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नेपाल में बाढ़ और लैंडस्लाइड ने भारी तबाही मचाई है. अब तक 95 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं. इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 390 से ज्यादा भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल हैं. भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में पुल, सड़कें, घर और जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. राहत और बचाव अभियान जारी है. वहीं, नदी के ऊपरी हिस्से में मलबे का एक और अवरोध होने से दूसरी बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है.
नेपाल से तबाही के जो वीडियो सामने आए हैं, उन्हें देखकर आपकी रुह कांप जाएगी.
नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है. अचानक आई बाढ़ और लैंडस्लाइड की वजह से अब तक 95 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 390 से ज्यादा भारतीय तीर्थयात्री और कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. बाढ़ की तेज लहरों में कई पुल, सड़कें, घर, होटल और दूसरी इमारतें बह गईं। कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई है. राहत और बचाव टीमें लगातार लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने में जुटी हैं. हेलीकॉप्टर से फंसे लोगों को निकाला जा रहा है और प्रभावित इलाकों में खाना, पानी और दवाएं पहुंचाई जा रही हैं. इस बीच नदी के ऊपरी हिस्से में मलबा जमा होने की वजह से दूसरी बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है.
नेपाल में आई इस कुदरती आपदा में अब तक 95 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं. लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 390 से ज्यादा भारतीय तीर्थयात्री और कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. अचानक आई बाढ़ की वजह से नदी किनारे रहने वाले लोगों और यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला. लापता लोगों की जानकारी जुटाने के लिए हेल्पलाइन शुरू की गई है. राहत और बचाव टीमें मलबे में लगातार लोगों की तलाश कर रही हैं.
बाढ़ ने नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदी इलाकों में भारी तबाही मचाई है. कम से कम 19 बड़े पुल और 40 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें बह गई हैं. इससे कई इलाकों का दूसरे हिस्सों से संपर्क टूट गया है. करीब 12 बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं भी बाढ़ की चपेट में आकर बंद हो गई हैं. कई घर, होटल और दुकानें भी मलबे में बदल गई हैं. सड़कें टूटने की वजह से राहत सामग्री और भारी मशीनें प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है. प्रशासन के सामने लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है.
शुरुआती जांच में सामने आया है कि ऊंचे पहाड़ी इलाके में 4.4 तीव्रता के भूकंपीय झटकों के बाद बड़ा लैंडस्लाइड हुआ. पहाड़ से भारी मात्रा में मलबा नीचे गिरा और नदी का रास्ता रुक गया. इससे वहां पानी जमा होकर एक बड़ी झील जैसी स्थिति बन गई. पानी का दबाव बढ़ने के बाद यह मलबा अचानक टूट गया और तेज रफ्तार में पानी नीचे की ओर बहने लगा. इसी वजह से निचले इलाकों में अचानक भयंकर बाढ़ आ गई. हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि दर्ज किया गया झटका भूकंप नहीं, बल्कि बड़े लैंडस्लाइड के जमीन से टकराने की वजह से आया था.
नेपाल में पहली बाढ़ के बाद अब दूसरी बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है. भूवैज्ञानिकों और सैटेलाइट से नजर रखने वाली टीमों ने बताया है कि नदी के ऊपरी हिस्से में अभी भी मलबे का कुछ हिस्सा जमा है. इसके पीछे पानी लगातार बढ़ रहा है. अगर यह कमजोर हिस्सा अचानक टूटता है तो फिर तेज रफ्तार से पानी नीचे के इलाकों में पहुंच सकता है. खतरे को देखते हुए नदी के किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट किया गया है. कई इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित और ऊंची जगहों पर भेजा जा रहा है.
बाढ़ के बाद नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों ने मिलकर बचाव अभियान शुरू किया है. अब तक 250 से ज्यादा लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है. घायलों के इलाज के लिए काठमांडू के बड़े अस्पतालों में 100 से ज्यादा बेड तैयार रखे गए हैं. प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमें भेजी जा रही हैं. लोगों तक जरूरी दवाएं, खाना और साफ पानी पहुंचाने का काम भी जारी है. प्रशासन की सबसे बड़ी कोशिश दूर-दराज के इलाकों में फंसे लोगों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाना है.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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