क्यों आई हीरे में मंदी?
हीरे की कीमत कम होने के कई कारण सामने आए हैं। इसमें सबसे पहला कारण है कि लोग इसे अब सुरक्षित निवेश नहीं मानते हैं। सुरक्षित निवेश के मामले में सोना काफी आगे निकल गया है। वहीं रूस-यूक्रेन और इजराइल-ईरान युद्ध के कारण भी लोग निवेश के लिए डायमंड की जगह सोने को तवज्जो दे रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर हीरे की रीसेल वैल्यू बहुत कम होती है। ऐसे में इसे निवेशक के तौर पर रखना घाटे का सौदा माना जाता है। इस कारण भी लोग इसे खरीदने से बच रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका और यूरोप समेत कई देश अभी आर्थिक मंदी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में इन देशों में भी हीरे की मांग में कमी आई है।
47 फीसदी कम हो गई मैन्युफैक्चरिंग
हीरे की बिक्री कम होने के कारण इसकी मैन्युफैक्चरिंग में भी गिरावट आई है। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में पिछले एक साल के मुकाबले इसकी मैन्युफैक्चरिंग में 47 फीसदी की गिरावट आई है। यह 642.3 मिलियन डॉलर रह गया। नवंबर 2023 के बाद से लेकर यह अब तक का सबसे कम कारोबार है।
कारोबार कम होने से व्यापारियों को 10% तक का नुकसान हो रहा है। देश में हीरे का करोबार सबसे ज्यादा गुजरात के सूरत में होता है। यहां हीरे की कटाई और पॉलिश का काम होता है। सूरत की इन फैक्टरियों में करीब 15 लाख लोग काम करते हैं। मंदी के कारण यहां काम करने वाले लोगों को घर चलाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
क्या कीमत में तेजी आएगी?
जानकारों के मुताबिक अभी दुनिया के जो हालात हैं, उस कारण हीरे के कारोबार में मंदी है। आने वाले समय में इसमें बढ़त देखी जा सकती है। जानकार बताते हैं कि भारत से कुल डायमंड का 30 से 40 फीसदी निर्यात अकेले अमेरिका को होता है। अमेरिका अभी मंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में वहां लोग लैबग्रोन डायमंड खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। एक बाद मंदी खत्म हुई तो हीरों की मांग फिर से बढ़ जाएगी।

