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भारत की अग्नि-5 लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों में सबसे अहम हथियारों में गिनी जाती है. 5 हजार किलोमीटर से अधिक की इसकी रेंज दक्षिण एशिया से लेकर चीन, मध्य एशिया, पश्चिम एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों को अपनी जद में लेती है. पाकिस्तान और चीन ही नहीं, इसकी रेंज में कई अन्य देश तक जाती है. जानिए अग्नि-5 की तकनीकी खूबियां, इसकी स्ट्रैटेजिक अहमियत और भारत की सिक्योरिटी पॉलिसी में यह मिसाइल को कैसे खास बनाती हैं.
दक्षिण एशिया: अग्नि-5 भारत की सबसे लंबी दूरी वाली प्रमुख बैलिस्टिक मिसाइलों में शामिल है. इसकी 5,000 किमी से अधिक की रेंज पूरे दक्षिण एशिया को कवर करती है. पाकिस्तान समेत पूरे इलाके तक इसकी पहुंच भारत की स्ट्रैटेजिक डेटरेंस यानी दुश्मन को हमले से रोकने वाली क्षमता देती है. ठोस ईंधन इसकी सबसे बड़ी खासियत है. | अग्नि मिसाइल की जद में कौन से देश: पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान.
मध्य एशिया: अग्नि-5 की लंबी रेंज भारत की स्ट्रैटेजिक पहुंच को मध्य एशिया तक ले जाती है. कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे देश इसके दायरे में आते हैं. थ्री-स्टेज सॉलिड फ्यूल टेक्नोलॉजी की मदद से यह मिसाइल लंबी दूरी तय करने में सक्षम है. यह भारत की एडवांस्ड मिसाइल टेक्नोलॉजी का बेहतरीन नमूना है. | अग्नि मिसाइल की जद में कौन से देश: कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान.
मिडिल-ईस्ट: करीब 5,000–5,500 किमी की रेंज वेस्ट एशिया यानी मिडिल ईस्ट के बड़े हिस्से तक आसानी से पहुंच सकती है. ईरान, इराक और खाड़ी के कई देश इस दायरे में आते हैं. अग्नि-5 की कैनिस्टराइज्ड लॉन्च क्षमता बेहद खास है, जिससे मिसाइल को सेफ रखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से लॉन्च करने में मदद मिलती है. | अग्नि मिसाइल की जद में कौन से देश: ईरान, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, यमन, जॉर्डन, इजरायल, सीरिया और तुर्की का बड़ा हिस्सा.
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साउथ-ईस्ट एशिया: अग्नि-5 की पहुंच म्यांमार से आगे थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों तक है. यह इलाका भारत की इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी के लिहाज से बेहद अहम है. लंबी दूरी, सॉलिड फ्यूल और मोबाइल लॉन्च की क्षमता अग्नि-5 को भारत की मजबूत स्ट्रैटेजिक डेटरेंस की मजबूती देती है. | अग्नि मिसाइल की जद में कौन से देश: म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया का बड़ा हिस्सा और फिलीपींस का पश्चिमी हिस्सा.
ईस्ट एशिया: अग्नि-5 की सबसे बड़ी स्ट्रैटेजिक अहमितयत पूर्वी एशिया, खासकर चीन के संदर्भ में देखा जाता है. इसकी रेंज में चीन का बड़ा हिस्सा आता है. मिसाइल में एडवांस्ड नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है. लंबी दूरी के बावजूद सटीक लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता इसकी सबसे बड़ी तकनीकी खासियतों में है. | अग्नि मिसाइल की जद में कौन से देश: चीन का अधिकांश हिस्सा, मंगोलिया क बड़ा हिस्सा और रूस का दक्षिणी और पूर्वी हिस्सा.
यूरोप: भारत के अलग-अलग लॉन्च पॉइंट से अग्नि-5 की अधिकतम रेंज यूरोप के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों तक पहुंच सकती है. काकेशस और तुर्की के आसपास के इलाके अग्नि-5 की जद में आते हैं. यह भारत की लॉन्ग-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल कैपेबिलिटी को बताने के लिए काफी है. | अग्नि मिसाइल की जद में कौन से देश: तुर्की, ग्रीस, बुल्गारिया, रोमानिया, मोल्दोवा, यूक्रेन का दक्षिणी हिस्सा, रूस के यूरोपीय हिस्से के कुछ इलाका, जॉर्जिया, आर्मेनिया और अजरबैजान.
अफ्रीका: अग्नि-5 की रेंज अफ्रीका के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों को भी अपनी जद में ले लेती है. मिस्र, सूडान, इथियोपिया, जिबूती और सोमालिया के कुछ इलाके दूरी के हिसाब से दायरे में आते हैं. हिंद महासागर क्षेत्र के पास भारत की भौगोलिक स्थिति इस क्षमता को बेहद खास बना देती है. | अग्नि मिसाइल की जद में कौन से देश: मिस्र, सूडान, दक्षिण सूडान, इरिट्रिया, इथियोपिया, जिबूती, सोमालिया, केन्या, युगांडा के कुछ हिस्से, लीबिया के पूर्वी हिस्से और चाड के कुछ हिस्से.

