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Zomato New Rule : ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने होटलों के साथ किए करार में से एक खास शर्त को हटा लिया है. कंपनी ने कहा है कि अब होटलों को अपनी मर्जी ये खाने की कीमत तय करने की छूट मिल गई है. अभी तक कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के तहत होटल इस ऐप पर दर्ज कीमत से कम पर अपने प्रोडक्ट नहीं बेच सकते थे और ऐसा करने पर जुर्माना लग सकता था.

जोमैटो और होटलों के बीच करार की एक शर्त अब खत्म हो गई है.
नई दिल्ली. भारत के सबसे बड़ी फूड डिलीवरी ऐप Zomato ने होटलों को सस्ता खाना बेचने की छूट दे दी है. कंपनी ने इन होटलों के साथ किए गए एक कॉन्ट्रैक्ट की शर्त हटाने का फैसला किया है. इस शर्त के मुताबिक, अगर कोई होटल ऐप पर दी गई खाने की कीमत से कम प्राइस पर इसे बेचता था तो उस पर जोमैटो जुर्माना लगा सकता था. वैसे तो ऐप ने कभी इस नियम को लागू नहीं किया लेकिन अब इस प्रावधान को भी कॉन्ट्रैक्ट से हटा लिया गया है.
कंपनी के सूत्रों का कहना है कि जोमैटो का यह प्रावधान होटलों को उनके प्रोडक्ट की कीमतें तय करने से रोकता था और इसका असर उनके कारोबार पर भी पड़ रहा था. अब जोमैटो ने इस प्रावधान को खत्म करने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि अब होटल अपने खाने की कीमत खुद तय कर सकते हैं. अभी तक के नियम के तहत जोमैटो से संबद्ध होटल अपने यहां आने वाले ऑफलाइन ग्राहकों को भी खाने की वही कीमत ऑफर कर सकते थे, जो ऐप पर लिखी होती थी. इससे कम कीमत पर बेचने पर होटल पर जुर्माना लगता था.
जोमैटो के पास कितने होटल
Zomato ऐप पर 2.4 करोड़ ग्राहक और 3 लाख रेस्टोरेंट्स लिस्टेड हैं. फूड डिलीवरी की मांग बढ़ने से कंपनी के शेयर साल 2021 के बाद से दोगुने हो गए हैं और कंपनी की वैल्यू लगभग 26 अरब डॉलर पहुंच गई है. कई सालों से Zomato के कॉन्ट्रैक्ट में ‘चार्जेस फॉर प्राइस डिस्पैरिटी’ नाम की शर्त थी, जिससे अगर रेस्टोरेंट्स के अपने दाम या डिलीवरी के दाम Zomato ऐप पर दिए गए दाम से कम होते तो उन्हें जुर्माना देना पड़ता था.
कंपनी कर सकती थी गुप्त जांच
Zomato के कॉन्ट्रैक्ट में यह भी लिखा था कि कंपनी गुप्त तरीके से किसी भी रेस्टोरेंट का विजिट कर सकती है या अन्य तरीकों से जांच सकती है कि कहीं आउटलेट्स ऐप से सस्ती कीमत तो नहीं दे रहे. यह शर्त कभी लागू नहीं हुई थी लेकिन अब इसे हटा दिया गया है. Domino’s और KFC जैसे ब्रांड्स के साथ भारत में लाखों रेस्टोरेंट्स हैं और देश का 94 अरब डॉलर का फूड सर्विसेज मार्केट साल 2031 तक 153 अरब डॉलर का हो सकता है.
होटल एसोसिएशन ने किया था विरोध
National Restaurant Association of India ने जोमैटो के इस कदम का विरोध किया था, क्योंकि इससे रेस्टोरेंट्स की दाम तय करने की आजादी कम हो जाती थी. संगठन के अध्यक्ष सागर जे. दर्यानी ने बताया कि यह हमारा प्रोडक्ट है और दाम भी हमारा होना चाहिए. हम उनकी गारंटी की सराहना करते हैं कि अब प्राइस पैरिटी लागू नहीं होगी. इससे प्रतिस्पर्धा को नुकसान हो सकता था और रेगुलेटर्स की जांच में आ सकता था.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

