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Jehanabad Supi Fort History: जहानाबाद के सुपी गांव में एक प्राचीन गढ़ है. जो मुगलकाल से भी पुराना है. यह चारों ओर जल से घिरा था. इसकी सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य थी. मुगलों और अंग्रेजों ने भी इसका उपयोग किया. स्थानीय लोग इसके इतिहास को उजागर करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए खुदाई की मांग कर रहे हैं.
जहानाबाद: बिहार की राजधानी पटना और मोक्ष भूमि के बीच बसे जहानाबाद जिला का इतिहास प्राचीन और समृद्ध है. यहां वाणावर पहाड़ की तलहटी में मौजूद गुफाएं सम्राट अशोक के समय की पहचान को उजागर करता है. हुलासगंज का दावथू गांव और रतनी के घेजन गांव में मौजूद भगवान बुद्ध की मूर्ति जिले की ऐतिहासिकता को प्रमाणित करता है. इसी कड़ी में जिला मुख्यालय से 14 किमी की दूरी पर स्थित सुपी गांव मुगल कालीन इतिहास से भी पुराना अस्तित्व अपने अंदर समेटे हुए है. अंग्रेजों का इतिहास भी यहां पर मिलता है.
मुगल काल से भी पुराना है यहां का गढ़
इस गांव में मौजूद विशाल गढ़ आज भले ही छिन्न भिन्न हो चुका हो, लेकिन ठिकाने आज भी मौजूद है. जानकार बताते हैं कि इस गढ़ पर मुगल सैनिकों का ठिकाना हुआ करता था. चारों तरफ से नहर आकार का जलाशय और बीच में अवस्थित गढ़ इस बात का संकेत देता है कि यह संरचना आक्रमणकारियों से सुरक्षा प्रदान करने को तैयार किया गया था. इसकी ऐतिहासिकता के बारे में स्थानीय का कहना है कि यहां की संरचना में मिट्टी, गारा और चुना का प्रयोग हुआ था. मिट्टी और गारा से तैयार संरचना का अवशेष आज भी जगह जगह मौजूद है. बर्तन के टुकड़ों से ऐसा लगता है कि गढ़ की संरचना मुगल काल से भी पुराना है.
अंग्रेजों ने भी डाला था डेरा
जानकार बताते हैं कि इस गढ़ को बनाने का उद्देश्य शत्रु सैनिकों से सुरक्षा पाना था. मुगलों ने इस गढ़ को यहां उत्पन्न होने वाले विद्रोह से बचाने के लिए बनाया था. बाद में यह भी बात सामने आई कि इस विशाल मानव निर्मित गढ़ का इस्तेमाल अंग्रेजों ने भी किया. मुगल सैनिकों के बाद अंग्रेजी सिपाहियों ने भी इस गढ़ का इस्तेमाल सुरक्षा दृष्टिकोण से किया. क्योंकि इस गढ़ का संरचना ही उस प्रकार से था. यहां की व्यवस्था को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि चारों कॉर्नर पर टावर था और वहां सैनिकों की उपस्थिति रहती.
पर्यटनीय दृष्टि से महत्वपूर्ण
हालांकि, समय के साथ सुपी का विशाल गढ़ अपना अस्तित्व को खोता जा रहा है, जिसकी चिंता ग्रामीणों को हो रही है. नए जमाने के युवाओं को तो यह भी नहीं पता कि यह गढ़ है या क्या? इस विशेष भवन को किस उद्देश्य से तैयार किया गया था? स्थानीय लोग इस गढ़ पर घूमने या खुदाई करने जाते हैं तो मुग़ल काल से भी पुराना अवशेष प्राप्त होता रहता है. ग्रामीणों की यह चाह है कि इस विशेष स्थल की बार खुदाई हो और इसका इतिहास को पता लगाया जाय. कुछ साक्ष्य मिलता है तो यहां पर्यटनीय दृष्टिकोण से काफी महत्त्वपूर्ण हो जाएगा.
धरोहर को बचाने की अपील
स्थानीय ललित शंकर ने कहा कि सुपी गढ़ बहुत प्राचीन स्थल है. इस गढ़ के बगल से आमस दरभंगा एक्सप्रेसवे गुजर रही है. यह जगह ऐतिहासिक और पुरातात्विक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. बचपन से इस गढ़ का दीदार कर रहे हैं, लेकिन समय के साथ यह अपना अस्तित्व खोता जा रहा है. अब जरूरत है कि इस ऐतिहासिक गढ़ की खुदाई हो और मगध की पुरातत्विक पहचान वापस लाई जाए, जिससे पर्यटन का द्वार भी खुले.
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अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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