ये था प्रशांत किशोर का आरोप
जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें बेऊर जेल ले गई, जबकि उनके पास कोर्ट का आदेश नहीं था। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?
पटना प्रशासन ने दिया PK के सवाल का जवाब
इसके जवाब में पटना जिला प्रशासन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सफाई दी। प्रशासन ने कहा कि पीके को कोर्ट में भारी भीड़ के कारण बेऊर थाने ले जाया गया था। यह भीड़ नियंत्रण के लिए किया गया था। बेऊर थाने में कोर्ट का लिखित आदेश आने का इंतजार किया जा रहा था। 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर पीके को रिहा किया गया।
PK ने फैलाई अफवाह!
प्रशासन ने पीके के आरोपों को राजनीतिक फायदे के लिए फैलाई गई अफवाह बताया। कहा कि कोर्ट का आदेश मिलने के बाद ही पीके को नियमानुसार रिहा किया गया। पीके ने अपनी रिहाई के बाद मीडिया से सवाल किया था कि उन्हें बिना कागजात के बेऊर कैसे ले जाया गया? इस पर कार्रवाई कौन करेगा?
पुलिस ने जारी किया बयान
पुलिस ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए बयान जारी किया है। उसने बताया कि गिरफ्तार व्यक्ति को निजी मुचलका भरना होता है। चाहे जमानत थाने से मिले या कोर्ट से। पीके को कोर्ट में पेश किया गया था, इसलिए कोर्ट के आदेश के बाद 25,000 रुपये का निजी मुचलका लेकर छोड़ा गया।
इसीलिए हुई थी गिरफ्तारी
पीके BPSC छात्रों के मुद्दे पर अनशन कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया। पहले कोर्ट ने जमानत की शर्त रखी थी कि आगे धरना-प्रदर्शन नहीं करेंगे। पीके ने जेल जाना स्वीकार किया, लेकिन उनके वकीलों ने दोबारा जिरह की। कोर्ट ने फिर धरना-प्रदर्शन वाली शर्त हटा ली। पीके के वकीलों का तर्क था कि लगी हुई धाराओं में थाने से ही जमानत मिल जानी चाहिए थी। कोर्ट ले जाने की जरूरत नहीं थी।

