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Nana Patekar Face Carving: जोधपुर के पांच सितारा होटल द उम्मेद में कार्यरत शेफ हर्षवर्धन सिंह ने तरबूज पर बारीक नक्काशी कर दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर का चेहरा उकेरा है. पांच से छह घंटे की मेहनत से तैयार यह कलाकृति अभिनेता को एक अनूठी श्रद्धांजलि है.
जोधपुर: किसी कलाकार के अभिनय ने बचपन से मन पर ऐसी छाप छोड़ी कि उसे सम्मान देने के लिए एक शेफ ने रसोई में मिलने वाले तरबूज को ही कैनवास बना लिया. जोधपुर के पांच सितारा होटल द उम्मेद में कार्यरत शेफ हर्षवर्धन सिंह ने दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर के प्रति अपने लगाव को अनूठे अंदाज में व्यक्त किया. उन्होंने तरबूज पर बारीक नक्काशी कर अभिनेता का चेहरा उकेरा. इस कलाकृति को तैयार करने में उन्हें करीब पांच से छह घंटे का समय लगा. फल की सतह पर की गई इस नक्काशी में हर्षवर्धन ने अपने हुनर, धैर्य और पसंदीदा अभिनेता के प्रति सम्मान को एक साथ पिरोया. नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी यह कलाकृति अभिनेता को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि बन गई.
शेफ हर्षवर्धन सिंह के अनुसार, वह बचपन से ही नाना पाटेकर के अभिनय के प्रशंसक रहे हैं. उनकी दमदार संवाद अदायगी, किरदारों को निभाने का अलग अंदाज और गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य अभिनय तक सहजता से ढल जाने की क्षमता उन्हें हमेशा प्रभावित करती रही है. हर्षवर्धन के लिए नाना पाटेकर केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि ऐसे कलाकार रहे हैं, जिनकी अदाकारी दर्शकों के मन में गहरी छाप छोड़ती है. उनके अभिनय में भावनाओं की गहराई, संवादों में प्रभाव और किरदारों को जीवंत बनाने की खास शैली देखने को मिलती है. यही वजह है कि हर्षवर्धन ने अपने पसंदीदा अभिनेता को याद करने के लिए कोई सामान्य तरीका चुनने के बजाय अपनी पाक कला के विशेष हुनर का सहारा लिया. तरबूज पर उकेरा गया चेहरा उनके इसी लगाव और सम्मान की अभिव्यक्ति है.
फल पर नक्काशी के हुनर से जताया सम्मान
फल और सब्जियों पर नक्काशी करना पाक कला का एक विशेष हुनर है. इसमें केवल हाथों की सफाई ही नहीं, बल्कि धैर्य, एकाग्रता और बारीकियों को समझने की क्षमता भी जरूरी होती है. तरबूज की सतह पर किसी चेहरे को उभारना और उसकी पहचान को नक्काशी के जरिए सामने लाना आसान काम नहीं है. हर्षवर्धन सिंह ने करीब पांच से छह घंटे तक मेहनत कर इस कलाकृति को आकार दिया. उनकी कोशिश रही कि तरबूज पर उकेरे गए चेहरे में नाना पाटेकर की पहचान और व्यक्तित्व की झलक दिखाई दे.
अभिनेता के प्रति श्रद्धांजलि का माध्यम
इस तरह शेफ ने अपनी रचनात्मकता को अभिनेता के प्रति श्रद्धांजलि का माध्यम बनाया. हर्षवर्धन का मानना है कि नाना पाटेकर जैसे कलाकार सदी में एक बार पैदा होते हैं. उनका अभिनय और सिनेमा में योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा. तरबूज पर बनाई गई यह कलाकृति उनके लिए पसंदीदा अभिनेता की यादों को संजोने और उन्हें अपने हुनर के जरिए भावभीनी श्रद्धांजलि देने का खास प्रयास है.
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मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

