के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) ने क्षतिग्रस्त पंखे की मरम्मत कर दी. अस्पताल का दावा है कि हादसे में एक पुरुष नर्स भी घायल हुआ था और उसे इलाज दिया गया.
हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि नर्स के घायल होने की घटना पुरानी थी और उसका इस हादसे से कोई संबंध नहीं था.
‘मैंने अपनी आंखों से देखा…’
इस घटना के चश्मदीद और पेशे से वकील मोहम्मद असलम कुरैशी ने दावा किया कि वह अपने भाई से मिलने वार्ड में गए थे, तभी उन्होंने पंखे को मरीज पर गिरते देखा. उन्होंने बताया कि उन्होंने घटना का वीडियो भी बनाया है.
उनका आरोप है कि हादसे के बाद डॉक्टरों के पहुंचने में भी देरी हुई. उन्होंने कहा कि वार्ड में कई एयर कंडीशनर खराब पड़े हैं, जिसके कारण मरीज केवल सीलिंग फैन के सहारे हैं. उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर मरीजों की सुरक्षा की अनदेखी करने का आरोप लगाया.
वार्ड की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद वार्ड में मौजूद कई मरीजों के परिजनों ने भी अस्पताल की सुविधाओं पर सवाल खड़े किए. उनका कहना है कि कई एसी या तो बंद पड़े हैं या उनके हिस्से गायब हैं. उमस भरे मौसम में मरीजों को सिर्फ पंखों के भरोसे रखा जा रहा है.
एक अन्य तीमारदार ने आरोप लगाया कि उसके भाई को पहले गलत इंजेक्शन लगाया गया था, जिसे बाद में बदल दिया गया. इन आरोपों के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.
रविवार सुबह मृतक के परिजन अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. उनका कहना है कि यदि अस्पताल में रखरखाव और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो यह हादसा टाला जा सकता था. फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि पूरे मामले की आधिकारिक रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसके बाद ही विस्तृत जानकारी सामने आएगी.

