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Bihar Exit Poll: बिहार चुनाव 2025 के एग्जिट पोल में एनडीए को पूर्ण बहुमत मिला, अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की रणनीति ने प्रशांत किशोर के जन सुराज के सभी प्लान को कैसे फेल कर दिया? क्या पीके के साथ हो गया खेला?
प्रशांत किशोर को एग्जिट पोल से बड़ी निराशा.Bihar Exit Poll: बिहार चुनाव 2025 के एग्जिट पोल के नतीजे ने एनडीए को पूर्ण बहुमत दिया है. लेकिन चुनाव से ठीक पहले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के सारे प्लान और रणनीति को बीजेपी के ‘चाणक्य’ और गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की रणनीति ने धाराशायी कर दिया. एग्जिट पोल के नतीजे से सभी चुनावी पंडित और जन सुराज के नेता परेशान क्यों हैं? बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का मतदान समाप्त होने के बाद एग्जिट पोल के जो नतीजे सामने आए हैं, उन्होंने पूरे बिहार के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है.
बिहारर चुनाव के अधिकांश एग्जिट पोल एनडीए को पूर्ण बहुमत देते हुए दिखा रहे हैं, जिससे बीजेपी और जेडीयू के खेमे में उत्सव का माहौल है. लेकिन इन नतीजों से सबसे ज्यादा हैरान और परेशान चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) और उनकी पार्टी जन सुराज के नेता हैं. एग्जिट पोल के आंकड़ों ने उनके द्वारा तैयार की गई सभी रणनीतियों और आकलनों को पूरी तरह से झुठला दिया है.
PK का ‘बदलाव का प्लान’ हुआ फेल
प्रशांत किशोर पिछले कुछ सालों से बिहार की राजनीति में सक्रिय थे और ‘जन सुराज’ के माध्यम से लगातार यह दावा कर रहे थे कि बिहार की जनता बदलाव चाहती है. उनके सर्वे और जमीनी आंकलन यह संकेत दे रहे थे कि नीतीश कुमार के खिलाफ ‘एंटी-इनकम्बेंसी’ इतनी ज्यादा है कि एनडीए को इस बार बहुमत मिलना मुश्किल होगा. उन्होंने महागठबंधन को बढ़त मिलने या त्रिशंकु विधानसभा बनने की भविष्यवाणी की थी. लेकिन तकरीबन सबी टीवी चैनल्स ने एग्जिट पोल ने एनडीए को 140 से अधिक सीटें दिखाकर उनके सभी आकलनों पर पानी फेर दिया है.
अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान का ‘मास्टरस्ट्रोक’
प्रशांत किशोर के ‘बदलाव के प्लान’ को धाराशायी करने का पूरा क्रेडिट बीजेपी के दो कद्दावर नेताओं को जा रहा है. ये हैं केंद्रीय गृहमंत्री और बीजेपी के मुख्य रणनीतिकार अमित शाह और बिहार चुनाव के प्रभारी केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान. इन दोनों नेताओं की रणनीति ने पीके के दावों को गलत साबित कर दिया. अमित शाह की माइक्रो मैनेजमेंट ने बिहार में कमाल कर दिया. शाह ने चुनाव से पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अगला चुनाव सिर्फ सुशासन के नाम पर नहीं, बल्कि सुरक्षा, राष्ट्रवाद और केंद्रीय योजनाओं के आधार पर लड़ा जाएगा. उन्होंने बिहार में ‘360 डिग्री कवरेज’ के तहत हर छोटी सीट पर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया, जिसने कमजोर पड़ी जेडीयू की मदद की.
बीजेपी के चाणक्य का दिखा दम!
धर्मेंद्र प्रधान की सीट मैनेजमेंट और लगातार कैंपेन ने एनडीए को फायदा पहुंचाया. प्रधान ने समीकरणों को समझते हुए सीटों के चुनावी लड़ाकों को प्रभावी ढंग से मैनेज किया. उन्होंने ध्रुवीकरण योगी फैक्टर और ‘बुर्का पॉलिटिक्स’ जैसे मुद्दों को आगे लाकर वोटरों के एजेंडे को बदलने में सफलता पाई. यह रणनीति सीमांचल जैसी 122 सीटों पर खासकर प्रभावी रही.
एनडीए की रणनीति ने नीतीश कुमार के महिला मतदाताओं के बीच की छवि और पीएम मोदी के विकास के मुद्दे को जोड़कर पेश किया. यह रणनीति तेजस्वी यादव के ‘नौकरी’ के वादे को काटने में सफल रही. 10 हजार रुपये और 1100 रुपये पेंशन जैसी लाभार्थी स्कीम एनडीए के लिए गेम चेंजर साबित हुआ. एग्जिट पोल के नतीजे यही बताते हैं कि प्रशांत किशोर का सिर्फ ‘एंटी-इनकम्बेंसी’ पर निर्भर रहना गलत साबित हुआ, जबकि बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने माइक्रो-लेवल पर जाकर एक जटिल चुनावी गणित को सफल कर दिखाया. अब जन सुराज और अन्य चुनावी पंडितों को 14 नवंबर के फाइनल नतीजों का इंतजार है यह देखने के लिए कि यह ‘खेला’ कितना सटीक बैठता है.

